फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Aligarh News ›   एएमयू के इतिहास को समेटे 1.5 टन वजनी टाइम कैप्सूल जमीन के 30 फीट नीचे दफन आयोजित कार्यक्रम में कुलपति बोले जो लोग अतीत को याद नहीं रखते उन्हें इसके दोहराने का श्राप झेलना पड़ता है

एएमयू के इतिहास को समेटे 1.5 टन वजनी टाइम कैप्सूल जमीन के 30 फीट नीचे दफन आयोजित कार्यक्रम में कुलपति बोले जो लोग अतीत को याद नहीं रखते उन्हें इसके दोहराने का श्राप झेलना पड़ता है

Amarujala Local Bureau अमर उजाला लोकल ब्यूरो
Updated Wed, 27 Jan 2021 05:54 PM IST
विज्ञापन
एएमयू के इतिहास को समेटे 1.5 टन वजनी टाइम कैप्सूल जमीन के 30 फीट नीचे दफन


आयोजित कार्यक्रम में कुलपति बोले जो लोग अतीत को याद नहीं रखते उन्हें इसके दोहराने का श्राप झेलना पड़ता है
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के 100 वर्ष पूरे होने पर गणतंत्र दिवस के अवसर पर टाइम कैप्सूल को जमीन में उतारने के कार्यक्रम में मौजूद कुलपति प्रोफेसर तारिक मंसूर व अन्य अधिकारी - फोटो : Amar Ujala
अलीगढ़। गणतंत्र दिवस समारोह के अवसर पर अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष में विश्वविद्यालय के इतिहास और उपलब्धियों को संरक्षित करने के लिए ऐतिहासिक विक्टोरिया गेट के सामने एक टाइम कैप्सूल को जमीन में दफन किया गया।
विज्ञापन
इसके लिए एक विशेष कार्यक्रम आयोजित कर 1.5 टन वजन के टाइम कैप्सूल को 30 फीट जमीन की गहराई में दफन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रोफेसर तारिक मंसूर ने कहा कि यह टाइम कैप्सूल भविष्य की पीढ़ियों के लिए लाभदायक साबित होगा। इसमें एएमयू के गौरवशाली इतिहास को संरक्षित किया गया है। इसमें रखे गए दस्तावेज को आधुनिक वैज्ञानिक तरीकों से संरक्षित किया गया है। कैप्सूल में रखी गई सामग्री को एसिड मुक्त और रसायन विहीन कागज पर तैयार किया गया है। कुलपति ने कहा कि इतिहास परंपराओं के आचरण में आने के साथ शुरू होता है। अतीत की आदतों और भविष्य के लिए किए गए पाठ का अर्थ ही परंपरा है। जो लोग अतीत हो याद नहीं रखते उन्हें इसे दोहराने का श्राप झेलना पड़ता है। टाइम कैप्सूल को 500 वर्ष तक की अवधि तक सुरक्षित रखने के लिए तैयार किया गया है। कार्यक्रम का संचालन रजिस्ट्रार अब्दुल हमीद आईपीएस ने किया।
विज्ञापन
क्या है इस टाइम कैप्सूल में -उच्च टेम्पर्ड स्टील से निर्मित इस टाइम कैप्सूल में खलीक अहमद निजामी का सर सैयद एल्बम, 1875 से 1919 तक - मोहम्मद एंग्लो-ओरिएंटल कालिज, अलीगढ़ से संबंधित लेख और भाषण (नवाब मोहसिन उल मुल्क द्वारा संकलित) - थ्योडोर मॉरिसन द्वारा एमएओ कालेज का इतिहास - जीएफआई ग्राहम द्वारा सैयद अहमद खान का जीवन और कार्य - प्रोफेसर शान मोहम्मद द्वारा भारत में मुस्लिम शिक्षा की झलक - खंड 1 व 2 - 1920 के अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय अधिनियम तथा विश्वविद्यालय के कानून - प्रोफेसर केए निजामी द्वारा सैयद अहमद खान की आत्मकथा - प्रोफेसर मोहम्मद आसिम सिद्दीकी और डा. राहत अबरार द्वारा संकलित जहान-ए-सैयद - अल्ताफ हुसैन हाली द्वारा हयात-ए-जावेद (उर्दू) - प्रोफेसर रफी अहमद अलवी द्वारा हयात-ए-जावेद (अंग्रेजी) - डा. राजीव लोचन नाथ शुक्ल द्वारा हयात-ए-जावेद (हिंदी) - एस के भटनागर द्वारा एमएओ कालिज का इतिहास - डा. एपीजे अब्दुल कलाम का दीक्षांत भाषण -एएमयू के दीक्षांत समारोह (1922-2018) - मोहम्मडन एंग्लो-ओरिएंटल कालेज कैलेंडर (1911-1912) - अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय कैलेंडर (1932) -एएमयू डायरी -2020 - 28 अक्टूबर, 2018 को कार्टोसैट-2 द्वारा ली गई अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय परिसर की सैटेलाइट तस्वीर - एएमयू के कुलाधिपतियों और कुलपतियों की सूची -एएमयू का कालानुक्रमिक इतिहास (1920-2020) -22 दिसंबर 2020 को शताब्दी समारोह में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जारी डाक टिकट, भाषण - टाइम कैप्सूल की सामग्री सूची तथा प्रगति कार्य का विवरण 142 साल पहले दफन किए कैप्सूल को निकालने के लिए समिति गठित अलीगढ़। कुलपति प्रोफेसर तारिक मंसूर ने बताया कि 8 जनवरी 1877 को एमएओ कालेज की आधार शिला रखते समय उस समय के वायसराय तथा गवर्नर जनरल लार्ड लिटन द्वारा दफन किये गये कैप्सूल को बाहर निकालने संबन्धित तौर-तरीकों पर विचार विमर्श के लिये एक समिति का गठन किया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
कौन-कौन है टाइम कैप्सूल समिति के सदस्यों में समिति में एएमयू के रजिस्ट्रार अब्दुल हमीद आईपीएस, मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के अध्यक्ष प्रो. मिर्जा फैसल एस बेग, इतिहास विभाग के प्रो. एमके पुंडीर, डॉ. राहत अबरार, विश्वविद्यालय के इंजीनियर राजीव कुमार शर्मा, सर सैयद एकेडमी के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. मोहम्मद शाहिद, इतिहास विभाग के अध्यक्ष प्रो. इशरत आलम, विश्वविद्यालय के लाइब्रेरियन डॉ. मोहम्मद यूसुफ, कंप्यूटर विज्ञान विभाग के डॉ. मोहम्मद नदीम, संग्रहालय विज्ञान विभाग के डॉ. मोहम्मद इरफान, रिमोट सेंसिंग और जीआईएस एप्लीकेशन विभाग के डॉ. रिजवान अहमद, कंप्यूटर सेंटर के डायरेक्टर डॉ. परवेज महमूद, आईआईटी कानपुर के फूलचंद गौड़ शामिल हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed