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एसिड अटैक पीड़िताओं के हौसले को सलाम

Tue, 08 Mar 2016 01:05 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो /उन्नाव
अमर उजाला ब्यूरो /उन्नाव Updated Tue, 08 Mar 2016 01:05 AM IST
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Hats off to the morale of acid attack victims
womens day
उन्नाव। दो साल पहले बारासगवर क्षेत्र के एक गांव में युवती पर एसिड अटैक की घटना ने उसे बुरी तरह से तोड़ दिया था। इस घटना के बाद पीड़िता की जिंदगी तबाह हो गई लेकिन इसके बाद भी युवती ने न सिर्फ इस हादसे को भुलाया बल्कि आरोपी चचेरे भाई को माफ करके एक नई मिसाल कायम की। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर मंगलवार को प्रदेश सरकार युवती को रानी लक्ष्मीबाई महिला सम्मान कोष से पांच लाख रुपये आर्थिक सहायता देगी।
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बारासगवर क्षेत्र के करनाईपुर निवासी शंभू प्रसाद आभूषणों काीे बनाकर बेचने का काम करते हैं। उनकी चार बेटियां हैं। सबसे छोटी बेटी पूनम है। सबसे छोटी होने के कारण पूनम सबकी लाडली है। वर्ष 2014 में पूनम के साथ एक ऐसी घटना घटी जो शंभू और उनके परिवार को जीवनभर का दर्द दे गई। पारिवारिक विवाद में उनके परिवार के ही एक युवक ने पूनम पर तेजाब फेंक दिया था। घटना के समय शंभू घर पर नहीं थे।
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एसिड अटैक से पूनम का चेहरा जल गया और उसकी एक आंख भी बेकार हो गई। इस घटना के बाद एकबारगी पूनम को लगा कि अब तो उसकी पूरी जिंदगी खराब हो गई है। ऐसे में आगे जीने से कोई फायदा नहीं है लेकिन इसके बाद परिवारीजनों और गांव वालों ने उसे ढांढस बंधाया कि एक घटना से पूरी जिंदगी खत्म नहीं हो जाती है। माता-पिता और गांववालों के काफी समझाने के बाद पूनम ने जिंदगी से हार मानने की बजाय उससे लड़ने का संकल्प लिया। पूनम ने एक बड़ा फैसला लेते हुए खुद की जिंदगी बर्बाद करने वाले परिवार के युवक को माफ कर दिया।
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धीरे-धीरे घटना से उबरते हुए पूनम ने स्नातक की पढ़ाई पूरी की। बकौल पूनम, अब वह अफसर बनकर यह साबित करेगी कि महिलाएं किसी भी तरह की घटना की शिखार होने के बाद भी कमजोर नहीं होती हैं। बल्कि हर परिस्थितियों का सामना कर सकती हैं। पूनम के कमजोर न पड़ने और समाज, परिस्थिति आदि का डटकर सामना करने पर प्रदेश सरकार उसे रानी लक्ष्मीबाई महिला सम्मान कोष से सहायता देने जा रही है।

 पुरवा कोतवाली क्षेत्र के तलहौरी गांव की रहने वाली सुनीता और उसकी पुत्री रोशनी ने एसिड अटैक के बाद भी हार नहीं मानी और लाख धमकियों व प्रलोभनों के बाद भी आरोपी को जेल भिजवाने में कामयाब रहीं।

वर्ष 2013 सुनीता व उसकी पुत्री रोशनी के लिए कभी न भूलने वाला साल बन गया है। संतोष की पत्नी सुनीता व पुत्री रोशनी घर के बाहर सोई हुई थीं। उस समय पड़ोसी युवक भोला ने पुराने विवाद में मां-बेटी पर तेजाब फेंक दिया। एसिड अटैक से सुनीता व रोशनी के शरीर का ऊपरी हिस्सा काफी झुलस गया था।

घटना के बाद आरोपी फरार हो गया था। उधर, मामले में आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ तो पीड़िता को धमकियां मिलने लगीं।  सुनीता व रोशनी का जीना मुहाल हो गया। इस मुश्किल घड़ी में भी सुनीता व रोशनी ने हार नहीं मानी और आरोपी भोला को जेल भिजवाकर ही दम लिया। पति संतोष ने भी पत्नी व बेटी के इलाज के लिए नाते-रिश्तेदारों से लेकर परिचितों तक के सामने हाथ फैलाया। तिनका-तिनका जोड़ा और पत्नी-बेटी का इलाज कराया।

सुनीता एसिड अटैक पीड़ित महिलाओं को संदेश देते हुए कहती हैं कि वह अपने को किसी भी कीमत पर कम न आंके। कितनी भी धमकी मिले या प्रलोभन हिम्मत और सच्चाई से उसका डटकर सामना करें। आखिर में जीत आपकी ही होगी। मां-बेटी के इस अदम्य साहस पर प्रदेश सरकार ने पिछले साल रानी लक्ष्मीबाई महिला सम्मान कोष से दोनों को 3-3 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी थी।

जिले में कई रेप पीड़िताओं ने धमकियां मिलने के बाद भी आरोपियों को जेल भिजवाया। इनमें सदर कोतवाली, आसीवन, असोहा, सफीपुर, अचलगंज व हसनगंज थानाक्षेत्र की किशोरियां शामिल हैं। सदर कोतवाली क्षेत्र में एक किशोरी के साथ एक होटल में गैंगरेप किया गया। सफीपुर में युवती के साथ रेप करने के बाद आरोपी ने उसके भाई को ही मार डाला।

इसके अलावा हसनगंज, असोहा, पुरवा आदि में भी किशोरियों के साथ बलात्कार के कई मामले सामने आए। कुछ रेप पीड़ितों को घटना के बाद पहले आरोपियों ने धमकाया। फिर समाज से भी उपेक्षा मिली। इसके बाद भी इन पीड़िताओं ने परिस्थितियों का डटकर सामना किया और आगे आकर आरोपियों को जेल भिजवाया।


यदि किसी को महिला सशक्तीकरण देखना है तो उसे उन्नाव आना चाहिए। प्रदेश सरकार ने जिले में हर बड़े पद पर महिला अफसरों को तैनात कर रखा है। डीएम सौम्या अग्रवाल, एसपी नेहा पांडेय, सीडीओ संदीप कौर, एसडीएम सदर जसजीत कौर, एसडीएम हसनगंज अर्चना द्विवेदी, ईओ नगर पालिका रोली गुप्ता, डीपीओ शीरी मसूद समेत अन्य कई पदों पर महिलाएं ही काबिज हैं। और तो और जिले की प्रथम नागरिक यानि जिला पंचायत अध्यक्ष संगीता सेंगर भी एक महिला ही हैं।
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