{"_id":"624b38c1bb4adf6aa670c5d5","slug":"eight-monkeys-in-caged-almora-news-hld458455557","type":"story","status":"publish","title_hn":"धार की तूनी में लगे पिंजरे में फंसे आठ बंदर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
धार की तूनी में लगे पिंजरे में फंसे आठ बंदर
विज्ञापन
अल्मोडा के धार की तूनी में पिंजरे में कैद बंदर
- फोटो : ALMORA
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अल्मोड़ा। नगर पालिका ने बंदरों को पकड़ने के लिए सोमवार से अभियान शुरू कर दिया है। पहले दिन आठ बंदर ही पिंजरे में कैद हुए। पिंजरा लगा देख अन्य बंदर वहां से भाग गए।
नगर पालिका ने बंदरों को पकड़ने के लिए नगर के पांडेखोला और धार की तूनी में पिंजरा लगाया है। धार की तूनी में लगाए गए पिंजरे में आठ बंदर फंस गए। साथियों को पिंजरे में कैद होते देख खतरा भांपकर बंदरों का झुंड वहां से रफूचक्कर हो गया। पांडेखोला में लगाए गए पिंजरे में कोई भी बंदर नहीं फंस पाया। पिंजरा लगे क्षेत्र में बंदरों का झुंड आया ही नहीं। पालिका के अधिशासी अधिकारी महेंद्र कुमार यादव ने बताया कि पकड़े गए बंदरों को रेस्क्यू सेंटर भेज दिया है। उन्होंने बताया कि बंदरों को पकड़ने का अभियान जारी रहेगा। इधर, नगर के ढूंगाधारा, एनटीडी, जाखनदेवी, खोल्टा, धारानौला, खत्याड़ी, नृसिंहबाड़ी, पांडेखोला, लक्ष्मेश्वर समेत तमाम मोहल्लों में कटखने बंदरों का आतंक बना हुआ है।
ग्रामीण क्षेत्रों में बंदरों ने खेती चौपट कर दी है तो शहरी क्षेत्र में बंदरों के आतंक से लोगों को आवाजाही में खतरा बना रहता है। शहर का कोई ऐसा क्षेत्र नहीं है जहां बंदर उत्पात नहीं मचा रहे। कहीं बिजली की लाइनें बंदर तोड़ते हैं तो कहीं दुकानों से बंदरों के सामान चुराने के मामले आते हैं। दिन में अगर घर का दरवाजा खुला रहा तो बंदर घर के अंदर घुसकर सामान उठा ले जाते हैं। राहगीरों के हाथ से सामान झपटना तो शहर में आम है। जिन क्षेत्रों में मंदिर है उन क्षेत्रों में बंदरों का आतंक और अधिक है। छतों में सुखाने के लिए डाले गए कपड़े भी बंदर उठा ले जाते हैं। बंदरों के काटने पर पीड़ित आए दिन रैबीज का इंजेक्शन लगाने अस्पताल पहुंचते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
नगर पालिका ने बंदरों को पकड़ने के लिए नगर के पांडेखोला और धार की तूनी में पिंजरा लगाया है। धार की तूनी में लगाए गए पिंजरे में आठ बंदर फंस गए। साथियों को पिंजरे में कैद होते देख खतरा भांपकर बंदरों का झुंड वहां से रफूचक्कर हो गया। पांडेखोला में लगाए गए पिंजरे में कोई भी बंदर नहीं फंस पाया। पिंजरा लगे क्षेत्र में बंदरों का झुंड आया ही नहीं। पालिका के अधिशासी अधिकारी महेंद्र कुमार यादव ने बताया कि पकड़े गए बंदरों को रेस्क्यू सेंटर भेज दिया है। उन्होंने बताया कि बंदरों को पकड़ने का अभियान जारी रहेगा। इधर, नगर के ढूंगाधारा, एनटीडी, जाखनदेवी, खोल्टा, धारानौला, खत्याड़ी, नृसिंहबाड़ी, पांडेखोला, लक्ष्मेश्वर समेत तमाम मोहल्लों में कटखने बंदरों का आतंक बना हुआ है।
विज्ञापन
ग्रामीण क्षेत्रों में बंदरों ने खेती चौपट कर दी है तो शहरी क्षेत्र में बंदरों के आतंक से लोगों को आवाजाही में खतरा बना रहता है। शहर का कोई ऐसा क्षेत्र नहीं है जहां बंदर उत्पात नहीं मचा रहे। कहीं बिजली की लाइनें बंदर तोड़ते हैं तो कहीं दुकानों से बंदरों के सामान चुराने के मामले आते हैं। दिन में अगर घर का दरवाजा खुला रहा तो बंदर घर के अंदर घुसकर सामान उठा ले जाते हैं। राहगीरों के हाथ से सामान झपटना तो शहर में आम है। जिन क्षेत्रों में मंदिर है उन क्षेत्रों में बंदरों का आतंक और अधिक है। छतों में सुखाने के लिए डाले गए कपड़े भी बंदर उठा ले जाते हैं। बंदरों के काटने पर पीड़ित आए दिन रैबीज का इंजेक्शन लगाने अस्पताल पहुंचते हैं।
विज्ञापन