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खदेरागांव और नेवलगांव के लोगों ने लिया चुनाव बहिष्कार का निर्णय
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मौलेखाल में चुनाव बहिष्कार को लेकर बैठक करते ग्रामीण
- फोटो : ALMORA
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अल्मोड़ा। विधानसभा चुनाव के लिए जिले में सड़कों के अभाव का मुद्दा चर्चा में है। हर चुनाव में राजनीतिक दलों के वादों के बाद भी कई गांव सड़क से नहीं जुड़ सके हैं। इसलिए खदेरागांव और नेवलगांव के ग्रामीण अब विधानसभा चुनाव का बहिष्कार कर रहे हैं। मंगलवार को सल्ट विधानसभा के खदेरागांव और नेवलगांव के लोगों ने भी विधानसभा चुुनाव के बहिष्कार का निर्णय लिया है।
सल्ट ब्लॉक मुख्यालय से 15 किमी दूर है खदेरागांव और नेवलगांव। यहां के ग्रामीण लंबे समय से सड़क की मांग कर रहे हैं। चुनाव के समय ग्रामीणों को सड़क का आश्वासन भी दिया गया लेकिन सड़क नहीं मिली। मंगलवार को खदेरागांव और नेवलगांव के ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान हेमा देवी के नेतृत्व में बैठक कर विधानसभा चुनाव के बहिष्कार का प्रस्ताव पास किया। ग्रामीणों ने डीएम को ज्ञापन भी भेजा। बताया कि इस गांव के 390 वोटर मतदान नहीं करेंगे।
उनका कहना था कि प्रदेश बनने के बाद भाजपा और कांग्रेस की सरकारें 10-10 साल रहीं लेकिन गांव तक किसी ने सड़क नहीं पहुंचाई। इस कारण ग्रामीणों को आठ किमी पैदल चलकर मुख्य सड़क तक पहुंचना होता है। सड़क के अभाव में स्वास्थ्य खराब होने पर गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों, दिव्यांगों को डोली या चारपाई से लाना और ले जाना पड़ता है।
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ग्रामीणों को बेहतर शिक्षा सुविधा भी नहीं मिल रही है। बैठक में आलम सिंह, महिपाल सिंह, गोपाल सिंह, विशाल सिंह, जीवन सिंह, मंगल सिंह, वीरेंद्र सिंह, श्याम सिंह, विक्रम सिंह, हिरुली देवी, सीता देवी, सुरेंद्र सिंह, नंदी देवी, मंजू देवी, जोगुली देवी आदि शामिल रहे।
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सल्ट ब्लॉक मुख्यालय से 15 किमी दूर है खदेरागांव और नेवलगांव। यहां के ग्रामीण लंबे समय से सड़क की मांग कर रहे हैं। चुनाव के समय ग्रामीणों को सड़क का आश्वासन भी दिया गया लेकिन सड़क नहीं मिली। मंगलवार को खदेरागांव और नेवलगांव के ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान हेमा देवी के नेतृत्व में बैठक कर विधानसभा चुनाव के बहिष्कार का प्रस्ताव पास किया। ग्रामीणों ने डीएम को ज्ञापन भी भेजा। बताया कि इस गांव के 390 वोटर मतदान नहीं करेंगे।
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उनका कहना था कि प्रदेश बनने के बाद भाजपा और कांग्रेस की सरकारें 10-10 साल रहीं लेकिन गांव तक किसी ने सड़क नहीं पहुंचाई। इस कारण ग्रामीणों को आठ किमी पैदल चलकर मुख्य सड़क तक पहुंचना होता है। सड़क के अभाव में स्वास्थ्य खराब होने पर गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों, दिव्यांगों को डोली या चारपाई से लाना और ले जाना पड़ता है।
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ग्रामीणों को बेहतर शिक्षा सुविधा भी नहीं मिल रही है। बैठक में आलम सिंह, महिपाल सिंह, गोपाल सिंह, विशाल सिंह, जीवन सिंह, मंगल सिंह, वीरेंद्र सिंह, श्याम सिंह, विक्रम सिंह, हिरुली देवी, सीता देवी, सुरेंद्र सिंह, नंदी देवी, मंजू देवी, जोगुली देवी आदि शामिल रहे।