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शामली: वर्षों से लंबित पड़ा जिला जज न्यायालय भवन का निर्माण
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, शामली
Updated Sat, 25 Feb 2017 12:19 AM IST
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अदालत
- फोटो : file
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पांच साल बीतने के बाद भी मुख्यालय पर जिला जज न्यायालय भवन की स्थापना नहीं हो पाई है। जिससे जनता को सस्ता सुलभ न्याय नहीं मिल पा रहा है। यहां के लोगों को न्याय के लिए मुजफ्फरनगर जिला मुख्यालय पर जाना पड़ रहा है। जिससे वादकारियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
28 सितंबर 2011 को शामली अलग जिला बनाया गया। जिला मुख्यालय के लिए पूर्वी यमुना नहर के किनारे गांव मुंडेट, बधेव, गोहरनी, भैसवाल की 265 एकड़ भूमि का चयन किया गया।
अस्थायी रूप से शामली तहसील में कलक्ट्रेट, ब्लाक में विकास भवन, वरदान बारातघर में एसपी कार्यालय, नवीन मंडी स्थल पर पुलिस लाइन की स्थापना की गई।
2012 में प्रदेश सरकार बदली जिला मुख्यालय के कार्यालय भवन निर्माण में तेजी आई। जिले के अधिवक्ता मुख्यालय पर अस्थायी रूप से जिला जज न्यायालय की स्थापना की मांग कर चुके है, किंतु इलाहाबाद उच्च न्यायालय के निर्देश पर जिला जज न्यायालय कार्यालय की अस्थायी रूप से स्थापना के लिए भवन की तलाश की गई थी।
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इलाहाबाद उच्च न्यायालय को जिला प्रशासन की ओर से पुराने आरके पीजी कॉलेज भवन का प्रस्ताव गया था। उच्च न्यायालय के तत्कालीन प्रशासनिक जज महेंद्र दयाल ने निरीक्षण के दौरान कह दिया था कि अस्थायी जिला जज न्यायालय धर्मशाला में स्थापित नहीं किया जा सकता है।
स्थायी रूप से जिला जज न्यायालय कार्यालय भवनों एवं पीठासीन अधिकारियों के आवासों की पर्याप्त भूमि मिलने पर स्थायी रूप से जिला मुख्यालय पर इसे स्थापित किया जाएगा। तत्कालीन डीएम ओपी वर्मा एक वर्ष पूर्व जिला जज न्यायालय की स्थापना के लिए गोहरनी गांव में 50 एकड़ भूमि आवंटित करा चुके हैं।
जिला बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष बिजेंद्र सिंह एडवोकेट ने बताया कि छह माह पूर्व उन्होंने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश, रजिस्ट्रार जनरल, प्रशासनिक न्यायाधीश से मुलाकात के दौरान अधिवक्ताओं को अवगत कराया था कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय की ओर से उत्तर प्रदेश शासन को शामली जिले में जिला जज न्यायालय कार्यालय एवं आवासीय भवनों की स्थापना के लिए 208 करोड़ का एस्टीमेट जा चुका है।
उन्होंने बताया कि हापुड़ में अस्थायी रूप से जिला जज न्यायालय कार्य कर रहा है। उन्होंने बताया कि शामली जिले में फैमिली कोर्ट की स्थापना की स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है स्थापना नहीं हो पाई है। जिससे यहां के लोगों को न्याय के लिए मुजफ्फरनगर जिला मुख्यालय पर जाना पड़ता है।
जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष चंद्रभान सिंह का कहना है कि जिला जज न्यायालय, कार्यालय, आवासीय भूमि के लिए भवन निर्माण के नक्शे पास करने की कार्रवाई अधूरी है। अस्थायी जिलाजज न्यायालय एवं कार्यालय के लिए इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने भवन तलाश करने के डीएम को
निर्देश दिए गए हैं।
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28 सितंबर 2011 को शामली अलग जिला बनाया गया। जिला मुख्यालय के लिए पूर्वी यमुना नहर के किनारे गांव मुंडेट, बधेव, गोहरनी, भैसवाल की 265 एकड़ भूमि का चयन किया गया।
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अस्थायी रूप से शामली तहसील में कलक्ट्रेट, ब्लाक में विकास भवन, वरदान बारातघर में एसपी कार्यालय, नवीन मंडी स्थल पर पुलिस लाइन की स्थापना की गई।
2012 में प्रदेश सरकार बदली जिला मुख्यालय के कार्यालय भवन निर्माण में तेजी आई। जिले के अधिवक्ता मुख्यालय पर अस्थायी रूप से जिला जज न्यायालय की स्थापना की मांग कर चुके है, किंतु इलाहाबाद उच्च न्यायालय के निर्देश पर जिला जज न्यायालय कार्यालय की अस्थायी रूप से स्थापना के लिए भवन की तलाश की गई थी।
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इलाहाबाद उच्च न्यायालय को जिला प्रशासन की ओर से पुराने आरके पीजी कॉलेज भवन का प्रस्ताव गया था। उच्च न्यायालय के तत्कालीन प्रशासनिक जज महेंद्र दयाल ने निरीक्षण के दौरान कह दिया था कि अस्थायी जिला जज न्यायालय धर्मशाला में स्थापित नहीं किया जा सकता है।
स्थायी रूप से जिला जज न्यायालय कार्यालय भवनों एवं पीठासीन अधिकारियों के आवासों की पर्याप्त भूमि मिलने पर स्थायी रूप से जिला मुख्यालय पर इसे स्थापित किया जाएगा। तत्कालीन डीएम ओपी वर्मा एक वर्ष पूर्व जिला जज न्यायालय की स्थापना के लिए गोहरनी गांव में 50 एकड़ भूमि आवंटित करा चुके हैं।
जिला बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष बिजेंद्र सिंह एडवोकेट ने बताया कि छह माह पूर्व उन्होंने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश, रजिस्ट्रार जनरल, प्रशासनिक न्यायाधीश से मुलाकात के दौरान अधिवक्ताओं को अवगत कराया था कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय की ओर से उत्तर प्रदेश शासन को शामली जिले में जिला जज न्यायालय कार्यालय एवं आवासीय भवनों की स्थापना के लिए 208 करोड़ का एस्टीमेट जा चुका है।
उन्होंने बताया कि हापुड़ में अस्थायी रूप से जिला जज न्यायालय कार्य कर रहा है। उन्होंने बताया कि शामली जिले में फैमिली कोर्ट की स्थापना की स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है स्थापना नहीं हो पाई है। जिससे यहां के लोगों को न्याय के लिए मुजफ्फरनगर जिला मुख्यालय पर जाना पड़ता है।
जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष चंद्रभान सिंह का कहना है कि जिला जज न्यायालय, कार्यालय, आवासीय भूमि के लिए भवन निर्माण के नक्शे पास करने की कार्रवाई अधूरी है। अस्थायी जिलाजज न्यायालय एवं कार्यालय के लिए इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने भवन तलाश करने के डीएम को
निर्देश दिए गए हैं।