राजन-साजन की बंदिशों पर थिरके बिरजू महाराज
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महोत्सव की दूसरी निशा की शुरुआत हुई भावना कयाल, स्मिता कोकरा और जान्हवी डोलिया के कथक नृत्य से। इन नृत्यांगनाओं ने शिव वंदना से आगाज किया। गायन गौरव मिश्र ने किया। इनके बाद पं. नरेंद्र मिश्र ने सितार पर राग हंसध्वनि की अवतारणा की। फिर शाश्वती सेन ने कथक पर शिव-पार्वती परिणय के भावों को सजाया। फिर बारी आई पं. राजन-साजन मिश्र की। इन्होंने राग झिंझोटी में झप ताल की बंदिश -महादेव महेश्वर की प्रस्तुति की। इसके बाद तीन ताल में -शंकर शिवदानी भोलेनाथ की प्रस्तुति की।
तबले पर गोपाल मिश्र ने संगत की। अंत में राजन-साजन की बंदिशों पर पं. बिरजू महाराज के कथक की जुगलबंदी शुरू होते ही तालियां गूंजने लगीं। सबसे पहले बिरजू महाराज के दादा पं. बिंदादीन की रचना -का मैं करूं देखो गारी देत कन्हाई के बोल पर राजन-साजन ने जब स्वर लगाया तब कथक नृत्य की थिरकन यादगार बन गई। भगीरथ जालान ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस मौके पर रमेश भाई ओझा, केशव जालान, कृष्ण कुमार जालान समेत तमाम गणमान्य लोग उपस्थित थे।