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वीएल धान की तीन प्रजातियां धान उत्पादन बढ़ाने में करेगी मदद

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Tue, 18 Jan 2022 11:45 PM IST
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New Rice From VPKAS
वीएल धान 210 - फोटो : ALMORA
अल्मोड़ा। विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (वीपीकेएएस) अल्मोड़ा में धान की तीन प्रजातियां विकसित की गईं हैं। इनके नाम वीएल धान 69, वीएल धान 210, वीएल धान 211 हैं। केंद्रीय फसल मानक, अधिसूचना और किस्म विमोचन उपसमिति नई दिल्ली की एसओ 8(ई) ने इनको उत्तराखंड की पर्वतीय जैविक परिस्थिति वर्षा आश्रित उपरांऊ चैती बुवाई के लिए अधिसूचित किया है। वीएल धान 69 को उत्तराखंड के अलावा सिक्किम और जम्मू कश्मीर के लिए भी अधिसूचित किया गया है।
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संस्थान के कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार वीएल धान 69 का रंग लाल-भूरा होता हैै, जो सामान्य चावल की तुलना में बाजार में अधिक कीमत प्राप्त कर सकता है। यह पत्ती झौंका, बाली झौंका, भूरी चित्ती, पर्णच्छद विगलन के लिए मध्यम प्रतिरोधी हैं। इसका दाना छोटा और मोटा होता है। पौधे की ऊंचाई 90 से 105 सेमी तक होती है। इसकी परिपक्वता अवधि 125-130 दिन और प्रतिवर्ग मीटर बालियों की संख्या 282 है। इसकी औसत उपज 4,255 किग्रा प्रति हेक्टेयर है।
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वीएल धान 210 वसंत में बोई जाने वाली वर्षा आश्रित धान की लंबे पतले दाने वाली किस्म है। इसकी जैविक परिस्थिति में औसत उपज 2,157 किग्रा है। यह प्राकृतिक स्थिति में पत्ती औक बाली झौंका, भूरा चित्ती, पर्णच्छद विगलन, पर्णच्छद अंगमारी, आभासी कांड, पत्ती लपेटक, तना बेधक के लिए प्रतिरोधी है। इसमें उच्च हलिंग (78) प्रतिशत, मिलिंग (67) प्रतिशत, हेड राइस रिकवरी (58) प्रतिशत, एमाइलोज (22.8) प्रतिशत पाया जाता है।
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वीएल धान 211 के दाने छोटे और मोटे होते हैं। यह पत्ती, बाली रोग के लिए प्रतिरोधी है। इसमें जैविक परिस्थितियों में 2,088 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की औसत क्षमता है। इसके पौधे की ऊंचाई 100-110 सेमी तक होती है। इसमें बहुत अच्छे गुण जैसे 80 प्रतिशत हलिंग, 69 प्रतिशत मिलिंग, 60 प्रतिशत हेड राइस रिकवरी, 24.8 प्रतिशत एमाइलेज है। वीपीकेएएस संस्थान के निदेशक डॉ. लक्ष्मीकांत ने कहा कि उम्मीद है कि संस्थान में विकसित धान की ये तीनों प्रजातियां अनुमोदित क्षेत्रों में धान उत्पादन बढ़ाएंगी। संबंधित क्षेत्रों के किसानों की आय भी बढ़ेगी।
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