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शौचालय विहीन परिवार को भेजा प्रदेश सरकार ने बधाई संदेश
Sat, 15 Dec 2018 11:43 PM IST
Almora desk
अमर उजाला ब्यूरो, मौलेखाल(अल्मोड़ा)।
अमर उजाला ब्यूरो, मौलेखाल(अल्मोड़ा)।
Published by: Almora desk
Updated Sat, 15 Dec 2018 11:43 PM IST
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प्राथमिक विद्यालय भ्याडी मल्ली में क्षतिग्रस्त शौचालय।
- फोटो : अमर उजाला
सल्ट विकासखंड के अंतर्गत भ्याड़ी गांव में शौचालय विहीन परिवार की महिला के नाम डाक के माध्यम से मुख्यमंत्री के हस्ताक्षर युक्त बधाई संदेश मिलने से परिवार हैरान है। शौचालय विहीन परिवार को प्रदेश सरकार द्वारा भेजे गए बधाई संदेश से ओडीएफ की पोल खोल दी है। सरकार ओडीएफ की हकीकत जाने बगैर ही ग्रामीणों को बधाई संदेश भेजकर अपनी पीठ थपथपा रही है जबकि सच्चाई यह है कि इस गांव में 30 परिवार शौचालय विहीन हैं। गांव के मुख्य मार्ग गंदगी से पटे हैं। गांव में सार्वजनिक शौचालय, स्नानागार नहीं है। कूड़ा निस्तारण के लिए कूड़ादान भी नहीं है। शौच के लिए ग्रामीण 500 मीटर दूर जाते हैं।
अमर उजाला टीम ने भ्याड़ी गांव का मुआयना किया तो स्वच्छ भारत अभियान की सच्चाई सामने आई। भ्याड़ी सड़क मार्ग से 13 किमी दूरी पर स्थित हैं। इस गांव में कुल 200 परिवार निवास करते हैं। जिसमें से 30 परिवार अनुसूचित जाति के हैं। गांव के वीरेंद्र कुमार, मनोज कुमार, विनोद कुमार, बिहारी लाल, दयाल राम, राधा देवी, कमला देवी, देवकी देवी, प्रेम बल्लभ, मोहन सिंह, सुंदरी देवी, शांति देवी, राम दत्त समेत कुल 30 परिवारों के पास शौचालय नहीं हैं। इनमें अनुसूचित जाति के परिवारों की संख्या ज्यादा है। शौचालय नहीं होने के कारण शौचालय विहीन परिवारों के लोग शौच के लिए गांव से 500 मीटर दूर जाते हैं। खुले में शौच करने से गंदगी लगातार बढ़ रही है।
कमला देवी ने बताया कि तीन माह पहले मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत की ओर से उन्हें शौचालय बनाने का बधाई संदेश डाक से मिला है तो वह अचंभित रह गईं। उन्होंने बताया कि शौचालय निर्माण के लिए उसे न तो 12 हजार रुपये मिले और न ही उसके पास शौचालय है। फिर मुख्यमंत्री से बधाई संदेश मिलना ओडीएफ में गड़बड़ी का संकेत देता है। बताया गया है कि इस तरह के बधाई संदेश कई अन्य परिवारों को भी
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मिले हैं जिनके पास शौचालय नहीं है। राधा देवी ने बताया कि स्वजल की ओर से उसे तीन माह पहले प्लास्टिक का शौचालय दिया गया था। तब से वह खेत में ही पड़ा है। विभाग के कर्मचारी इसे फिट करने नहीं आए। वीरेंद्र कुमार ने बताया कि वह चार भाई पहले संयुक्त परिवार में रहते थे। अब अलग-अलग रहते हैं। चारों में से किसी को भी शौचालय के लिए धनराशि नहीं दी गई और न ही शौचालय उपलब्ध कराया गया। प्रेम बल्लभ ने बताया कि उसके पास भी शौचालय नहीं है। उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास भी आवंटित नहीं हुआ। भ्याड़ी गांव में न तो सार्वजनिक शौचालय है और न स्नानागार है। शादी समेत बड़े आयोजन में पहुंचने वाले मेहमानों को भी खुले स्थान पर शाौच करना पड़ता है। खासकर महिलाओं को भारी दिक्कतें होती हैं। गांव के रास्तों में शौच करने से गंदगी हो रही है। इससे काफी र्दुगंध भी आ रही है। प्रमोद मनराल ने बताया कि गांव में पानी की समस्या है।
सरकारी स्कूलों में भी बंद पड़े हैं शौचालय
मौलेखाल। भ्याडी गांव में एक जूनियर हाईस्कूल, दो प्राथमिक विद्यालय हैं। जूनियर हाईस्कूल में सार्वजनिक शौचालय है। पानी की समस्या के कारण शौचालय में काफी गंदगी रहती है। प्राथमिक विद्यालय भ्याड़ी में शौचालय जीर्ण-शीर्ण हालत में हैं और वर्तमान में यह बंद पड़े हैं। इस कारण विद्यार्थी खुले स्थान में शौच करते हैं। विद्यालय में कूड़ादान भी नहीं है। खुले स्थान पर ही कूड़ा निस्तारित हो रहा है। तीनों विद्यालयों में सुरक्षा दीवार भी नहीं है।
प्लास्टिक के शौचालय पड़े हैं लावारिस
