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गली-मोहल्लों में चल रही अवैध्ा कोचिंग
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 11 Mar 2016 12:06 AM IST
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अवैध
- फोटो : अमर उजाला
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जनपद में सैकड़ों कोचिंग अवैध रूप से संचालित की जा रही है। विभाग इन पर रोक लगाने के लिए गंभीर नहीं है। जिसके चलते कोचिंग संचालक बेखौफ होकर बिना पंजीयन के कोचिंग सेंटर चला रहे हैं।
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रिहाइशी इलाकों में कोचिंग सेंटर न चलाने देने का अदालती आदेश आने के बाद अब ऐसी कोचिंग सेंटर का संचालन रोकना विभाग के लिए चुनौती से कम नहीं है। कोचिंग संचालन के लिए उनका पंजीयन माध्यमिक शिक्षा विभाग में होना आवश्यक है।
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लेकिन विभाग की उदासीनता के चलते जनपद में सैकड़ों कोचिंग बिना पंजीयन के संचालित हो रही है। जिसके चलते विभाग को हर साल हजारों में राजस्व का चूना लग रहा है। लेकिन जिम्मेदार इस पर अंकुश नहीं लगा पा रहे हैं।
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शहरी क्षेत्र में ही बिना पंजीयन के सैकड़ों कोचिंग सेंटरों का संचालन किया जा रहा है। लखपेड़ाबाग क्षेत्र में करीब 20, देवा रोड पर करीब 10, राजकमल रोड पर करीब 6 कोचिंग सेंटर चल रहे हैं। विभाग के लोगों की माने तो जनपद में कुल 19 कोचिंग सेंटरों का ही पंजीयन है। विभाग के लोगों की मानें तो जनपद में करीब तीन सौ से अधिक कोचिंग सेंटर है।
शासन ने रिहायशी क्षेत्र में कोचिंग के संचालन पर रोक लगाने के आदेश जारी किए हैं। लेकिन शहरी में क्षेत्र में ही दर्जनों की तादात में रिहायशी क्षेत्र में कोचिंग सेंटरों का चालन किया जा रहा है। लेकिन विभाग इस पर अंकुश नहीं लगा पा रहा है।
देवा रोड निवासी ओम प्रकाश वर्मा कहते हैं कि जब किसी बैच में ज्यादा छात्र होते हैं तो साइकिल की भीड़ के चलते सड़क पर चलना दुश्वार हो जाता है। यहीं के सुरेंद्र श्रीवास्व बताते हैं कि कोचिंग सेंटरों के बाहर रोड़ के किनारे छात्रों के साइकिल खड़ी किए जाने से कई बार आवागमन की समस्या होती है। लेकिन यह समस्या इस समय नहीं है।
कोचिंग संचालक छात्रों से मोटी कमाई कर रह हैं। यूपी बोर्ड पाठ्यक्रम में एक छात्र के लिए कोचिंग संचालक सात से आठ सौ रुपये ले रहे हैं जबकि एक विषय की फीस भी करीब तीन सौ रुपये है। सीबीएसई व आईसीएसई बोर्ड के कोचिंग संचालक छात्रों से हजार रुपये तक वसूल रहे हैं। अलग-अलग कोचिंग सेंटरों द्वारा अलग-अलग फीस ली जाती है।