शी जिनपिंग को अमेरिका ने दिया झटका, इन टेक कंपनियों पर लगाया बैन

प्रदीप पाण्डेय
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीप्रदीप पाण्डेय
Sat, 26 Nov 2022 03:21 PM IST
सार

अमेरिकी कमीशन के मुताबिक इन कंपनियों की डिवाइस से राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा है। एफसीसी के पांचों सदस्यों ने एकमत होकर वोट देते हुए कहा कि इन कंपनियों के प्रोडक्ट की बिक्री और आयात पर प्रतिबंध लगाया जाए। यह बैन चिप की किल्लत को और गहरा करेगा।

US bans Chinese tech equipment sales over security risk
zte huawei ban in US - फोटो : अमर उजाला

    विस्तार

    चीन की दिग्गज टेक कंपनियों पर अमेरिका ने हथौड़ा चलाया है। अमेरिकी संचार आयोग (एफसीसी) ने चीन की हुवावे और जेडटीई कंपनी द्वारा बनाए गए संचार उपकरणों की बिक्री और आयात पर पाबंदी लगाई है। एफसीसी ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए कुछ चीन निर्मित वीडियो प्रणालियों के इस्तेमाल पर ‘अस्वीकार्य जोखिम’ करार देते हुए प्रतिबंध लगाया है।

    अमेरिका में पांच सदस्यीय संघीय संचार आयोग (एफसीसी) ने नए नियमों पर सर्वसम्मति से मतदान किया। इसके तहत अमेरिका के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे के लिए सुरक्षा खतरा पैदा करने वाले कुछ तकनीकी उत्पादों के आयात और बिक्री को रोक दिया जाएगा।

    चीनी प्रौद्योगिकी के अमेरिकी प्रतिबंधों की कड़ी में यह ताजा मामला है, जो पूर्ववर्ती ट्रंप प्रशासन में शुरू हुई थी। एफसीसी की अध्यक्ष जेसिका रोसेनवर्सेल ने कहा, गैर-भरोसेमंद संचार उपकरण हमारी सीमाओं के भीतर इस्तेमाल के लिए अधिकृत नहीं हैं।

    हुवावे कंपनी ने इस संबंध में फिलहाल कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है। एफसीसी के इस कदम से हुवावे और जेडटीई के अलावा व्यापक रूप से इस्तेमाल किए जाने वाले वीडियो निगरानी कैमरों के निर्माता हिकविजन, हाईटेरा और दहुआ जैसी कंपनियों के उत्पाद भी प्रभावित होंगे।

    अमेरिकियों की जासूसी में तकनीकी कंपनियों के इस्तेमाल की आशंका ज्यादा

    अमेरिका में लिए गए इस फैसले का अर्थ है कि अब हुवावे, जेडटीई, हिकविजन, हाईटेरा और दहुआ कंपनियां न तो चीन से माल मंगवाकर अमेरिका में बेच सकती हैं और न ही इनके उत्पादों को देश में बिक्री की मंजूरी मिलेगी। अमेरिका को आशंका है कि बीजिंग अमेरिकियों की जासूसी करने के लिए चीनी तकनीकी कंपनियों का इस्तेमाल कर सकता है।

    बिगड़ते जा रहे अमेरिका-चीन के रिश्ते

    चीन की दिग्गज टेक कंपनियों पर अमेरिका ने ऐसे वक्त में हथौड़ा चलाया है, जब चीन के साथ उसके संबंध और भी अधिक बिगड़ते जा रहे हैं। हालांकि दोनों देशों के राष्ट्रपतियों ने हाल ही में मिलकर कारोबार पर दोनों के रिश्ते आगे बढ़ाने पर बात की थी।

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