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वैकल्पिक ऊर्जा को बढ़ावा देने की योजना धरातल पर नहीं उतरी
Updated Sun, 16 Dec 2018 10:39 PM IST
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अल्मोड़ा। सरकार की वैकल्पिक ऊर्जा को बढ़ावा देने की योजना धरातल पर नहीं उतर पा रही है। केंद्र सरकार के पहाड़ी क्षेत्रों की परिस्थितियों के विपरीत रूफ टॉप सोलर पावर प्लांट मकान की छत में लगाने के आदेश के चलते दो साल बाद भी 500-500 किलोवाट के सौर ऊर्जा प्लांट स्थापित नहीं हो सके हैं।
जिले के छह लोगों ने यह सोलर पावर प्लांट लगाने के लिए आवेदन किया है। यह प्लांट लगाने के लिए 500 वर्ग मीटर स्थान की जरूरत है, लेकिन पर्वतीय क्षेत्र में इतने बड़े भवन नहीं होने से दो साल बाद भी प्लांट स्थापित नहीं हो सके हैं।
पांच-पांच सौ किलो वाट के सोलर पावर प्लांट लगाने के लिए केंद्र सरकार ने करीब दो साल पहले आवेदन मांगे थे। जिले से आधा दर्जन लोगों ने यह प्लांट लगाने के लिए आवेदन किया था।
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पांच सौ किलो वाट के एक पावर प्लांट की लागत करीब 3.5 करोड़ है। इसमें केंद्र सरकर 70 फीसदी सब्सिडी दे रही है, जबकि 30 फीसदी अंशदान आवेदनकर्ता को देना है।
उरेडा निदेशालय ने करीब दो साल पूर्व प्लांट लगाने के लिए आवेदन मांगे थे। जिले में छह लोगों ने 500-500 किलोवाट क्षमता के पावर प्लांट लगाने के लिए आवेदन किया। इसके बाद उरेडा विभाग ने संबंधित स्थानों पर भूमि का मुआयना कर रिपोर्ट उरेडा निदेशालय को भेजी, लेकिन अब केंद्र सरकार द्वारा पांच-पांच सौ क्षमता के सौर ऊर्जा पावर प्लांट लगाने के लिए नए आदेश जारी कर दिए हैं।
आदेश में कहा गया है कि यह सौर ऊर्जा पावर प्लांट जमीन पर न लगाकर मकान की छत पर लगाए जाएंगे। 500 किलोवाट का एक पावर प्लांट लगाने के लिए करीब 500 से 600 वर्ग मीटर स्थान की जरूरत है। पहाड़ी क्षेत्र की विषम भौगोलिक परिस्थिति में इतने बड़े भवन की छत उपलब्ध हो पाना संभव नहीं है। जिससे यह पावर प्लांट अब तक नहीं लग सके हैं।
उरेडा के वरिष्ठ परियोजना अधिकारी जीसी मल्होत्रा ने बताया कि इस संबंध में निदेशालय ने आवेदन कर्ताओं से जानकारी मांगी है। इस मामले में कार्रवाई शासन स्तर से ही होनी है।
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जिले के छह लोगों ने यह सोलर पावर प्लांट लगाने के लिए आवेदन किया है। यह प्लांट लगाने के लिए 500 वर्ग मीटर स्थान की जरूरत है, लेकिन पर्वतीय क्षेत्र में इतने बड़े भवन नहीं होने से दो साल बाद भी प्लांट स्थापित नहीं हो सके हैं।
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पांच-पांच सौ किलो वाट के सोलर पावर प्लांट लगाने के लिए केंद्र सरकार ने करीब दो साल पहले आवेदन मांगे थे। जिले से आधा दर्जन लोगों ने यह प्लांट लगाने के लिए आवेदन किया था।
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पांच सौ किलो वाट के एक पावर प्लांट की लागत करीब 3.5 करोड़ है। इसमें केंद्र सरकर 70 फीसदी सब्सिडी दे रही है, जबकि 30 फीसदी अंशदान आवेदनकर्ता को देना है।
उरेडा निदेशालय ने करीब दो साल पूर्व प्लांट लगाने के लिए आवेदन मांगे थे। जिले में छह लोगों ने 500-500 किलोवाट क्षमता के पावर प्लांट लगाने के लिए आवेदन किया। इसके बाद उरेडा विभाग ने संबंधित स्थानों पर भूमि का मुआयना कर रिपोर्ट उरेडा निदेशालय को भेजी, लेकिन अब केंद्र सरकार द्वारा पांच-पांच सौ क्षमता के सौर ऊर्जा पावर प्लांट लगाने के लिए नए आदेश जारी कर दिए हैं।
आदेश में कहा गया है कि यह सौर ऊर्जा पावर प्लांट जमीन पर न लगाकर मकान की छत पर लगाए जाएंगे। 500 किलोवाट का एक पावर प्लांट लगाने के लिए करीब 500 से 600 वर्ग मीटर स्थान की जरूरत है। पहाड़ी क्षेत्र की विषम भौगोलिक परिस्थिति में इतने बड़े भवन की छत उपलब्ध हो पाना संभव नहीं है। जिससे यह पावर प्लांट अब तक नहीं लग सके हैं।
उरेडा के वरिष्ठ परियोजना अधिकारी जीसी मल्होत्रा ने बताया कि इस संबंध में निदेशालय ने आवेदन कर्ताओं से जानकारी मांगी है। इस मामले में कार्रवाई शासन स्तर से ही होनी है।