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मरणोपरांत पद्म भूषण पाने वाले कल्बे सादिक एएमयू के छात्र रहे थे विश्वविद्यालय से अरबी भाषा में एमए और बाद में पीएचडी की थी

Amarujala Local Bureau अमर उजाला लोकल ब्यूरो
Updated Wed, 27 Jan 2021 05:55 PM IST
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मरणोपरांत पद्म भूषण पाने वाले कल्बे सादिक एएमयू के छात्र रहे थे 

विश्वविद्यालय से अरबी भाषा में एमए और बाद में पीएचडी की थी
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में सन 2010 में आयोजित एक कार्यक्रम में मंच पर बैठे हुए मौलाना डॉ. कल्बे सादिक साथ में तत्कालीन कुलपति प्रोफेसर पीके अब्दुल अजीज भी दिखाई दे रहे हैं - फोटो : Amar Ujala
अलीगढ़। गणतंत्र दिवस के अवसर पर मरणोपरांत पद्म भूषण सम्मान पाने वाले डॉ. कल्बे सादिक अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के छात्र रहे थे। उन्होंने यहां से अरबी भाषा में एमए और बाद में पीएचडी की थी।
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इसके अलावा वह अनेकों अफसरों पर अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में अतिथि बनकर पधारे। उनका एक स्कूल भी अलीगढ़ में धौर्रा में संचालित होता है। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की उर्दू अकादमी के पूर्व डायरेक्टर और एएमयू मामलों के जानकार डॉ. राहत अबरार कहते हैं कि मौलाना डॉ. कल्बे सादिक के लिए एएमयू दूसरा घर था। एएमयू से उनकी छात्र जीवन की यादें जुड़ी हुई थी। देश और मुसलमानों से जुड़े अहम मुद्दों में उनकी राय बहुत मायने रखती थी। उनके प्रशंसकों में सिर्फ मुसलमान ही नहीं सभी धर्मों के लोग शामिल हैं।
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पिछले दिनों उनके निधन पर एएमयू के कुलपति प्रोफेसर तारिक मंसूर ने गहरा दुख जताया था। कुलपति ने उस समय कहा था कि यह उनके लिए बेहद गर्व की बात थी मौलाना कल्बे सादिक उन्हें व्यक्तिगत रूप से जानते थे। उनके निधन से जो शून्य पैदा हुआ है उसको भर पाना असंभव है। मौलाना कल्बे सादिक के विषय में बताते हुए डॉ. राहत अबरार कहते हैं कि आधुनिक शिक्षा के मौलाना कल्बे सादिक पैरोकार थे। लखनऊ में उन्होंने गरीब छात्रों की मदद के लिए एक ट्रस्ट भी बना रखा था। अलीगढ़ में भी स्कूल खोला।
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उनके संबोधन सरल उर्दू भाषा में होते थे। साथ ही वह अंग्रेजी में पेपर्स भी अपने साथ रखते थे। जिससे कि युवा पीढ़ी तक वह सहजता के साथ अपनी बात पहुंचा सकें।
उनकी सादगी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जो भी कोई उनको संबोधन के लिए बुलाता था तो वह देश के अंदर एसी थ्री टायर से यात्रा करते थे। हवाई यात्रा के लिए मना कर दिया करते थे । वह जितना कम से कम हो सके उतना ही खर्च किया करते। सरकार ने जो उनको पद्म सम्मान दिया है यह विश्वविद्यालय के लिए भी खुशी की बात है।
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