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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Baghpat News ›   Amar Ujala Exclusive: Sugarcane is standing in the fields and farmers are unable to sow wheat

अमर उजाला एक्सक्लूसिव: बड़ी समस्या से जूझ रहे किसान, खेतों में खड़ा है गन्ना, कैसे बोए गेहूं, भंडार गृह में बीज को बर्बाद कर रहे चूहे

Fri, 07 Jan 2022 02:02 PM IST
कपिल kapil मुकेश पंवार, अमर उजाला, बागपत
मुकेश पंवार, अमर उजाला, बागपत Published by: कपिल kapil Updated Fri, 07 Jan 2022 02:02 PM IST
सार

बागपत में किसानों के सामने एक बड़ी समस्या है। समय से पर्चियां नहीं मिलने से किसानों का गन्ना खेतों में ही खड़ा है। ऐसे में किसान गेहूं नहीं बो पा रहे हैं। वहीं जनपद में इस बार पंद्रह हजार हेक्टेयर गेहूं का रकबा घट गया है।

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Amar Ujala Exclusive: Sugarcane is standing in the fields and farmers are unable to sow wheat
फाइल फोटो। - फोटो : amar ujala

विस्तार

बकाया गन्ना मूल्य भुगतान समेत अन्य समस्याओं से जूझ रहे किसानों के सामने गेहूं बुवाई का संकट है। समय से गन्ना पर्चियां नहीं मिलने पर किसान खेत खाली नहीं कर पाए। जिस कारण बागपत जनपद में इस बार पंद्रह हजार हेक्टेयर गेहूं का रकबा घट गया है। उधर, राजकीय बीज भंडारों में बंद लाखों रुपये का गेहूं का बीज चूहों ने कुतरकर खराब कर दिया है। इससे कृषि विभाग के अधिकारी भी चिंतित हैं।

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जिले के एक लाख, 25 हजार, 915 किसान बागपत समेत अन्य जिलों की 12 चीनी मिलों में गन्ने की सप्लाई करते हैं। इन पर किसानों के लगभग 73,128 लाख रुपये बकाया हैं। चीनी मिलों द्वारा किसानों को समय पर पर्चियां नहीं भेजी जा रही हैं। नतीजतन बागपत समेत अन्य जनपदों में गेहूं का रकबा घट गया है। इससे कृषि विभाग के अफसरों समेत किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गई हैं। 
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15 हजार हेक्टेयर गेंहू का रकबा घटा
जिला कृषि अधिकारी प्रशांत कुमार ने बताया कि गत वर्ष इस समय तक जनपद में लगभग 55 हजार हेक्टेयर गेहूं की बुवाई हो चुकी थी। इस वर्ष अब तक मात्र 40 हजार हेक्टेयर बुवाई की जा सकी है।
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गेहूं बुवाई का उचित समय
राजकीय बीज भंडार पर तैनात एडीओ कृषि नरेश कुमार ने बताया कि गेहूं बुवाई का उचित समय नंवबर से लेकर दिसंबर तक है। इसके बाद बुवाई करने पर पैदावार प्रभावित होती है।

बीज की बर्बादी कर रहे चूहे
राजकीय बीज भंडार पर तैनात गोदाम इंचार्ज नोरंग के अनुसार जनपद में चूहों ने लगभग डेढ़ लाख रुपये का गेहूं का बीज कुतर बर्बाद कर दिया है। अन्य जनपदों में भी यही हाल है। क्योंकि पर्चियां कम आने की वजह से किसान गेहूं का बीज खरीदने नहीं आ रहे हैं। बताया कि शामली, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, सहारनपुर, बागपत व मेरठ में पांच से छह लाख रुपये का गेहूं का बीज बर्बाद कर चुके हैं।

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अब तक पांच लाख क्विंटल गन्ने की पेराई कम
जनपद में संचालित मलकपुर, रमाला व बागपत चीनी मिलें अब तक करीब 80 लाख कुंतल गन्ने की पेराई कर चुकी हैं। पिछले साल जनवरी के पहले सप्ताह तक ये तीनों मिलों 85 लाख कुंतल से अधिक गन्ने की पेराई कर चुकी थीं। इस पेराई सत्र में अब तक मलकपुर चीनी मिल 39 लाख, रमाला 27 लाख व बागपत 14 लाख कुंतल गन्ने की पेराई कर चुकी हैं। यह गत वर्ष की तुलना में पांच लाख कुंतल कम हैं। 

भाकियू के प्रदेश उपाध्यक्ष राजेंद्र सिंह प्रधान का कहना है कि सरकार को पेराई सत्र शुरू करने से पहले बकाया गन्ना मूल्य भुगतान और नियमित पर्चियां भेजने की व्यवस्था करनी चाहिए। इनमें प्रदेश सरकार विफल रही है। भुगतान व पर्चियां न मिलने से किसान परेशान हैं।

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रालोद नेता सतेंद्र मलिक का कहना है कि जब से प्रदेश में योगी सरकार आई है, किसानों की दिक्कतें बढ़ गई हैं। अब तक बकाया गन्ना मूल्य भुगतान की समस्या थी, अब पर्ची के लिए किसान तरस रहे हैं।

जनपद        गेहूं का रकबा        घटा रकबा हेक्टेयर
बागपत             50000                   15000
मुजफ्फरनगर     82486                   25000
बिजनौर            147000                 16000
शामली              50606                  11000
सहारनपुर          112868                18000
मेरठ                 77850                 17000

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