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टपकते भवनों में सिसकती जिंदगी
ब्यूरो/अमर उजाला, अल्मोड़ा।
Updated Thu, 09 Jul 2015 01:02 AM IST
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ताम्र नगरी के वर्कशॉप शेड्स में रहने वाले 23 परिवारों की हालत दयनीय है। भूतल ही नहीं दूसरी मंजिल पर बने कमरों की हालत भी खस्ता है। मामूली सी बूंदाबांदी में भी कमरों के भीतर पानी टपक रहा है। यहां रहने वाले परिवार कमरों के भीतर छत की तरफ जगह-जगह पॉलीथिन लगा कर किसी तरह रह रहे हैं।
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ताम्र उद्योग को बढ़ावा देने को सरकार ने दो दशक पहले नगर के दुगालखोला में दर्जनों वर्कशॉप शेड तैयार कर ताम्र कारीगरों को आवंटित किए। कई कारणों के चलते कारीगरों को स्वरोजगार देने की यह योजना फेल हो गई। एक-एक कमरे के इन शेड्स को गरीब कारीगरों ने अपने परिवारों का आसरा बना लिया।
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इनमें करीब 23 परिवार निवास कर रहे हैं। दो मंजिले इस भवन की हालत खस्ता है। पहाड़ी से बह कर आने वाला पानी भूतल के कमरों में घुस रहा है तो दो मंजिल पर बने कमरों की छत में कई जगह दरार आ गई है। कमरें के भीतर छत का प्लास्टर गिरने से सरिया दिखाई दे रही हैं और बारिश का पानी कमरों के भीतर घुस रहा है।
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छत से टपक रहे पानी से बचने को इन गरीब परिवारों ने कमरों के भीतर पॉलीथिन की पन्नियां लगाकर रहने, खाने के सामान और बिस्तर, कपड़े बचाने का जुगाड़ किया है। साधनहीन इन गरीब परिवारों का इस हालत मेें रहना मजबूरी है।
कई बार प्रशासन के अधिकारियों से गुहार लगाने के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हुई। दुगालखोला के पूर्व ग्राम प्रधान संजय दुर्गापाल का कहना हैे कि प्रशासन ने यदि समय रहते इन भवनों का सुधार नहीं किया तो कभी भी हादसा हो सकता है।
ताम्र नगरी में रह रहे परिवारों की महिलाओं को बुनाई-कताई का प्रशिक्षण देकर उन्हें स्वरोजगार उपलब्ध कराने को यहां एक कमरे में उद्योग विभाग ने लाखों की लागत से बिनाई और कताई मशीनें लगाई हैं।
इन मशीनों में महिलाएं व्यावसायिक काम भी करती हैं। भवन की जर्जर हो चुकी छत से भीतर घुस रहे पानी ने मशीनों को भी खराब कर दिया है। गरीब जरूरतमंदों ने मशीनों को बचाने को भी पॉलीथिन डाली है।