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करोड़ों मिले, पर नहीं बन सके बिजली घर
अमर उजाला ब्यूरो/झांसी
Updated Mon, 14 Mar 2016 12:55 AM IST
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electricity, jhansi news
- फोटो : demo pic
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झांसी। ओवरलोडिंग और आए दिन हो रहे फॉल्ट से निपटने के लिए नगर में तीन सब स्टेशन बनाए जाने की योजना घिसट रही है। स्कॉडा योजना के तहत दो वर्ष पहले धनराशि मिलने के बाद भी 33 केवीए के नए बिजली घर अब तक नहीं बन सके हैं। कहीं जमीन का पेच फंसा होने के कारण भवन बनना शुरू नहीं हुआ है तो कहीं लाइन नहीं डल पाई है।
महानगर की बिजली व्यवस्था सुधारने के लिए वर्ष 2012 में स्कॉडा योजना के तहत नई लाइन तैयार करना, नए बिजली घर बनाना के अलावा अन्य कार्यों के प्रस्ताव तैयार किए गए थे। इन कामों पर 360 करोड़ रुपये खर्च आंका गया था। शासन ने इस योजना को स्वीकृति दे दी थी। वर्ष 2014 में झांसी महानगर में तीन नए बिजली घर बनाए जाने के लिए 237 करोड़ रुपये जारी किए गए।
यह बिजली घर दतिया गेट बाहर, शिवाजी नगर एवं हाइडिल कॉलोनी में बनाए जाने थे। इस धनराशि से तीनों बिजली घरों के भवन का निर्माण, मशीनाें व ट्रांसफार्मरों की खरीद, नई लाइन आदि डाली जानी थी। यह योजना शुरू से ही विलंबित हो गई। हाइडिल कॉलोनी में बिजली घर बनने से पहले ही सिंचाई विभाग ने पेच फंसा दिया। सिंचाई विभाग ने बनने वाले बिजली घर की जमीन को अपना बता दिया। जैसे-तैसे यह मामला सुलझा। वहीं दतिया गेट बाहर बनने वाला बिजली घर पर्याप्त जगह न मिलने के कारण ग्राम भगवंतपुरा में स्थानांतरित कर दिया गया। इसी प्रकार शिवाजी नगर में बनने वाला बिजली घर भी वहां न बनाकर विश्वविद्यालय के पास बनाया जाने लगा।
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विद्युत नगरीय वितरण खंड द्वितीय के अधिशासी अभियंता पंकज अग्रवाल का कहना है कि भगवंतपुरा में बनने वाले बिजली घर के लिए जमीन मिलने के बाद भी अभी तक निर्माण कार्य प्रारंभ नहीं हो सका है। क्योंकि राजस्व विभाग के लेखपाल व अन्य अधिकारियों ने जमीन को क्लीन चिट नहीं दी है। वहीं विश्वविद्यालय के पास बनने वाले बिजली घर का निर्माण कार्य बीच में रोक दिया गया है। क्योंकि यहां भी जमीन तो है, मगर उस तक जाने के लिए रास्ता नहीं मिल पा रहा है।
उधर, हाइडिल कॉलोनी में बनने वाला बिजली घर भी सिर्फ भवनों तक ही सीमित रह गया है। इसे बड़े बिजली घरों से जोड़ने के लिए विद्युत लाइन का निर्माण होना है। उन्होंने बताया कि इन तीनों बिजली घरों का निर्माण कार्य निविदा के मुताबिक गत दिसंबर 2015 में पूरा हो जाना चाहिए था। फिलहाल मामला अधर में लटका हुआ है।
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महानगर की बिजली व्यवस्था सुधारने के लिए वर्ष 2012 में स्कॉडा योजना के तहत नई लाइन तैयार करना, नए बिजली घर बनाना के अलावा अन्य कार्यों के प्रस्ताव तैयार किए गए थे। इन कामों पर 360 करोड़ रुपये खर्च आंका गया था। शासन ने इस योजना को स्वीकृति दे दी थी। वर्ष 2014 में झांसी महानगर में तीन नए बिजली घर बनाए जाने के लिए 237 करोड़ रुपये जारी किए गए।
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यह बिजली घर दतिया गेट बाहर, शिवाजी नगर एवं हाइडिल कॉलोनी में बनाए जाने थे। इस धनराशि से तीनों बिजली घरों के भवन का निर्माण, मशीनाें व ट्रांसफार्मरों की खरीद, नई लाइन आदि डाली जानी थी। यह योजना शुरू से ही विलंबित हो गई। हाइडिल कॉलोनी में बिजली घर बनने से पहले ही सिंचाई विभाग ने पेच फंसा दिया। सिंचाई विभाग ने बनने वाले बिजली घर की जमीन को अपना बता दिया। जैसे-तैसे यह मामला सुलझा। वहीं दतिया गेट बाहर बनने वाला बिजली घर पर्याप्त जगह न मिलने के कारण ग्राम भगवंतपुरा में स्थानांतरित कर दिया गया। इसी प्रकार शिवाजी नगर में बनने वाला बिजली घर भी वहां न बनाकर विश्वविद्यालय के पास बनाया जाने लगा।
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विद्युत नगरीय वितरण खंड द्वितीय के अधिशासी अभियंता पंकज अग्रवाल का कहना है कि भगवंतपुरा में बनने वाले बिजली घर के लिए जमीन मिलने के बाद भी अभी तक निर्माण कार्य प्रारंभ नहीं हो सका है। क्योंकि राजस्व विभाग के लेखपाल व अन्य अधिकारियों ने जमीन को क्लीन चिट नहीं दी है। वहीं विश्वविद्यालय के पास बनने वाले बिजली घर का निर्माण कार्य बीच में रोक दिया गया है। क्योंकि यहां भी जमीन तो है, मगर उस तक जाने के लिए रास्ता नहीं मिल पा रहा है।
उधर, हाइडिल कॉलोनी में बनने वाला बिजली घर भी सिर्फ भवनों तक ही सीमित रह गया है। इसे बड़े बिजली घरों से जोड़ने के लिए विद्युत लाइन का निर्माण होना है। उन्होंने बताया कि इन तीनों बिजली घरों का निर्माण कार्य निविदा के मुताबिक गत दिसंबर 2015 में पूरा हो जाना चाहिए था। फिलहाल मामला अधर में लटका हुआ है।