जानिए कौन थे डॉ. कल्बे सादिक, जिन्हें मरणोपरांत मिला पद्म भूषण सम्मान
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यूपी में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के उपाध्यक्ष व शिया धर्म गुरु रहे। देश-विदेश में ख्यातिप्राप्त डॉ. सादिक शिक्षा और खासकर लड़कियों व गरीब बच्चों की शिक्षा के लिए हमेशा सक्रिय रहे। यूनिटी कालेज और एरा मेडिकल कालेज के संरक्षक भी थे।
लड़कियों की शिक्षा के लिए सक्रिय रहे कल्बे सादिक
डॉ. कल्बे सादिक को पूरी दुनिया आपसी भाईचारे और मोहब्बत का पैगाम देते शिया धर्म गुरु के रूप में जानती है। उन्होंने हर बात में शिक्षा को भी बढ़ावा दिया। विदेशों में मजलिस पढ़ने जाते थे और मोहब्बत का पैगाम देते थे।
उदारवादी छवि
मौलाना कल्बे सादिक दुनिया भर में अपनी उदारवादी छवि के लिए पहचाने जाते थे। मुस्लिम समाज से रूढ़िवादी परंपराओं को खत्म करने के लिए वे आजीवन लड़ाई लड़ते रहे। उन्होंने न सिर्फ रूढ़िवादियों को विरोध किया, बल्कि शिक्षा को आगे बढ़ाने के लिए कई प्रयास किए।
उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन किया। इसके बाद उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) से उच्च शिक्षा हासिल की। वे पीएचडी धारक भी थे।
कई बार झेलना पड़ा समाज का विरोध
समाज में मौलाना कल्बे सादिक के सुधारों का विरोध भी होता रहा। कहा जाता है कि वह चांद देख कर ईद का ऐलान नहीं करते थे, बल्कि रमजान की शुरुआत में ही ईद और बकरीद की तारीखों की घोषणा कर देते थे। उनके इन कदमों का काफी विरोध भी होता रहा।