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खेतों की सिंचाई को ग्रामीण कोसी नदी में सिरखेत में स्वयं बना रहे तटबंध
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सोमेश्वर (अल्मोड़ा)। सरकार और संबंधित विभाग खेती को बढ़ावा देने के लिए सभी सुविधाएं किसानों को देने के दावा कर रहे हैं पर सिंचाई विभाग की उपेक्षा से आहत सोमेश्वर घाटी के किसानों को कोसी नदी के पास सिरखेत में स्वयं तटबंध का निर्माण करना पड़ रहा है। इसके बाद खेतों में धान की पौध की रोपाई कर रहे हैं। ग्रामीणों में सिंचाई विभाग के खिलाफ आक्रोश है।
सोमेश्वर घाटी क्षेत्र के गांवों में बहुतायत में धान की खेती की जाती है। सिरखेत शेरे में अर्जुन राठ, बमनफल्यां, भानाराठ, मल्लाखोली के ग्रामीणों की करीब दो सौ नाली कृषि भूमि है।
कोसी नदी के पास सिरखेत के तटबंध से सिरखेत शेरे में नहर के जरिए सिंचाई के लिए पानी की आपूर्ति होती है। पर पिछले दिनों हुई बारिश से सिरखेत में बना तटबंध बह गया।
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ग्रामीणों का कहना है कि इस संबंध में सिंचाई विभाग के अधिकारियों को अवगत कराकर तटबंध बनाने की मांग की गई, लेकिन विभाग ने ध्यान नहीं दिया। जिससे धान की रोपाई में सप्ताह भर का विलंब हो गया।
विभाग की उपेक्षा से खिन्न ग्रामीणों ने स्वयं सिरखेत में कोसी नदी में तटबंध बनाने का निर्णय लिया। ग्रामीण पत्थर और पॉलिथीन लगाकर तटबंध तैयार कर रहे हैं।
नदी में पानी बढ़ने पर अस्थायी तटबंध बह जा रहा है। इससे किसानों को प्रतिदिन तटबंध का निर्माण करना पड़ा रहा है। इसके बाद नहर के जरिये खेतों तक पानी पहुंचाकर धान की रोपाई कर रहे हैं।
सिंचाई विभाग के अधिकारियों को कई बार तटबंध बह जाने की जानकारी दी गई, लेकिन विभाग ने तटबंध बनाने में रुचि नहीं ली। जिसके बाद ग्रामीण स्वयं तटबंध तैयार कर खेतों में धान की रोपाई कर रहे हैं।
सुरेश बोरा, ग्राम प्रधान अर्जुनराठ।
तटबंध क्षतिग्रस्त होने से धान की रोपाई प्रभावित हो रही है। सिंचाई विभाग को जल्द से जल्द तटबंध का निर्माण करवाना चाहिए, ताकि काश्तकारों को खेतों की
सिंचाई करने में दिक्कत नहीं हो।
हरपाल सिंह बोरा, काश्तकार
धान की रोपाई के लिए वर्तमान में खेतों मेें पानी की जरूरत है पर तटबंध बह जाने से सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है। इसका असर धान की रोपाई पर पड़ रहा है। तटबंध जल्द दुरुस्त होना चाहिए।
रिंकू सिंह बोरा, काश्तकार।
पिछले दिनों हुई बारिश से कोसी नदी में सिरखेत समेत अन्य स्थानों पर बनाए गए तटबंध बह गए थे। राशि के अभाव में तटबंधों का निर्माण नहीं हो पा रही है। इंस्टीमेट तैयार कर भेजा जा रहा है। राशि मिलने पर तटबंधों का निर्माण किया जाएगा।
- प्रमोद कुमार पाठक, सहायक अभियंता, सिंचाई विभाग।
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सोमेश्वर घाटी क्षेत्र के गांवों में बहुतायत में धान की खेती की जाती है। सिरखेत शेरे में अर्जुन राठ, बमनफल्यां, भानाराठ, मल्लाखोली के ग्रामीणों की करीब दो सौ नाली कृषि भूमि है।
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कोसी नदी के पास सिरखेत के तटबंध से सिरखेत शेरे में नहर के जरिए सिंचाई के लिए पानी की आपूर्ति होती है। पर पिछले दिनों हुई बारिश से सिरखेत में बना तटबंध बह गया।
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ग्रामीणों का कहना है कि इस संबंध में सिंचाई विभाग के अधिकारियों को अवगत कराकर तटबंध बनाने की मांग की गई, लेकिन विभाग ने ध्यान नहीं दिया। जिससे धान की रोपाई में सप्ताह भर का विलंब हो गया।
विभाग की उपेक्षा से खिन्न ग्रामीणों ने स्वयं सिरखेत में कोसी नदी में तटबंध बनाने का निर्णय लिया। ग्रामीण पत्थर और पॉलिथीन लगाकर तटबंध तैयार कर रहे हैं।
नदी में पानी बढ़ने पर अस्थायी तटबंध बह जा रहा है। इससे किसानों को प्रतिदिन तटबंध का निर्माण करना पड़ा रहा है। इसके बाद नहर के जरिये खेतों तक पानी पहुंचाकर धान की रोपाई कर रहे हैं।
सिंचाई विभाग के अधिकारियों को कई बार तटबंध बह जाने की जानकारी दी गई, लेकिन विभाग ने तटबंध बनाने में रुचि नहीं ली। जिसके बाद ग्रामीण स्वयं तटबंध तैयार कर खेतों में धान की रोपाई कर रहे हैं।
सुरेश बोरा, ग्राम प्रधान अर्जुनराठ।
तटबंध क्षतिग्रस्त होने से धान की रोपाई प्रभावित हो रही है। सिंचाई विभाग को जल्द से जल्द तटबंध का निर्माण करवाना चाहिए, ताकि काश्तकारों को खेतों की
सिंचाई करने में दिक्कत नहीं हो।
हरपाल सिंह बोरा, काश्तकार
धान की रोपाई के लिए वर्तमान में खेतों मेें पानी की जरूरत है पर तटबंध बह जाने से सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है। इसका असर धान की रोपाई पर पड़ रहा है। तटबंध जल्द दुरुस्त होना चाहिए।
रिंकू सिंह बोरा, काश्तकार।
पिछले दिनों हुई बारिश से कोसी नदी में सिरखेत समेत अन्य स्थानों पर बनाए गए तटबंध बह गए थे। राशि के अभाव में तटबंधों का निर्माण नहीं हो पा रही है। इंस्टीमेट तैयार कर भेजा जा रहा है। राशि मिलने पर तटबंधों का निर्माण किया जाएगा।
- प्रमोद कुमार पाठक, सहायक अभियंता, सिंचाई विभाग।