toolkit अपलोड करने वाले का IP एड्रेस गूगल से मांगेगी दिल्ली पुलिस, खुलेंगे कई राज

प्रदीप पाण्डेय
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीप्रदीप पाण्डेय
Fri, 05 Feb 2021 12:09 PM IST
Delhi Police to write to Google to get the IP address and location from where the toolkit doc was made and uploaded on social media platform
दिल्ली पुलिस (For Demo) - फोटो : ANI

    किसान आंदोलन को लेकर सोशल मीडिया पर अपलोड हुए टूलकिट का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। दिल्ली पुलिस गूगल से उस आईपी एड्रेस और लोकेशन की जानकारी मांगने जा रही है जहां से पहली बार टूलकिट को गूगल डॉक्स पर अपलोड किया गया था। इसकी जानकारी दिल्ली पुलिस के सूत्रों से मिली है। आईपी एड्रेस और लोकेशन के जरिए उस शख्स को ढूंढ़ने में मदद मिलेगी जिसने टूलकिट को तैयार किया और गूगल डॉक्स पर अपलोड किया।

    दिल्ली पुलिस ने ग्रेटा थनबर्ग द्वारा शेयर किए गए टूलकिट के लेखक के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। दिल्ली पुलिस के स्पेशल सीपी क्राइम प्रवीर रंजन ने 26 जनवरी के दिन हुई हिंसा को सुनियोजित साजिश भी बताया। साथ ही ये भी कहा कि एफआईआर टूलकिट के लेखक के खिलाफ दर्ज की गई है, ना कि ग्रेट थनबर्ग के खिलाफ। बता दें कि पहले सोशल मीडिया पर अफवाह उड़ी थी कि एफआईआर ग्रेटा थनबर्ग के खिलाफ हुई है।

    बता दें कि स्वीडन की ग्रेटा थनबर्ग ने गुरुवार को ट्वीट कर कहा, 'मैं अभी भी किसानों के साथ खड़ी हूं और उनके शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन का समर्थन करती हूं। नफरत, धमकी या मानवाधिकारों के उल्लंघन की किसी भी कोशिश से यह नहीं बदलेगा।'

    इससे पहले बुधवार को ग्रेटा ने एक खबर का लिंक साझा किया था और कहा था, 'हम भारत में किसान आंदोलन के साथ एकजुटता से खड़े हैं।' इसके साथ ही उन्होंने ट्विटर पर एक टूलकिट साझा की थी। यह टूलकिट यूजर्स को प्रदर्शन के समर्थन के तरीकों की विस्तृत जानकारी वाले दस्तावेज तक पहुंच उपलब्ध करवा रहा था। हालांकि बाद में उन्होंने टूलकिट वाले ट्वीट को डिलीट कर दिया और फिर एक अन्य टूलकिट जारी किया।

    कौन हैं ग्रेटा थनबर्ग

    ग्रेटा थनबर्ग एक पर्यावरण कार्यकर्ता हैं। उन्हें जलवायु संकट के खिलाफ लड़ाई में सबसे अग्रणी वक्ता के तौर पर जाना जाता है। कई बार अपने भाषणों से ग्रेटा ने लोगों का दिल जीता है। इसके अलावा अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ ट्विटर वॉर को लेकर वह सुर्खियों में रही थीं। दिसंबर 2020 में उन्हें प्रतिष्ठित टाइम मैग्जीन ने 2019 का 'पर्सन ऑफ द ईयर' चुना था। वे जलवायु को लेकर केवल नीति बनाने और काम न करने वाली हर सरकारों की आलोचना करती हैं।

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