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मानवाधिकार दिवस पर कैदियों को मानवाधिकार की जानकारी
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मानवाधिकार दिवस पर आयोजित शिविर में मौजूद लोग।
- फोटो : ALMORA
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अल्मोड़ा। मानवाधिकार दिवस पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से जिला न्यायालय सभागार में आयोजित कार्यक्रम में जिला न्यायाधीश मलिक मजहर सुल्तान ने बताया कि मानवाधिकार का अर्थ विश्व में रहने वाले प्रत्येक मानव को प्राप्त कुछ विशेष अधिकार है जो विश्व को एक सूत्र में बांधते हों।
मानवाधिकार दिवस लोगों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से मनाया जाता है। मानव अधिकार का मतलब मनुष्यों को वो सभी अधिकार देना है, जो व्यक्ति के जीवन, स्वतंत्रता, समानता और प्रतिष्ठा से जुड़े हुए हैं। यह सभी अधिकार भारतीय संविधान के भाग-तीन में मूल अधिकारों के नाम से मौजूद हैं और इन अधिकारों का उल्लंघन होने पर कोई भी व्यक्ति सीधे उच्चतम न्यायालय में रिट दायर कर सकता है। इस मौके पर अधिवक्ता महेश चंद परिहार, भानु तिलारा, पीसी तिवारी, जमन सिंह ने विचार रखे। कार्यक्रम में परिवार न्यायाधीश, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अल्मोड़ा, सिविल जज (सीनियर डिविजन), सिविल जज (जूनियर डिविजन) आदि मौजूद थे। इधर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव रवि शंकर मिश्रा ने जिला कारागार अल्मोड़ा में शिविर का आयोजन कर कैदियों को मानवाधिकार के संबंध में जानकारी दी।
मानवाधिकार हनन पर चिंता जताई
अल्मोड़ा। विश्व मानवाधिकार दिवस पर जनवादी महिला समिति की डोबानौला में हुई गोष्ठी में नागरिक अधिकारों पर लगातार बढ़ रहे हमलों पर चिंता जताई गई। वक्ताओं ने कहा कि आज सांप्रदायिक ताकतों के अल्पसंख्यकों पर हमले, दलितों, महिलाओं और कमजोर वर्गों पर अत्याचारों पर न्याय पाना मुश्किल हो गया है। गोष्ठी में पूर्वोत्तर के राज्यों में निर्दोष नागरिकों की निर्मम हत्या पर रोष जताया गया। इस मौके पर सीडीएस बिपिन रावत को भी अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि दी गई। अध्यक्षता भगवती रावत ने की। वहां पर समिति की प्रांतीय अध्यक्ष सुनीता पांडे, जिला उपाध्यक्ष चंदा राना, सचिव पूनम, कार्यकारिणी सदस्य रीतू रावत, किरण, नीमा, दीक्षा आदि थीं। संचालन किरण राना ने किया।
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अल्मोड़ा। मानवाधिकार दिवस पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से जिला न्यायालय सभागार में आयोजित कार्यक्रम में जिला न्यायाधीश मलिक मजहर सुल्तान ने बताया कि मानवाधिकार का अर्थ विश्व में रहने वाले प्रत्येक मानव को प्राप्त कुछ विशेष अधिकार है जो विश्व को एक सूत्र में बांधते हों।
मानवाधिकार दिवस लोगों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से मनाया जाता है। मानव अधिकार का मतलब मनुष्यों को वो सभी अधिकार देना है, जो व्यक्ति के जीवन, स्वतंत्रता, समानता और प्रतिष्ठा से जुड़े हुए हैं। यह सभी अधिकार भारतीय संविधान के भाग-तीन में मूल अधिकारों के नाम से मौजूद हैं और इन अधिकारों का उल्लंघन होने पर कोई भी व्यक्ति सीधे उच्चतम न्यायालय में रिट दायर कर सकता है। इस मौके पर अधिवक्ता महेश चंद परिहार, भानु तिलारा, पीसी तिवारी, जमन सिंह ने विचार रखे। कार्यक्रम में परिवार न्यायाधीश, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अल्मोड़ा, सिविल जज (सीनियर डिविजन), सिविल जज (जूनियर डिविजन) आदि मौजूद थे। इधर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव रवि शंकर मिश्रा ने जिला कारागार अल्मोड़ा में शिविर का आयोजन कर कैदियों को मानवाधिकार के संबंध में जानकारी दी।
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मानवाधिकार हनन पर चिंता जताई
अल्मोड़ा। विश्व मानवाधिकार दिवस पर जनवादी महिला समिति की डोबानौला में हुई गोष्ठी में नागरिक अधिकारों पर लगातार बढ़ रहे हमलों पर चिंता जताई गई। वक्ताओं ने कहा कि आज सांप्रदायिक ताकतों के अल्पसंख्यकों पर हमले, दलितों, महिलाओं और कमजोर वर्गों पर अत्याचारों पर न्याय पाना मुश्किल हो गया है। गोष्ठी में पूर्वोत्तर के राज्यों में निर्दोष नागरिकों की निर्मम हत्या पर रोष जताया गया। इस मौके पर सीडीएस बिपिन रावत को भी अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि दी गई। अध्यक्षता भगवती रावत ने की। वहां पर समिति की प्रांतीय अध्यक्ष सुनीता पांडे, जिला उपाध्यक्ष चंदा राना, सचिव पूनम, कार्यकारिणी सदस्य रीतू रावत, किरण, नीमा, दीक्षा आदि थीं। संचालन किरण राना ने किया।
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