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गैरसैंण राजधानी के लिए आर-ापार की लड़ाई का संकल्प
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गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने को लेकर चौखुटिया में नारेबाजी करते लोग। संवाद न्यूज एजेंसी
- फोटो : ALMORA
चौखुटिया(अल्मोड़ा)। गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने की मांग को लेकर लोग फिर लामबंद होने लगे हैं। इसको लेकर क्रांतिवीर चौराहे पर हुई जनसभा में जन गीतों के साथ स्थायी राजधानी की अलख जगाने का संकल्प लिया गया। इस दौरान गैरसैंण के पक्ष में नारेबाजी भी की गई। सभा में चौखुटिया और गैरसैंण तहसील के लोग शामिल हुए।
क्रांतिवीर चौराहे पर हुई जनसभा में लोगों ने गैरसैंण राजधानी को लेकर आर-पार के संघर्ष के लिए तैयार रहने की बात कही। उनका कहना था कि गैरसैंण राजधानी बने बगैर पहाड़ के विकास की कल्पना नहीं की जा सकती है। इस दौरान बढ़ते पलायन सहित अन्य समस्याओं को लेकर भी सरकारों की नीतियों को जिम्ेदार ठहराया गया। अंत में 38 राज्य आंदोलनकारियों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने की मांग की गई।
सभा की अध्यक्षता रंगकर्मी जसीराम और संचालन राजधानी संघर्ष समिति के अध्यक्ष नारायण सिंह बिष्ट ने किया। इस मौके पर डॉ. कुलदीप सिंह बिष्ट, एलडी मठपाल, बिपिन शर्मा, आनंद किरौला, जसवंत बिष्ट, मनोज ध्यानी, नारायण पाठक, मदन भंडारी, राजेंद्र कांडपाल, गणेश जोशी,पूरन रिखाड़ी, सोबन सिंह भंडारी, केवल रावत, दरबान बिष्ट, उमराव नेगी, आनंद मनराल सहित कई लोग मौजूद थे। अंत में स्व. गिर्दा के लिखे गीत उत्तराखंडा मेरी मातृभूमि, मेरी पितृभूमि तेरी जयजयकारा हो गाकर सभा का समापन हुआ।
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क्रांतिवीर चौराहे पर हुई जनसभा में लोगों ने गैरसैंण राजधानी को लेकर आर-पार के संघर्ष के लिए तैयार रहने की बात कही। उनका कहना था कि गैरसैंण राजधानी बने बगैर पहाड़ के विकास की कल्पना नहीं की जा सकती है। इस दौरान बढ़ते पलायन सहित अन्य समस्याओं को लेकर भी सरकारों की नीतियों को जिम्ेदार ठहराया गया। अंत में 38 राज्य आंदोलनकारियों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने की मांग की गई।
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सभा की अध्यक्षता रंगकर्मी जसीराम और संचालन राजधानी संघर्ष समिति के अध्यक्ष नारायण सिंह बिष्ट ने किया। इस मौके पर डॉ. कुलदीप सिंह बिष्ट, एलडी मठपाल, बिपिन शर्मा, आनंद किरौला, जसवंत बिष्ट, मनोज ध्यानी, नारायण पाठक, मदन भंडारी, राजेंद्र कांडपाल, गणेश जोशी,पूरन रिखाड़ी, सोबन सिंह भंडारी, केवल रावत, दरबान बिष्ट, उमराव नेगी, आनंद मनराल सहित कई लोग मौजूद थे। अंत में स्व. गिर्दा के लिखे गीत उत्तराखंडा मेरी मातृभूमि, मेरी पितृभूमि तेरी जयजयकारा हो गाकर सभा का समापन हुआ।
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