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लोक साहित्य: परंपरा और विकास संगोष्ठी
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो/अल्मोड़ा।
Updated Thu, 30 Jul 2015 12:38 AM IST
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केंद्रीय हिंदी निदेशालय और महादेवी वर्मा सृजन पीठ के संयुक्त तत्वावधान में एसएसजे परिसर में ‘लोक साहित्य: परंपरा और विकास’ विषय पर तीन दिवसीय संगोष्ठी शुरू हो गई है।
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मुख्य वक्ता गोवा विश्वविद्यालय के अध्यक्ष प्रो. रवींद्रनाथ मिश्र ने कहा कि प्रकृति के वंदन और श्रम से लोक साहित्य का जन्म हुआ है। उन्होंने कहा कि मनुष्य की संवेदना जीवित रखने मेें लोक साहित्य का महत्वपूर्ण योगदान है।
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प्रो. मिश्र ने कहा कि जीवन में शुद्धता, सादगी और सरलता बनाए रखने को लोक साहित्य और लोक संस्कृति की तरफ लौटना होगा। लोक साहित्य समाज का प्रतिबिंब है।
मोहन सिंह रावत ने केंद्रीय हिंदी निदेशालय और महादेवी सूजन पीठ के कार्यों की जानकारी दी। सृजनपीठ के निदेशक प्रो. देव सिंह पोखरिया ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि लोक साहित्य की परंपरा और विकास की जानकारी आम लोगों तक पहुंचाना गोष्ठी का लक्ष्य है।
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उन्होंने कहा कि लोक साहित्य की विविध परंपराओं और रूपों से आज भी जानकारी काफी कम है। प्रथम सत्र में केंद्रीय हिंदी निदेशालय की सहायक निदेशक सुधा उप्रेती ने निदेशालय द्वारा किए जा रहे कार्यों के बारे में बताया।
उन्होंने कहा कि स्थापना के पांच दशकों से निदेशालय लोक साहित्य के संरक्षण और उसे आम लोगों तक पहुंचाने को काम कर रहा है। हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. शेर सिंह बिष्ट, सत्र अध्यक्ष डा. विद्या विंदु सिंह (लखनऊ) ने विचार रखे।
इस मौके पर डा. विष्णु देव सिंह (ओडिसा), परदेशी लाल वर्मा (छत्तीसगढ़), प्रवीण भट्ट, प्रो. ए अच्युतन (शिमला), प्रो. शैलेंद्र शर्मा (उज्जैन), मनोहर वृजवाल, डा. प्रभा पंत, डा. दीपा गोबाड़ी डा. दीपा कांडपाल आदि मौजूद थे।