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नेता कर रहे विकास का दावा, पर गांव में सड़क, पानी तक नहीं
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अल्मोड़ा में चाय की एक दुकान में चाय की चुस्कियों के बीच राजनीति पर चर्चा करते लोग
- फोटो : ALMORA
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अल्मोड़ा। नगर के चाय के नुक्कड़ों पर इन दिनों चाय पीने वालों की जुबां पर भी राजनीति का रंग चढ़ने लगा है। लोग नुक्कड़ों पर चाय पीते हुए राजनीति की चाय भी उबाल रहे हैं। चाय के नुक्कड़ों पर लोग यह कहते सुने गए कि चुनावी पर्व पर नेता गांवों के विकास का बखान करेंगे लेकिन गांव के हालात किसी से छिपे नहीं हैं। कहीं सड़क नहीं बनी तो कहीं नलों में पानी ही नहीं आता है। पांच सालों में नेताओं ने क्या विकास किया, ये समझ में नहीं आ पाता।
मंगलवार दोपहर 12:30 बजे का वक्त था। नगर के लाला बाजार में एक दुकान में टेबल पर बैठकर कुछ लोग चाय सुड़क रहे थे। दुकानदार भी अन्य लोगों के लिए भी चाय बना रहे थे। चाय तैयार हुई तो दुकानदार ने कप ग्राहकों के हाथों में थमा दिया। चाय की एक घूंट लगाते ही जुबां से राजनीति के सुर भी निकलने लगे। बृजमोहन सिंह रावत बोले उत्तराखंड बनने के बाद भी हालात नहीं बदल पाए हैं। बदली तो सिर्फ नेताओं की किस्मत। नेताओं की नजर सिर्फ कुर्सी पर है। इतने में शंकर लाल कहने लगे कि युवा बेरोजगार घूम रहे हैं। किसी को भी इनकी चिंता नहीं है जबकि चुनाव में नेता भी युवाओं से ही उम्मीद लगाए बैठे हैं। पूरन चंद्र जोशी ने कहा कि कितने चुनाव हो गए लेकिन गांव में बिजली, पानी की समस्याएं जस की तस हैं।
चाय की एक घूंट पीने के बाद कप टेबल पर रखते हुए एक सज्जन कहने लगे 26 जनवरी को कई जगह सार्वजनिक कार्यक्रम होंगे। इनमें नेताजी भाषणों की झड़ी लगाएंगे और बताएंगे कि हमने इतना विकास किया जबकि सरकार के पांच साल गुजर गए और गांवों में अब भी मूलभूत समस्याएं बनी हैं। ऐसे में विकास का दीपक ही बुझ गया है। अभी वह आगे कुछ कहना चाह रहे थे, तभी दूसरे सज्जन कहने लगे यार अब तो राजनीति का अर्थ ही बदल गया है। हर नेता राजा मानकर परिवार के लिए खजाना जुटाना चाह रहा है।
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जनता को उसके हाल पर छोड़ दिया गया है। चुनाव के वक्त गांव में आकर नेताजी हाथ जोड़कर चुनाव में ध्यान रखने की बात कहते हैं लेकिन यह नहीं समझते कि पांच सालों में उन्होंने जनता का क्या ध्यान रखा। तभी तीसरे सज्जन बोले यार मुझे राजनीति समझ में नहीं आ रही कि नेता इतने मौकापरस्त कैसे हो गए।
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मंगलवार दोपहर 12:30 बजे का वक्त था। नगर के लाला बाजार में एक दुकान में टेबल पर बैठकर कुछ लोग चाय सुड़क रहे थे। दुकानदार भी अन्य लोगों के लिए भी चाय बना रहे थे। चाय तैयार हुई तो दुकानदार ने कप ग्राहकों के हाथों में थमा दिया। चाय की एक घूंट लगाते ही जुबां से राजनीति के सुर भी निकलने लगे। बृजमोहन सिंह रावत बोले उत्तराखंड बनने के बाद भी हालात नहीं बदल पाए हैं। बदली तो सिर्फ नेताओं की किस्मत। नेताओं की नजर सिर्फ कुर्सी पर है। इतने में शंकर लाल कहने लगे कि युवा बेरोजगार घूम रहे हैं। किसी को भी इनकी चिंता नहीं है जबकि चुनाव में नेता भी युवाओं से ही उम्मीद लगाए बैठे हैं। पूरन चंद्र जोशी ने कहा कि कितने चुनाव हो गए लेकिन गांव में बिजली, पानी की समस्याएं जस की तस हैं।
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चाय की एक घूंट पीने के बाद कप टेबल पर रखते हुए एक सज्जन कहने लगे 26 जनवरी को कई जगह सार्वजनिक कार्यक्रम होंगे। इनमें नेताजी भाषणों की झड़ी लगाएंगे और बताएंगे कि हमने इतना विकास किया जबकि सरकार के पांच साल गुजर गए और गांवों में अब भी मूलभूत समस्याएं बनी हैं। ऐसे में विकास का दीपक ही बुझ गया है। अभी वह आगे कुछ कहना चाह रहे थे, तभी दूसरे सज्जन कहने लगे यार अब तो राजनीति का अर्थ ही बदल गया है। हर नेता राजा मानकर परिवार के लिए खजाना जुटाना चाह रहा है।
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जनता को उसके हाल पर छोड़ दिया गया है। चुनाव के वक्त गांव में आकर नेताजी हाथ जोड़कर चुनाव में ध्यान रखने की बात कहते हैं लेकिन यह नहीं समझते कि पांच सालों में उन्होंने जनता का क्या ध्यान रखा। तभी तीसरे सज्जन बोले यार मुझे राजनीति समझ में नहीं आ रही कि नेता इतने मौकापरस्त कैसे हो गए।