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मासूम रहा ‘लापता’ और पुलिस ने लगा दी एफआर
अमर उजाला ब्यूरो फीरोजाबाद
Updated Wed, 09 Mar 2016 10:42 PM IST
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मासूम रहा ‘लापता’ और पुलिस ने लगा दी एफआर
- फोटो : अमर उजाला
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के टुकड़े के लापता होने पर मां-पिता थानों के चक्कर लगाते रहे और पुलिस व्यस्तता का बहाना बनाती रही। लेकिन कागजी कार्रवाई में काबिलियत भी दिखा दी। ऐसे मामलों में एफआर और चार्जशीट लगाकर फाइल बंद कर दी।
लाल के मिलने की चाहत लेकर पुलिस लाइन पहुंचे पीड़ितों का एसपी सिटी के सामने गुबार निकला। उन्होंने एसपी को बताया कि उनके पुत्र के लापता होने पर पुलिस ने कैसे ढ़ुलमुल रवैया अपनाया। एक पीड़ित ने बताया कि पुत्री के गायब होने के मामले में जिले की पुलिस कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूरी करती दिखी। पुलिस ने नामजद एक किशोरी को बरामद किए बिना चार्जशीट दाखिल करते हुए उसको सजा भी करा दी, जबकि पीड़ित पुत्री की बरामदगी के लिए आज भी थाने के चक्कर लगाने को विवश हो रहा है।
यह मामले रहे प्रमुख
उत्तर थाना क्षेत्र की रहने वाली आशू एक अक्तूबर 2015 को लापता हुई थी। वह डीएबी इंटर कालेज में कक्षा सात की छात्रा थी। पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया, लेकिन कार्रवाई के नाम पर विवेचक के पास कोई जवाब नहीं था। दक्षिण कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला बड़ा छपैटी निवासी सत्यम गुप्ता को लापता हुए चार वर्ष बीत गए, मुकदमे में एफआर लगा दी। शिकोहाबाद क्षेत्र से लापता हुए सचिन को भी पुलिस नहीं खोज सकी। विवेचक के पास कोई संतोषजनक जवाब नहीं था। नारखी क्षेत्र से लापता हुई किशोरी के मामले में पुलिस ने पीड़ित पक्ष की तहरीर पर आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जेल भेज दिया। उसके खिलाफ चार्जशीट भी दाखिल कर दी। दस साल की सजा भी हो गई। लेकिन पुलिस लापता किशोरी मंगू को आज तक बरामद नहीं कर सकी।
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सिरसागंज के गांव भारौल निवासी योगेश को लापता हुए तीन वर्ष बीत गए। पुलिस ने फाइल भी बंद कर दी। लेकिन पीड़ित मुन्नालाल को आज भी लाल के मिलने की उम्मीद बरकरार है। पुलिस लाइन पहुंची लापता फैजान की मां आशा परवीन मूलरूप से टूंडला थाना क्षेत्र के कच्चा टूंडला की रहने वाली है। उनका कहना था कि थाने में सुनवाई न होने पर पुलिस अधिकारियों से गुहार लगाई थी, लेकिन वहां भी कोई सुनवाई नहीं हो सकी।
एफआर वाले मामलों में दोबारा से होगी जांच
जिन मामलों में पुलिस द्वारा एफआर लगा दी गई है, उन मामलों में पुन: विवेचना कराई जाएगी। इससे सौ प्रतिशत नहीं 60 प्रतिशत बच्चे मिल सकें। इसके लिए उन्होंने सभी थानेदारों को निर्देश जारी कर दिए हैं।
संजीव वाजपेयी, एसपी सिटी
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लाल के मिलने की चाहत लेकर पुलिस लाइन पहुंचे पीड़ितों का एसपी सिटी के सामने गुबार निकला। उन्होंने एसपी को बताया कि उनके पुत्र के लापता होने पर पुलिस ने कैसे ढ़ुलमुल रवैया अपनाया। एक पीड़ित ने बताया कि पुत्री के गायब होने के मामले में जिले की पुलिस कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूरी करती दिखी। पुलिस ने नामजद एक किशोरी को बरामद किए बिना चार्जशीट दाखिल करते हुए उसको सजा भी करा दी, जबकि पीड़ित पुत्री की बरामदगी के लिए आज भी थाने के चक्कर लगाने को विवश हो रहा है।
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यह मामले रहे प्रमुख
उत्तर थाना क्षेत्र की रहने वाली आशू एक अक्तूबर 2015 को लापता हुई थी। वह डीएबी इंटर कालेज में कक्षा सात की छात्रा थी। पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया, लेकिन कार्रवाई के नाम पर विवेचक के पास कोई जवाब नहीं था। दक्षिण कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला बड़ा छपैटी निवासी सत्यम गुप्ता को लापता हुए चार वर्ष बीत गए, मुकदमे में एफआर लगा दी। शिकोहाबाद क्षेत्र से लापता हुए सचिन को भी पुलिस नहीं खोज सकी। विवेचक के पास कोई संतोषजनक जवाब नहीं था। नारखी क्षेत्र से लापता हुई किशोरी के मामले में पुलिस ने पीड़ित पक्ष की तहरीर पर आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जेल भेज दिया। उसके खिलाफ चार्जशीट भी दाखिल कर दी। दस साल की सजा भी हो गई। लेकिन पुलिस लापता किशोरी मंगू को आज तक बरामद नहीं कर सकी।
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सिरसागंज के गांव भारौल निवासी योगेश को लापता हुए तीन वर्ष बीत गए। पुलिस ने फाइल भी बंद कर दी। लेकिन पीड़ित मुन्नालाल को आज भी लाल के मिलने की उम्मीद बरकरार है। पुलिस लाइन पहुंची लापता फैजान की मां आशा परवीन मूलरूप से टूंडला थाना क्षेत्र के कच्चा टूंडला की रहने वाली है। उनका कहना था कि थाने में सुनवाई न होने पर पुलिस अधिकारियों से गुहार लगाई थी, लेकिन वहां भी कोई सुनवाई नहीं हो सकी।
एफआर वाले मामलों में दोबारा से होगी जांच
जिन मामलों में पुलिस द्वारा एफआर लगा दी गई है, उन मामलों में पुन: विवेचना कराई जाएगी। इससे सौ प्रतिशत नहीं 60 प्रतिशत बच्चे मिल सकें। इसके लिए उन्होंने सभी थानेदारों को निर्देश जारी कर दिए हैं।
संजीव वाजपेयी, एसपी सिटी