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प्रसव के लिए 34 किमी दूर अल्मोड़ा की दौड़
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो/धौलछीना। (अल्मोड़ा)
Updated Sun, 26 Jul 2015 12:39 AM IST
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स्वास्थ्य सुविधा बेहतर करने को सरकार संवेदनशील नहीं है। शासन ने प्राथमिक अस्पताल धौलछीना में 2.47 करोड़ से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का भवन तो बना दिया, लेकिन 11 साल बाद भी इसे सीएचसी का दर्जा नहीं दिया।
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दूरस्थ क्षेत्रों से मरीजों को यहां लाने को एंबुलेंस की व्यवस्था तक नहीं है। एक्स-रे, पैथोलाजी और प्रसव कराने की भी सुविधा नहीं है। बदहाल व्यवस्थाओं के चलते यह मात्र नाम भर का अस्पताल रह गया है।
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भैंसियाछाना ब्लॉक मुख्यालय के नजदीक स्थित प्राथमिक अस्पताल धौलछीना को सरकार ने 2004 में सामुदायिक अस्पताल में उच्चीकृत करने का शासनादेश जारी किया।
इसके बाद 2.47 करोड़ की लागत से सीएचसी भवन का निर्माण हुआ, परंतु अब तक इसे सीएचसी में उच्चीकृत नहीं किया गया है। अस्पताल में तैनात एक मात्र डाक्टर प्रशिक्षण के लिए एक महीने से जिला मुख्यालय में हैं।
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यहां तैनात फार्मासिस्ट मरीजों का उपचार कर रहा है। अस्पताल के लिए पानी की लाइन नहीं बनी है। पेयजल के लिए हैंडपंप स्थापित किया है, लेकिन इससे निकलने वाला पानी पीने योग्य नहीं है।
पानी की व्यवस्था नहीं होने से मरीजों के साथ ही अस्पताल परिसर के आवासों में रहने वाले कार्मिकों को भी काफी दिक्कतें होती हैं। स्वच्छक और चौकीदार के पद काफी समय से खाली हैं।
सफाई कर्मी नहीं होने से अस्पताल में गंदगी रहती है। जंगल से लगे अस्पताल की चहारदीवारी नहीं हुई है। अस्पताल परिसर दिन में लावारिस पशुओं और रात को जंगली जानवरों ने अड्डा बन गया है।
पीएचसी में 108 एंबुलेंस की व्यवस्था नहीं है। जरूरत के समय काफी दूर सेराघाट अथवा धौलादेवी से एंबुलेंस बुलानी पड़ती है। तकनीशियन नहीं होने से यहां एक्स-से और रक्त, बलगम आदि की जांचें तक नहीं हो पाती हैं।
बदहाल व्यवस्थाओं के चलते गर्भवतियों को प्रसव कराने 34 किमी दूर अल्मोड़ा जाना पड़ता है। कुल मिला कर धौलछीना पीएचसी नाम का अस्पताल रह गया है।