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Almora News: आईएमपीसीएल विनिवेश के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचे कर्मचारी
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मौलेखाल(अल्मोड़ा)। सल्ट के मोहान स्थित भारतीय आयुर्वेद एवं यूनानी औषधि निर्माण निगम (आईएमपीसीएल) के विनिवेश के विरोध में चल रहा कर्मचारियों का आंदोलन लगातार जारी है। आंदोलन के 45वें दिन ट्रेड यूनियन आईएमपीसीएल कर्मचारी संघ ने बड़ा कदम उठाते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है।
याचिका में आईएमपीसीएल को बेचे जाने की पूरी प्रक्रिया में अनियमितताएं बरते जाने का आरोप लगाते हुए संपूर्ण विनिवेश प्रक्रिया को निरस्त करने की मांग की गई है। कर्मचारी संघ का कहना है कि देश की एकमात्र सरकारी दवा फैक्टरी जो साल दर साल करोड़ों रुपये का मुनाफा कमा रही है उसे मात्र 121 करोड़ में बेच दिया गया है जबकि कंपनी की नेटवर्थ भी 145 करोड़ के आसपास है।
उन्होंने कहा कि विनिवेश के दौरान निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया जिससे कर्मचारियों के हितों के साथ-साथ सार्वजनिक संपत्ति को भी नुकसान पहुंचा है।
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उधर आईएमपीसीएल बचाओ आंदोलन को डेढ़ महीना पूरा हो गया है। 45 दिनों से कर्मचारी लगातार धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। लंबे समय से आंदोलन जारी रहने के बावजूद कर्मचारियों का उत्साह और हौसला बरकरार है। कर्मचारियों ने दोहराया कि जब तक विनिवेश का निर्णय वापस नहीं लिया जाता तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
ट्रेड यूनियन के पदाधिकारियों ने कहा कि अब न्यायालय से उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद है। साथ ही उन्होंने सरकार से भी कर्मचारियों की भावनाओं और आईएमपीसीएल के भविष्य को ध्यान में रखते हुए विनिवेश के निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग की। बुधवार को फैक्टरी गेट पर धरने में कुंदन सिंह मेहरा, भजन सिंह, कमला अधिकारी, भाग्यश्री घले, किरन भारद्वाज आदि मौजूद रहे।
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याचिका में आईएमपीसीएल को बेचे जाने की पूरी प्रक्रिया में अनियमितताएं बरते जाने का आरोप लगाते हुए संपूर्ण विनिवेश प्रक्रिया को निरस्त करने की मांग की गई है। कर्मचारी संघ का कहना है कि देश की एकमात्र सरकारी दवा फैक्टरी जो साल दर साल करोड़ों रुपये का मुनाफा कमा रही है उसे मात्र 121 करोड़ में बेच दिया गया है जबकि कंपनी की नेटवर्थ भी 145 करोड़ के आसपास है।
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उन्होंने कहा कि विनिवेश के दौरान निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया जिससे कर्मचारियों के हितों के साथ-साथ सार्वजनिक संपत्ति को भी नुकसान पहुंचा है।
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उधर आईएमपीसीएल बचाओ आंदोलन को डेढ़ महीना पूरा हो गया है। 45 दिनों से कर्मचारी लगातार धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। लंबे समय से आंदोलन जारी रहने के बावजूद कर्मचारियों का उत्साह और हौसला बरकरार है। कर्मचारियों ने दोहराया कि जब तक विनिवेश का निर्णय वापस नहीं लिया जाता तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
ट्रेड यूनियन के पदाधिकारियों ने कहा कि अब न्यायालय से उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद है। साथ ही उन्होंने सरकार से भी कर्मचारियों की भावनाओं और आईएमपीसीएल के भविष्य को ध्यान में रखते हुए विनिवेश के निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग की। बुधवार को फैक्टरी गेट पर धरने में कुंदन सिंह मेहरा, भजन सिंह, कमला अधिकारी, भाग्यश्री घले, किरन भारद्वाज आदि मौजूद रहे।