{"_id":"571122044f1c1b240f4a6bca","slug":"chitai-no-bali","type":"story","status":"publish","title_hn":"चितई ग्वल देवता मंदिर में नहीं हुई बलि","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चितई ग्वल देवता मंदिर में नहीं हुई बलि
अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा।
Updated Fri, 15 Apr 2016 10:47 PM IST
विज्ञापन
चितई मंदिर में बलि प्रथा रुकवाते सामाजिक कार्यकर्ता।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
गायत्री परिवार का पशुबलि निवारण अभियान जारी है। नवरात्रि में काशीपुर से एक दंपति चितई स्थित प्रसिद्ध ग्वल देवता मंदिर में बकरे की बलि चढ़ाने आया था, लेकिन गायत्री परिवार के प्रयास से बलि रुक गई। दंपति ने बलि को लाए गए बकरे को एक गरीब व्यक्ति को सौंप दिया है। नवरात्र में मंदिर में पशु बलि नहीं हुई।
गायत्री परिवार ने पशु बलि निवारण अभियान चला रखा है। इसके तहत लोगों को मंदिरों में पशु बलि नहीं करने के प्रति जागरूक किया जा रहा है। गायत्री परिजनों ने बताया कि नवरात्रि के दिन काशीपुर की मीना छाबडा और मनोज छाबड़ा बकरी की बलि चढ़ाने के लिए चितई स्थित ग्वल देवता मंदिर पहुंचे थे।
विज्ञापन
गायत्री परिजनों के समझाने पर छाबड़ा दंपति ने बलि नहीं दी और बकरे को एक गरीब व्यक्ति को दे दिया। गायत्री परिजनों के बताया कि अब तक बीना देवी पत्नी कुंदन अधिकारी निवासी ढौरा, नंदन सिंह, पान सिंह, धन सिंह, जीवन सिंह, आनंद सिंह निवासी सुयालबाडी बकरी वापस ले गए और ग्वल देवता मंदिर में माफीनामा लिखकर टांग गए हैं।
विज्ञापन
सभी ने पशु बलि के खिलाफ जनजागरण करने का संकल्प लिया है। गायत्री परिजनों ने दावा किया है कि मंदिर में पशु बलि पूर्ण रूप से बंद हो गई है। पशु बलि निवारण अभियान में मीनू भट्ट, डॉ. मीनाक्षी पांडेय, रीता पांडेय, विद्योतमा जोशी, सरोज भट्ट, मंजू बोरा, मंजू जोशी, निर्मला अधिकारी, दीपा जोशी, विनीता बोरा, मंजू तिवारी, इंद्रा गनघरिया, मुन्नी बिष्ट, सौम्या, प्राची, भूमिका, धैर्य, गोपाल सिंह कनवाल, कार्तिक भट्ट, ब्राह्मी, योगेंद्र जोशी, लोकेश राहुल, प्रताप सिंह कनवाल, राजू, रणदीप रजावत, माधो सिंह बोरा, मोहन पांडेय, भीम सिंह अधिकारी आदि शामिल थे।