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पहले सूखे और अब वनाग्नि से पानी को तरसे लोग
अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा।
Updated Tue, 03 May 2016 10:50 PM IST
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पानी लेने को उमड़ी भीड़।
- फोटो : अमर उजाला
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लंबे समय से बारिश नहीं होने से पहले ही पानी का संकट हो गया था, लेकिन अब जंगलों में लग रही भीषण आग के चलते समस्या और भी विकट हो गई है। जल स्रोतों का स्तर काफी नीचे चला गया है। धौलादेवी ब्लॉक के दर्जनों गांवों के लोगों को जबरदस्त पेयजल संकट से जूझना पड़ रहा है। दन्यां कस्बे और इससे लगे गांवों में पानी की त्राहि-त्राहि मची है। जल संस्थान कभी कभार यहां टैंकर से पानी भेज रहा है। टैंकर से पानी लेने को लोग टूट रहे हैं। ग्रामीण इलाकों में स्थिति और भी खराब हो गई है।
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धौलादेवी ब्लॉक के दन्यां बाजार, रुवाल, उकाल, भनार, कालमाटा, भुवनपुर, काभड़ी, सिरौला, रोल गल्ली, पकून, बसाड़, तलेट, मल्ली भैंसाड़ी, तल्ली भैंसाड़ी, बिरकोला, सिरगांव, अनोली, लमगड़ा, नॉयलधूरा समेत दर्जनों गांवों में पानी के लिए भटक रहे हैं। मोटर मार्ग से लगे गांवों के ग्रामीण कई किमी दूर जाकर सड़क किनारे लगे हैंडपंपों से पानी लाकर काम चला रहे हैं। दूरस्थ गांवों के लोंगों को काफी पैदल दूरी तय कर हैंडपंपों में आना पड़ रहा है।
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गर्मी का मौसम शुरू होते ही प्रशासन ने सड़क से लगे अभावग्रस्त क्षेत्रों में टैंकरों से और दूरस्थ गांवों में घोड़ों और खच्चरों से पानी पहुंचाने के दावे किए थे पर घोड़े और खच्चर तो दूर सड़क में ही टैंकर नहीं चल रहे हैं। जल संस्थान दन्यां बाजार क्षेत्र में कभी कभार वाहनों में प्लास्टिक की टंकियों में दो से ढाई हजार लीटर पानी भेज रहा है। टैंकर आते ही पानी भरने को लोग टूट पड़ रहे हैं। हर दिन नियमित तौर पर टैंकर पहुंचे तो लोगों को कुछ राहत मिलती।
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इधर जल संस्थान के अधिशासी अभियंता नंद किशोर ने बताया कि अभावग्रस्त क्षेत्रों में पानी पहुंचाने को तीन विभागीय टैंकर और सात किराए के वाहन लगाए गए हैं। विभाग का प्रयास है कि हर क्षेत्र में पानी की वैकल्पिक व्यवस्था की जाए, ताकि लोगों को राहत मिल सके।