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मनरेगा घोटालेबाजों पर जल्द दर्ज होगा केस
अमर उजाला ब्यूरो, बलरामपुर
Updated Sat, 05 Mar 2016 11:40 PM IST
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मनरेगा में करोड़ों रुपये के घोटाले की जांच सीबीआई ने पूरी कर ली है और इसके आरोपियों के खिलाफ जल्द ही एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। मामले के विवेचक ने शनिवार को बताया कि आरोपियों की गर्दन दबोचने के लिए सीबीआई पूरी तैयारी में जुट गई है।
सीबीआई विवेचक गणेश शंकर ने शनिवार पत्रकारों से बातचीत में जानकारी दी कि बलरामपुर जिले के मनरेगा घोटाले की जांच प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।
भारत सरकार के निर्देश पर वर्ष 2007 से 2010 के बीच मनरेगा के तहत किए कार्यों में कई करोड़ रुपये का घोटाला होने की पुष्टि हुई है। जांच रिपोर्ट प्रवर्तन निदेशालय को भी सौंपी गई है।
आरोपियों की गर्दन दबोचने के लिए सीबीआई पूरी तैयारी में जुट गई है। विवेचक के अनुसार शीघ्र ही एफआईआर दर्ज करा आरोपियों की गिरफ्तारी की जाएगी।
वर्ष 2007 से 2010 तक जिले में तैनात डीएम, सीडीओ, परियोजना निदेशक सहित अन्य कई अफसरों, कर्मियों व स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों पर एफआईआर की गाज गिर सकती है।
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सीबीआई विवेचक के अनुसार मनरेगा में करोड़ों रुपये का घोटाला किया गया है। वर्ष 2007 से 2010 के बीच अफसरों, कर्मियों व स्वयंसेवी संस्थाओं की मिलीभगत से कागजों में ही सामानों की खरीद कर कार्यों को पूरा बताकर करोड़ों रुपये डकार लिए गए।
कंप्यूटर, अलमारी, टेंट, श्रमिकों के बच्चों के लिए खिलौने, कई जनरेटर, शिकायत पेटिका, चिकित्सा किट, तसला, फावड़ा व स्टेशनरी तक की खरीद कागजों में किए जाने का खुलासा जांच के दौरान हुआ है।
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सीबीआई विवेचक गणेश शंकर ने शनिवार पत्रकारों से बातचीत में जानकारी दी कि बलरामपुर जिले के मनरेगा घोटाले की जांच प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।
भारत सरकार के निर्देश पर वर्ष 2007 से 2010 के बीच मनरेगा के तहत किए कार्यों में कई करोड़ रुपये का घोटाला होने की पुष्टि हुई है। जांच रिपोर्ट प्रवर्तन निदेशालय को भी सौंपी गई है।
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आरोपियों की गर्दन दबोचने के लिए सीबीआई पूरी तैयारी में जुट गई है। विवेचक के अनुसार शीघ्र ही एफआईआर दर्ज करा आरोपियों की गिरफ्तारी की जाएगी।
वर्ष 2007 से 2010 तक जिले में तैनात डीएम, सीडीओ, परियोजना निदेशक सहित अन्य कई अफसरों, कर्मियों व स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों पर एफआईआर की गाज गिर सकती है।
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सीबीआई विवेचक के अनुसार मनरेगा में करोड़ों रुपये का घोटाला किया गया है। वर्ष 2007 से 2010 के बीच अफसरों, कर्मियों व स्वयंसेवी संस्थाओं की मिलीभगत से कागजों में ही सामानों की खरीद कर कार्यों को पूरा बताकर करोड़ों रुपये डकार लिए गए।
कंप्यूटर, अलमारी, टेंट, श्रमिकों के बच्चों के लिए खिलौने, कई जनरेटर, शिकायत पेटिका, चिकित्सा किट, तसला, फावड़ा व स्टेशनरी तक की खरीद कागजों में किए जाने का खुलासा जांच के दौरान हुआ है।