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आखिर तड़के सवा पांच बजे काठगोदाम कैसे पहुंचेंगे पहाड़ के यात्री
Updated Thu, 30 Aug 2018 11:06 PM IST
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अल्मोड़ा। काठगोदाम से देहरादून के लिए शुरू की गई नैनी-दून जन शताब्दी रेल सेवा का दून जाने वाले पहाड़ के यात्रियों को नहीं मिल पा रहा है। ट्रेन की टाइमिंग इस तरह की है कि पहाड़ के यात्रियों को आने और जाने में हल्द्वानी में ही रातें गुजारनी होंगी।
हफ्ते भर शुरू की गई जन शताब्दी ट्रेन के काठगोदाम से चलने का समय सुबह सवा पांच बजे रखा गया है। अल्मोड़ा, रानीखेत, बागेश्वर, पिथौरागढ़, नैनीताल के दूर दराज के यात्रियों के लिए ऐसी कोई परिवहन सेवा नहीं है जो उन्हें सुबह पांच बजे तक काठगोदाम पहुंचाएं। ऐसे में इन यात्रियों को एक दिन पहले हल्द्वानी पहुंचना होगा और रात हल्द्वानी में ही काटनी होगी। दून से वापसी में यह ट्रेन रात करीब 11.30 बजे वापस काठगोदाम पहुंचती है। ट्रेन से उतरने के बाद भी यात्रियों को होटल भी मिलने मुश्किल होंगे।
व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष हरेंद्र वर्मा का कहना है कि इस ट्रेन की टाइमिंग इस तरह की है कि लोग इस ट्रेन में जाने के बजाय वॉल्बो बस में जाना चाहेंगे।
पूर्व पालिकाध्यक्ष प्रकाश चंद्र जोशी ने भी इस ट्रेन के समय को कतई अव्यवहारिक बताया है। उन्होंने कहा कि ट्रेन के आने और जाने दोनों ही समय में बदलाव जरूरी है तभी अधिक से अधिक लोगों को इस रेलगाड़ी का फायदा मिल सकेगा। राज्य सभा सांसद प्रदीप टम्टा का कहना है कि भविष्य में रेलवे अधिकारियों के साथ होने वाली बैठक में वह इस मामले को उठाएंगे।
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हफ्ते भर शुरू की गई जन शताब्दी ट्रेन के काठगोदाम से चलने का समय सुबह सवा पांच बजे रखा गया है। अल्मोड़ा, रानीखेत, बागेश्वर, पिथौरागढ़, नैनीताल के दूर दराज के यात्रियों के लिए ऐसी कोई परिवहन सेवा नहीं है जो उन्हें सुबह पांच बजे तक काठगोदाम पहुंचाएं। ऐसे में इन यात्रियों को एक दिन पहले हल्द्वानी पहुंचना होगा और रात हल्द्वानी में ही काटनी होगी। दून से वापसी में यह ट्रेन रात करीब 11.30 बजे वापस काठगोदाम पहुंचती है। ट्रेन से उतरने के बाद भी यात्रियों को होटल भी मिलने मुश्किल होंगे।
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व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष हरेंद्र वर्मा का कहना है कि इस ट्रेन की टाइमिंग इस तरह की है कि लोग इस ट्रेन में जाने के बजाय वॉल्बो बस में जाना चाहेंगे।
पूर्व पालिकाध्यक्ष प्रकाश चंद्र जोशी ने भी इस ट्रेन के समय को कतई अव्यवहारिक बताया है। उन्होंने कहा कि ट्रेन के आने और जाने दोनों ही समय में बदलाव जरूरी है तभी अधिक से अधिक लोगों को इस रेलगाड़ी का फायदा मिल सकेगा। राज्य सभा सांसद प्रदीप टम्टा का कहना है कि भविष्य में रेलवे अधिकारियों के साथ होने वाली बैठक में वह इस मामले को उठाएंगे।
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