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गंगा जितनी नजदीक, पानी उतनी दूर
ब्यूरो/अमर उजाला वाराणसी
Updated Mon, 14 Mar 2016 02:26 AM IST
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पानी का संकट
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राजघाट से लेकर अस्सी घाट तक गंगा तट पर बसे मोहल्ले नदी की जलधारा के करीब हैं पर शुद्ध पेयजल से कोसों दूर। लाखों की आबादी वाले इस पक्के महाल में कई मकान ऐसे हैं, जहां के सरकारी नल सालों से सूखे पड़े हैं। इन मोहल्लों में पाइप लाइन तो है मगर इतनी जर्जर हो चुकी है कि उसका पानी कुछ घरों के लोगों की ही प्यास बुझा पाता है। कहीं लीकेज तो कहीं पाइप लाइन क्षतिग्रस्त होने से पक्का महाल के बाशिंदे सालों से गंभीर पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। कई इलाकों में मटमैला और बालूयुक्त पानी आने से लोग परेशान हैं। कहीं-कहीं तो पानी से दुर्गंध भी आती है। कुल मिलाकर पुराने शहर की 30 फीसदी से अधिक आबादी को आज भी पीने का साफ और पर्याप्त पानी मयस्सर नहीं है। गर्मी की दस्तक से पहले ही इन मुहल्लों में पानी की समस्या एक बड़ी चुनौती बन गई है।
राजघाट से लेकर अस्सी घाट तक का इलाका काफी ऊंचाई पर है। यहां के लोग बताते हैं कि दो दशक पहले तक पेयजल की कोई समस्या नहीं थी। सप्लाई का पानी आसानी से दूसरी, तीसरी, चौथी मंजिल तक पहुंच जाया करता था लेकिन अब दूसरी-तीसरी मंजिल तो छोड़िए तमाम मकान ऐसे हैं जहां भू-तल पर भी नलों की टोटियां सूखी रह जाती हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह, पाइप लाइन का जर्जर होना है। जगह-जगह लीकेज और पाइप लाइन क्षतिग्रस्त होने से सप्लाई के दौरान दबाव इतना कम हो जाता है कि पानी पूरे मुहल्ले में पहुंच ही नहीं पाता।
गढ़वासी टोला, गौ मठ, मणिकर्णिका घाट क्षेत्र में तो कई दिनों से पानी नहीं आ रहा है। जो पानी आ रहा है, वह पीने के लायक नहीं है। लोग हैंडपंप के सहारे काम चला रहे हैं। लोगों का कहना है कि पानी सुबह आएगा तो शाम को नहीं। कभी-कभी तो तीन से चार दिन तक पानी आता ही नहीं है। इधर तो जो पानी आ रहा है उसमें सीवर जैसी दुर्गंध आ रही है। जलकर तो जलकल विभाग समय पर चुकता करा लेता है लेकिन पानी समय पर नहीं देता। त्रिलोचन महादेव, हनुमानघाट, गायघाट, राजमंदिर सहित दर्जनों मुहल्लों में ऐसी ही दिक्कत बनी हुई है।
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राजघाट से लेकर अस्सी घाट तक का इलाका काफी ऊंचाई पर है। यहां के लोग बताते हैं कि दो दशक पहले तक पेयजल की कोई समस्या नहीं थी। सप्लाई का पानी आसानी से दूसरी, तीसरी, चौथी मंजिल तक पहुंच जाया करता था लेकिन अब दूसरी-तीसरी मंजिल तो छोड़िए तमाम मकान ऐसे हैं जहां भू-तल पर भी नलों की टोटियां सूखी रह जाती हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह, पाइप लाइन का जर्जर होना है। जगह-जगह लीकेज और पाइप लाइन क्षतिग्रस्त होने से सप्लाई के दौरान दबाव इतना कम हो जाता है कि पानी पूरे मुहल्ले में पहुंच ही नहीं पाता।
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गढ़वासी टोला, गौ मठ, मणिकर्णिका घाट क्षेत्र में तो कई दिनों से पानी नहीं आ रहा है। जो पानी आ रहा है, वह पीने के लायक नहीं है। लोग हैंडपंप के सहारे काम चला रहे हैं। लोगों का कहना है कि पानी सुबह आएगा तो शाम को नहीं। कभी-कभी तो तीन से चार दिन तक पानी आता ही नहीं है। इधर तो जो पानी आ रहा है उसमें सीवर जैसी दुर्गंध आ रही है। जलकर तो जलकल विभाग समय पर चुकता करा लेता है लेकिन पानी समय पर नहीं देता। त्रिलोचन महादेव, हनुमानघाट, गायघाट, राजमंदिर सहित दर्जनों मुहल्लों में ऐसी ही दिक्कत बनी हुई है।
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