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भूटान से सीखेंगे कीड़ा जड़ी का प्रबंधन
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो/अल्मोड़ा।
Updated Tue, 11 Aug 2015 12:34 AM IST
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हिमालय क्षेत्र में पैदा होने वाले कीमती यारसा गंबू (कीड़ा जड़ी) का क्षेत्र के लोगों को खास लाभ नहीं मिल पा रहा है। यारसा गंबूू के दोहन और विक्रय के लिए सरकार आज तक कोई नीति नहीं बना सकी है। जिससे दोहन के सीजन में वहां शांति व्यवस्था भंग होने की नौबत आ जाती है।
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तस्कर कीड़ा जड़ी को काफी कम कीमत में खरीद कर चीन और अन्य देशों में ऊंची कीमतों पर बेच देते हैं। अब भारत, नेपाल, चीन, भूटान सहित आठ देशों द्वारा गठित अंतर्राष्ट्रीय संस्था आईसीमोड के अंतर्गत यारसा गंबू के दोहन और मार्केटिंग के लिए सही नीति बनाने की पहल की जा रही है।
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इसके लिए इस सप्ताह के अंत में भारत और नेपाल से एक दल भूटान जाएगा। अब तक सिर्फ भूटान में यारसा गंबू के दोहन और विक्रय का सही प्रबंधन किया गया है। मालूम हो कि उच्च हिमालयी क्षेत्र में प्राकृतिक रूप से पैदा होने वाले यारसा गंबू (कीड़ा जड़ी) काफी महंगी कीमती में बिकती है।
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चीन, थाईलैंड, वियतनाम, कोरिया, जापान आदि देशों में इसकी काफी मांग है। कीड़ा जड़ी भारत के अलावा नेपाल, तिब्बत और भूटान के हिमालयी क्षेत्र में पैदा होती है।
यह काफी ऊंचाई में पाई जाती है। अप्रैल-मई में बर्फ पिघलने के बाद इसे निकाला जाता है और जुलाई तक दोहन का काम चलता है। जानकारी के मुताबिक अंतर्राष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत गुणवत्ता के हिसाब से तीन लाख रुपये से लेकर आठ लाख रुपये किलो तक है।
नेपाल और भारत में अब तक इसके दोहन की कोई नीति नहीं बन सकी है। धारचूला, मुनस्यारी में वन पंचायतों को रॉयल्टी देकर इसका दोहन करने की अनुमति दी जा रही है, लेकिन बिक्री आदि के लिए ठोस व्यवस्था नहीं है जिससे स्थानीय लोगों को इसका खास लाभ नहीं मिल पा रहा है।
यही कारण है कि भारत और नेपाल में कई लोग इसकी तस्करी करके चीन और थाईलैंड आदि देशों में बेच देते हैं। दूसरी तरफ दोहन के सीजन में इन इलाकों में बाहर से भी हजारों लोग पहुंच जाते हैं जिससे वहां आए दिन झगड़े भी हुआ करते हैं। बताया गया है कि भूटान ने कीड़ा जड़ी के दोहन और बिक्री के लिए अच्छा प्रबंधन किया है।
जिससे स्थानीय लोगों को इसका लाभ मिल रहा है। वहां कीड़ी जड़ी से स्थानीय लोगों को 75 प्रतिशत रॉयल्टी प्राप्त होती है। भारत और नेपाल में भी कीड़ा जड़ी का भूटान की तरह सही प्रबंधन करने के लिए भारत, नेपाल, चीन, भूटान, अफगानिस्तान सहित आठ देशों द्वारा गठित अंतर्राष्ट्रीय एकीकृत पर्वतीय विकास केंद्र (आईसीमोड) ने पहल की है।
आईसीमोड के क्षेत्रीय समन्वयक डा. राजन कुटरु ने बताया कि इस सप्ताह के अंत में भारत और नेपाल से विशेषज्ञों का दल भूटान जाएगा। इसके लिए भारत और नेपाल सरकार के साथ ही भूटान सरकार से हरी झंडी मिल गई है।
भूटान में कीड़ा जड़ी के दोहन और मार्केटिंग की व्यस्था का अध्ययन करने के बाद आईसीमोड द्वारा भारत सरकार को सुझाव दिए जाएंगे। ताकि भविष्य में कीड़ा जड़ी का सही प्रबंधन हो और लोगों को इसका पूरा लाभ मिल सके।