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एड्स की मार, रोगी 250 पार
अमर उजाला ब्यूरो/झांसी
Updated Sun, 06 Mar 2016 12:56 AM IST
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aids, hindi news in jhansi
- फोटो : demo pic
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झांसी। पोलियो की तरह भले ही सरकारों ने एड्स को जड़ से मिटाने का मन बना लिया हो लेकिन दिनों दिन यह लाइलाज बीमारी तेजी से पांव पसार रही है। अकेले बुंदेलखंड क्षेत्र में इस साल 250 एड्स रोगी और मिल गए हैं। यह बीते साल की तुलना में दो दर्जन अधिक हैं।
बीते कुछ सालों से एड्स को खत्म करने के लिए अभियान, विज्ञापन, जागरूकता शिविरों आदि का सहारा लिया जा रहा है, जिसके जरिए असुरक्षित यौन संबंध न बनाने पर जोर है। इन सबके बावजूद एड्स मरीजों की संख्या घटने के बजाए साल दर साल बढ़ती जा रही है। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में बने एंटी रिट्रोवायरल ट्रीटमेंट (एआरटी) सेंटर के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। सत्र 2015-16 में 250 एड्स रोगी हो गए हैं। बताया गया कि प्रत्येक वर्ष एड्स रोगियों की संख्या में दो दर्जन का इजाफा हो जाता है।
सर्वाधिक यौन संबंध या फिर इंजेक्शन से बने शिकार
सबसे अधिक लोग असुरक्षित यौन संबंध के जरिए एड्स का शिकार हुए हैं। इसके साथ ही सेंटर में दूसरे स्थान पर इंजेक्शन से एड्स का शिकार बने मरीजों की तादाद अधिक पाई गई है। इसमें कई व्यक्तियों का समूह जब इंजेक्शन के जरिए अपने शरीर में ड्रग भेजता है, तब किसी भी एक के एड्स पीड़ित होने पर रक्त के जरिए वायरस चला जाता है।
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एड्स रोगियों का मददगार एआरटी सेंटर
नवंबर 2009 में मेडिकल कॉलेज में शुरू हुआ एआरटी सेंटर बुंदेलखंड व इसके आसपास के क्षेत्रों के एड्स रोगियों को इलाज में काफी मदद पहुंचा रहा है। लंबी दूरी का सफर तय करने के बजाए मरीजों को नजदीक में ही दवाएं मिल रही हैं। सेंटर में एड्स रोगी की सीडी-4 कोशिकाओं की गिनती की जाती है। इसके जरिए व्यक्ति की प्रतिरोधक क्षमता का पता चलता है। इसकी संख्या 350 से कम होने पर मरीज को दवाएं देना शुरू कर देते हैं। जांच व दवाएं पूरी तरह नि:शुल्क होती हैं। बताया गया कि एड्स की चपेट में आने के बाद यदि मरीज कोई इलाज नहीं कराता है तब वह 6-12 साल तक जीवित रह पाता है लेकिन यदि वह एआरटी सेंटर के जरिए दवाएं लेता रहता है तब वह अपने जीवन का अधिकांश समय काट सकता है।
जेल में मिला एक एड्स रोगी
झांसी। उत्तर प्रदेश राज्य एड्स नियंत्रण सोसायटी द्वारा जिला कारागार में निरुद्ध बंदियों की एचआईवी की जांच की जा रही है, जिसमें एक बंदी एचआईवी पॉजिटिव पाया गया है।
एड्स नियंत्रण सोसायटी द्वारा पिछले एक सप्ताह से जेल में निरुद्ध बंदियों की एचआईवी जांच की जा रही है। अब तक पांच सौ बंदियों की जांच का काम पूरा कर लिया गया है। इसमें एक मरीज में एचआईवी पॉजिटिव पाया गया है। बंदी के इलाज के लिए जेल प्रशासन द्वारा विशेष प्रबंध किए जा रहे हैं। अन्य बंदियों की जांच भी जारी है। मालूम हो कि सोसायटी द्वारा बंदियों की जांच के साथ-साथ उन्हें एड्स के प्रति जागरूक भी किया जा रहा है।
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बीते कुछ सालों से एड्स को खत्म करने के लिए अभियान, विज्ञापन, जागरूकता शिविरों आदि का सहारा लिया जा रहा है, जिसके जरिए असुरक्षित यौन संबंध न बनाने पर जोर है। इन सबके बावजूद एड्स मरीजों की संख्या घटने के बजाए साल दर साल बढ़ती जा रही है। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में बने एंटी रिट्रोवायरल ट्रीटमेंट (एआरटी) सेंटर के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। सत्र 2015-16 में 250 एड्स रोगी हो गए हैं। बताया गया कि प्रत्येक वर्ष एड्स रोगियों की संख्या में दो दर्जन का इजाफा हो जाता है।
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सर्वाधिक यौन संबंध या फिर इंजेक्शन से बने शिकार
सबसे अधिक लोग असुरक्षित यौन संबंध के जरिए एड्स का शिकार हुए हैं। इसके साथ ही सेंटर में दूसरे स्थान पर इंजेक्शन से एड्स का शिकार बने मरीजों की तादाद अधिक पाई गई है। इसमें कई व्यक्तियों का समूह जब इंजेक्शन के जरिए अपने शरीर में ड्रग भेजता है, तब किसी भी एक के एड्स पीड़ित होने पर रक्त के जरिए वायरस चला जाता है।
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एड्स रोगियों का मददगार एआरटी सेंटर
नवंबर 2009 में मेडिकल कॉलेज में शुरू हुआ एआरटी सेंटर बुंदेलखंड व इसके आसपास के क्षेत्रों के एड्स रोगियों को इलाज में काफी मदद पहुंचा रहा है। लंबी दूरी का सफर तय करने के बजाए मरीजों को नजदीक में ही दवाएं मिल रही हैं। सेंटर में एड्स रोगी की सीडी-4 कोशिकाओं की गिनती की जाती है। इसके जरिए व्यक्ति की प्रतिरोधक क्षमता का पता चलता है। इसकी संख्या 350 से कम होने पर मरीज को दवाएं देना शुरू कर देते हैं। जांच व दवाएं पूरी तरह नि:शुल्क होती हैं। बताया गया कि एड्स की चपेट में आने के बाद यदि मरीज कोई इलाज नहीं कराता है तब वह 6-12 साल तक जीवित रह पाता है लेकिन यदि वह एआरटी सेंटर के जरिए दवाएं लेता रहता है तब वह अपने जीवन का अधिकांश समय काट सकता है।
जेल में मिला एक एड्स रोगी
झांसी। उत्तर प्रदेश राज्य एड्स नियंत्रण सोसायटी द्वारा जिला कारागार में निरुद्ध बंदियों की एचआईवी की जांच की जा रही है, जिसमें एक बंदी एचआईवी पॉजिटिव पाया गया है।
एड्स नियंत्रण सोसायटी द्वारा पिछले एक सप्ताह से जेल में निरुद्ध बंदियों की एचआईवी जांच की जा रही है। अब तक पांच सौ बंदियों की जांच का काम पूरा कर लिया गया है। इसमें एक मरीज में एचआईवी पॉजिटिव पाया गया है। बंदी के इलाज के लिए जेल प्रशासन द्वारा विशेष प्रबंध किए जा रहे हैं। अन्य बंदियों की जांच भी जारी है। मालूम हो कि सोसायटी द्वारा बंदियों की जांच के साथ-साथ उन्हें एड्स के प्रति जागरूक भी किया जा रहा है।