मौलेखाल। स्वजल द्वारा ग्रामीणों को आवंटित प्लास्टिक के शौचालय गांव में अस्त-व्यस्त पड़े हैं। विभाग ने प्लास्टिक के शौचालय आवंटित तो कर दिए लेकिन कोई भी कर्मचारी इसे फिट करने नहीं आया है। इस कारण यह लावारिस हालत में हैं।
कोट
गांव के 17 लोगों को शौचालय का पैसा नहीं मिला है। 13 परिवारों के शौचालयों के लिए धनराशि पहुंच चुकी है। कई परिवार 12 हजार रुपये में शौचालय निर्माण के लिए तैयार नहीं हैं। 17 लोगों को शौचालय के लिए धनराशि आंवटित करने के लिए स्वजल से मांग की गई है।
गणेशी देवी, प्रधान भ्याड़ी।
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अमर उजाला टीम ने भ्याड़ी गांव का मुआयना किया तो स्वच्छ भारत अभियान की सच्चाई सामने आई। भ्याड़ी सड़क मार्ग से 13 किमी दूरी पर स्थित हैं। इस गांव में कुल 200 परिवार निवास करते हैं। जिसमें से 30 परिवार अनुसूचित जाति के हैं। गांव के वीरेंद्र कुमार, मनोज कुमार, विनोद कुमार, बिहारी लाल, दयाल राम, राधा देवी, कमला देवी, देवकी देवी, प्रेम बल्लभ, मोहन सिंह, सुंदरी देवी, शांति देवी, राम दत्त समेत कुल 30 परिवारों के पास शौचालय नहीं हैं। इनमें अनुसूचित जाति के परिवारों की संख्या ज्यादा है। शौचालय नहीं होने के कारण शौचालय विहीन परिवारों के लोग शौच के लिए गांव से 500 मीटर दूर जाते हैं। खुले में शौच करने से गंदगी लगातार बढ़ रही है।
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कमला देवी ने बताया कि तीन माह पहले मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत की ओर से उन्हें शौचालय बनाने का बधाई संदेश डाक से मिला है तो वह अचंभित रह गईं। उन्होंने बताया कि शौचालय निर्माण के लिए उसे न तो 12 हजार रुपये मिले और न ही उसके पास शौचालय है। फिर मुख्यमंत्री से बधाई संदेश मिलना ओडीएफ में गड़बड़ी का संकेत देता है। बताया गया है कि इस तरह के बधाई संदेश कई अन्य परिवारों को भी
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मिले हैं जिनके पास शौचालय नहीं है। राधा देवी ने बताया कि स्वजल की ओर से उसे तीन माह पहले प्लास्टिक का शौचालय दिया गया था। तब से वह खेत में ही पड़ा है। विभाग के कर्मचारी इसे फिट करने नहीं आए। वीरेंद्र कुमार ने बताया कि वह चार भाई पहले संयुक्त परिवार में रहते थे। अब अलग-अलग रहते हैं। चारों में से किसी को भी शौचालय के लिए धनराशि नहीं दी गई और न ही शौचालय उपलब्ध कराया गया। प्रेम बल्लभ ने बताया कि उसके पास भी शौचालय नहीं है। उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास भी आवंटित नहीं हुआ। भ्याड़ी गांव में न तो सार्वजनिक शौचालय है और न स्नानागार है। शादी समेत बड़े आयोजन में पहुंचने वाले मेहमानों को भी खुले स्थान पर शाौच करना पड़ता है। खासकर महिलाओं को भारी दिक्कतें होती हैं। गांव के रास्तों में शौच करने से गंदगी हो रही है। इससे काफी र्दुगंध भी आ रही है। प्रमोद मनराल ने बताया कि गांव में पानी की समस्या है।
सरकारी स्कूलों में भी बंद पड़े हैं शौचालय
मौलेखाल। भ्याडी गांव में एक जूनियर हाईस्कूल, दो प्राथमिक विद्यालय हैं। जूनियर हाईस्कूल में सार्वजनिक शौचालय है। पानी की समस्या के कारण शौचालय में काफी गंदगी रहती है। प्राथमिक विद्यालय भ्याड़ी में शौचालय जीर्ण-शीर्ण हालत में हैं और वर्तमान में यह बंद पड़े हैं। इस कारण विद्यार्थी खुले स्थान में शौच करते हैं। विद्यालय में कूड़ादान भी नहीं है। खुले स्थान पर ही कूड़ा निस्तारित हो रहा है। तीनों विद्यालयों में सुरक्षा दीवार भी नहीं है।
प्लास्टिक के शौचालय पड़े हैं लावारिस
मौलेखाल। स्वजल द्वारा ग्रामीणों को आवंटित प्लास्टिक के शौचालय गांव में अस्त-व्यस्त पड़े हैं। विभाग ने प्लास्टिक के शौचालय आवंटित तो कर दिए लेकिन कोई भी कर्मचारी इसे फिट करने नहीं आया है। इस कारण यह लावारिस हालत में हैं।
कोट
गांव के 17 लोगों को शौचालय का पैसा नहीं मिला है। 13 परिवारों के शौचालयों के लिए धनराशि पहुंच चुकी है। कई परिवार 12 हजार रुपये में शौचालय निर्माण के लिए तैयार नहीं हैं। 17 लोगों को शौचालय के लिए धनराशि आंवटित करने के लिए स्वजल से मांग की गई है।
गणेशी देवी, प्रधान भ्याड़ी।