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अल्मोड़ा में लगातार तीसरी बार आमने-सामने होंगे अजय टम्टा और प्रदीप टम्टा
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अल्मोड़ा। अल्मोड़ा लोकसभा सीट से लगातार तीसरी बार भाजपा के अजय टम्टा और कांग्रेस के प्रदीप टम्टा आमने सामने होंगे। भाजपा ने अजय टम्टा के नाम का एलान कर दिया है। कांग्रेस ने अभी प्रत्याशियों की सूची जारी नहीं की है लेकिन प्रदीप टम्टा का नाम फाइनल माना जा रहा है।
बता दें कि आजादी के बाद से 2004 के लोकसभा चुनाव तक सामान्य सीट थी लेकिन राज्य बनने के बाद नए सर्वेक्षण में हरिद्वार के स्थान पर अल्मोड़ा सीट को अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित कर दिया गया। सीट के आरक्षित होने पर पहली बार 2009 में कांग्रेस ने प्रदीप टम्टा को प्रत्याशी बनाया। वहीं भाजपा ने अजय टम्टा को मैदान में उतार दिया। 2009 में मुकाबला बेहद करीबी रहा और प्रदीप टम्टा छह हजार 523 मत से जीते। प्रदीप टम्टा को दो लाख दो हजार 228 मत मिले जबकि भाजपा के अजय टम्टा को एक लाख 95 हजार 705 मत हासिल हुए। तीसरे नंबर पर रहे बसपा के बीआर धौनी को 45 हजार 143 मत मिले। उसके बाद 2014 की मोदी लहर में भाजपा के अजय टम्टा को तीन लाख 48 हजार 186 और कांग्रेस प्रत्याशी प्रदीप टम्टा को दो लाख 52 हजार 496 मत प्राप्त हुए। तब अजय टम्टा 95 हजार 690 मतों से जीते।
2019 के चुनाव में एक बार फिर मुकाबला इन दोनों के बीच ही होने जा रहा है। भाजपा प्रत्याशी अजय टम्टा को पार्टी के मजबूत संगठन, पांच साल में किए गए कार्यों और प्रधानमंत्री मोदी के नाम के सहारे चुनाव मैदान में उतर रहे हैं जबकि कांग्रेस प्रत्याशी प्रदीप टम्टा केंद्र की मोदी सरकार और सांसद के तौर पर अजय टम्टा की विफलताओं को मुद्दा बनाकर चुनाव रण में कूदने की तैयारी कर रहे हैं।
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नोटा की बढ़त का संकेत चिंताजनक
अल्मोड़ा। जानकारों का मानना है कि मतदाताओं का एक वर्ग परंपरागत प्रत्याशियों से ऊब रहा है। यही वजह है कि पिछले (2014) के चुनाव में नोटा (उपरोक्त में से कोई नहीं) को 15 हजार 245 मत पड़े और नोटा तीसरे स्थान पर रहा। तीसरे स्थान के लिए नोटा ने बसपा, यूकेडी सहित अन्य सभी प्रत्याशियों को पीछे छोड़ दिया। तब अजय टम्टा को 53 प्रतिशत और प्रदीप टम्टा को 38.44 प्रतिशत तथा नोटा को 2.32 प्रतिशत वोट पड़े। देखना है इस बार नोटा को कितने वोट मिलते हैं।
बता दें कि आजादी के बाद से 2004 के लोकसभा चुनाव तक सामान्य सीट थी लेकिन राज्य बनने के बाद नए सर्वेक्षण में हरिद्वार के स्थान पर अल्मोड़ा सीट को अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित कर दिया गया। सीट के आरक्षित होने पर पहली बार 2009 में कांग्रेस ने प्रदीप टम्टा को प्रत्याशी बनाया। वहीं भाजपा ने अजय टम्टा को मैदान में उतार दिया। 2009 में मुकाबला बेहद करीबी रहा और प्रदीप टम्टा छह हजार 523 मत से जीते। प्रदीप टम्टा को दो लाख दो हजार 228 मत मिले जबकि भाजपा के अजय टम्टा को एक लाख 95 हजार 705 मत हासिल हुए। तीसरे नंबर पर रहे बसपा के बीआर धौनी को 45 हजार 143 मत मिले। उसके बाद 2014 की मोदी लहर में भाजपा के अजय टम्टा को तीन लाख 48 हजार 186 और कांग्रेस प्रत्याशी प्रदीप टम्टा को दो लाख 52 हजार 496 मत प्राप्त हुए। तब अजय टम्टा 95 हजार 690 मतों से जीते।
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2019 के चुनाव में एक बार फिर मुकाबला इन दोनों के बीच ही होने जा रहा है। भाजपा प्रत्याशी अजय टम्टा को पार्टी के मजबूत संगठन, पांच साल में किए गए कार्यों और प्रधानमंत्री मोदी के नाम के सहारे चुनाव मैदान में उतर रहे हैं जबकि कांग्रेस प्रत्याशी प्रदीप टम्टा केंद्र की मोदी सरकार और सांसद के तौर पर अजय टम्टा की विफलताओं को मुद्दा बनाकर चुनाव रण में कूदने की तैयारी कर रहे हैं।
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नोटा की बढ़त का संकेत चिंताजनक
अल्मोड़ा। जानकारों का मानना है कि मतदाताओं का एक वर्ग परंपरागत प्रत्याशियों से ऊब रहा है। यही वजह है कि पिछले (2014) के चुनाव में नोटा (उपरोक्त में से कोई नहीं) को 15 हजार 245 मत पड़े और नोटा तीसरे स्थान पर रहा। तीसरे स्थान के लिए नोटा ने बसपा, यूकेडी सहित अन्य सभी प्रत्याशियों को पीछे छोड़ दिया। तब अजय टम्टा को 53 प्रतिशत और प्रदीप टम्टा को 38.44 प्रतिशत तथा नोटा को 2.32 प्रतिशत वोट पड़े। देखना है इस बार नोटा को कितने वोट मिलते हैं।