{"_id":"56ddc54e4f1c1bc0238b4584","slug":"sugar-mills-owe-rs-110-crore-to-sugarcane-farmers","type":"story","status":"publish","title_hn":"चीनी मिलों पर गन्ना किसानों के 110 करोड़ रुपये बकाया ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चीनी मिलों पर गन्ना किसानों के 110 करोड़ रुपये बकाया
बदायूं, ब्यूरो
Updated Mon, 07 Mar 2016 11:45 PM IST
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सूखा देता सीख है, सबसे अच्छी ईख है... जैसे स्लोगनों से जिले में गन्ना पैदावार बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हों, लेकिन बीते दिन वर्षों से गन्ना का रकबा घटता ही जा रहा है। इसके पीछे गन्ना किसानों का समय से भुगतान न होना और गन्ना मूल्यों की बढ़ोत्तरी न करने को माना जा रहा है। चीनी मिलों को तमाम सहूलियतें दिए जाने के बावजूद मिलों ने गन्ना मूल्यों का भुगतान किसानों को समय से करने को लेकर प्रतिबद्धता नहीं दिखाई है। चीनी मिल संचालकों की इस लेटलतीफी की वजह से ही जिले के गन्ना किसानों का 67.70 करोड़ रुपये बकाया है। इसके साथ ही 42.40 करोड़ रुपये 50 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से गन्ना समर्थन मूल्य बकाया है, जो चीनी मिल बंद होने के तीन माह बाद दिया जाएगा। दोनों को मिलाकर 110 करोड़ रुपये गन्ना किसानों के पास चीनी मिलों के अटके हुए हैं।
जिले में 20783 हेक्टेयर में गन्ने की फसल बोयी गई थी। इसमें हुई पैदावार का एक बड़ा हिस्सा किसानों ने चीनी मिलों को न देकर खुले बाजारों में बेच दिया था। क्योंकि किसानों को खुले बाजारों में करीब 250 से 260 रुपये क्विंटल के हिसाब से नगद रुपये मिल गए थे, जबकि मिलों को शासन द्वारा तय किए गए गन्ना मूल्य 280 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से भुगतान करना था। इसमें भी मिलों को 230 रुपये क्विंटल का भुगतान नगद देना था, जबकि शेष 50 रुपये क्विंटल का भुगतान मिल बंद होेने के तीन माह बाद करना था। इसके बावजूद चीनी मिलों ने किसानों का रुपया दबाए रखा है।
जिले के गन्ना किसानों ने गन्ना सहकारी समितियों के तहत आने वाली छह चीनी मिलों को 280 रुपये क्विंटल के हिसाब से 254.24 करोड़ रुपये का गन्ना दिया था। इसमें 50 रुपये समर्थन मूल्य काटकर गन्ना किसानों का बकाया 211.84 करोड़ रुपये बन रहा था, जिसमें चीनी मिलों ने 144.14 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया है। इसमें 67.63 करोड़ रुपये बकाया रह गया है। इसके अलावा करीब 4240 करोड़ रुपये समर्थन मूल्य बकाया है। यह बकाया धनराशि किसानों को दिलाने में गन्ना विभाग ठोस कदम नहीं उठा पा रहा है, जिसका फायदा चीनी मिलें उठा रही हैं।
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गन्ना किसानों के बकाया भुगतान के लिए सभी चीनी मिलों को नोटिस दिए जा चुके हैं। चीनी मिलों के जीएम को समय से गन्ने भुगतान कराने के लिए कहा गया है। इसके लिए जिला प्रशासन का भी सहयोग लिया जा रहा है।
रामकिशन, सचिव, जिला गन्ना सहकारी समिति
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जिले में 20783 हेक्टेयर में गन्ने की फसल बोयी गई थी। इसमें हुई पैदावार का एक बड़ा हिस्सा किसानों ने चीनी मिलों को न देकर खुले बाजारों में बेच दिया था। क्योंकि किसानों को खुले बाजारों में करीब 250 से 260 रुपये क्विंटल के हिसाब से नगद रुपये मिल गए थे, जबकि मिलों को शासन द्वारा तय किए गए गन्ना मूल्य 280 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से भुगतान करना था। इसमें भी मिलों को 230 रुपये क्विंटल का भुगतान नगद देना था, जबकि शेष 50 रुपये क्विंटल का भुगतान मिल बंद होेने के तीन माह बाद करना था। इसके बावजूद चीनी मिलों ने किसानों का रुपया दबाए रखा है।
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जिले के गन्ना किसानों ने गन्ना सहकारी समितियों के तहत आने वाली छह चीनी मिलों को 280 रुपये क्विंटल के हिसाब से 254.24 करोड़ रुपये का गन्ना दिया था। इसमें 50 रुपये समर्थन मूल्य काटकर गन्ना किसानों का बकाया 211.84 करोड़ रुपये बन रहा था, जिसमें चीनी मिलों ने 144.14 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया है। इसमें 67.63 करोड़ रुपये बकाया रह गया है। इसके अलावा करीब 4240 करोड़ रुपये समर्थन मूल्य बकाया है। यह बकाया धनराशि किसानों को दिलाने में गन्ना विभाग ठोस कदम नहीं उठा पा रहा है, जिसका फायदा चीनी मिलें उठा रही हैं।
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गन्ना किसानों के बकाया भुगतान के लिए सभी चीनी मिलों को नोटिस दिए जा चुके हैं। चीनी मिलों के जीएम को समय से गन्ने भुगतान कराने के लिए कहा गया है। इसके लिए जिला प्रशासन का भी सहयोग लिया जा रहा है।
रामकिशन, सचिव, जिला गन्ना सहकारी समिति