ऐसे कैसे मिलेगा कुमाऊंनी भाषा को बढ़ावा
सरकार स्थानीय भाषाओं को बढ़ावा देने की बात तो कर रही है पर इस पर अमल नहीं हो रहा है। एसएसजे परिसर अल्मोड़ा में कुमाऊंनी भाषा विभाग खुले एक साल हो गया है परंतु अब तक प्राध्यापकों की नियुक्ति नहीं हुई है। हिंदी विभाग के प्राध्यापक ही कुमाऊंनी भाषा पढ़ा रहे हैं। विवि द्वारा परिसर के कुमाऊंनी विभाग में एक प्रोफेसर, दो रीडर और चार प्रवक्ताओं के पद सृजित करने के लिए भेजे गए प्रस्ताव पर अब तक सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की है।
कुमाऊंनी भाषा विभाग के संयोजक और परिसर के हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. शेर सिंह बिष्ट ने बताया कि परिसर में बीए प्रथम वर्ष में कुमाऊंनी भाषा विषय में प्रवेश शुरू हो गए हैं। इच्छुक छात्र-छात्राएं बीए में एक विषय के रूप में कुमाऊंनी भाषा विषय ले सकते हैं। कुल 80 सीटें हैं। इंटरमीडिएट उत्तीर्ण छात्र-छात्राएं बीए में कुमाऊंनी विषय ले सकते हैं।
कुमाऊंनी-गढ़वाली में शोध करने वालों को मिलेगी दो लाख की छात्रवृत्ति
संस्कृति विभाग ने कुमाऊंनी-गढ़वाली भाषा में उत्कृष्ट शोध कार्य करने वाले शोधार्थियों को दो लाख रुपए की छात्रवृत्ति देने की घोषणा की है। जो विद्यार्थी कुमाऊंनी भाषा में शोध कार्य करना चाहते हैं उन्हें बीए प्रथम वर्ष से ही कुमाऊंनी भाषा को एक विषय के रूप में लेना होगा तभी वे कुमाऊंनी से एमए कर पाएंगे।