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वेटलिफ्टर बिंदिया की कहानी: मां खुद भूखी रहीं पर बेटी की हर जरूरत पूरी की, सब्जी बेच बेटी को बनाया विश्व चैंपियन
Sun, 12 Dec 2021 11:09 PM IST
शक्तिराज सिंह
हेमंत रस्तोगी, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेमंत रस्तोगी, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शक्तिराज सिंह
Updated Sun, 12 Dec 2021 11:09 PM IST
सार
मणिपुर की वेटलिफ्टर बिंदिया की मां ने खुद भूखी रहकर बेटी की हर जरूरत पूरी की और उसे विश्व चैंपियन बनाया। अब बिंदिया को उम्मीद है कि विश्व खिताब उन्हें नौकरी दिला देगा और वो अपनी मां की सेवा कर पाएंगी।
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वेटलिफ्टिंग
विस्तार
वेटलिफ्टर बिंदिया ने जब से क्लीन एंड जर्क का विश्व खिताब जीता है उनकी जुबां पर मां इबेमचा लेमा का ही नाम है। हो भी क्यों नहीं यह बिंदिया की मां ही हैं जिन्होंने इंफाल के साथ लगते बाजार में सब्जियां बेचकर बेटी के विश्व चैंपियन बनने का रास्ता तैयार किया। वह खुद भूखी रहीं लेकिन वेटलिफ्टिंग जैसे खेल के लिए जरूरी बिंदिया की हर खुराक को पूरा किया। बिंदिया को उम्मीद है कि यह विश्व खिताब उन्हें एक अदद नौकरी जरूर दिलाएगा और तब वह अपनी मां को आराम से घर पर बिठाकर उनकी सेवा करेंगी।
बेहद गरीबी के बावजूद बिंदिया को आगे बढ़ाया
सही मायनों में ताशकंद (उजबेकिस्तान) में तीन दिन पूर्व 55 किलो में क्लीन एंड जर्क में विश्व चैंपियन बनने पर बिंदिया को अब तक विश्वास नहीं है। वह अमर उजाला से खुलासा करती हैं कि यह उनकी मां और कोच रंजन सिंह हैं जिनके चलते आज वह यहां तक पहुंच पाईं। बिंदिया का एक भाई और तीन बहनें हैं। पिता कुछ नहीं करते हैं। एक बहन की शादी हो चुकी है और एक अस्पताल में काम करती है। हालांकि बेहद गरीबी के बावजूद पूरे परिवार ने उन्हें वेटलिफ्टिंग में आगे बढ़ाने का काम किया।
ताईक्वांडों में हैं ब्लैक बेल्ट देश के लिए जीता है पदक
सच्चाई यह है कि बिंदिया ताईक्वांडो में ब्लैक बेल्ट हासिल कर चुकी हैं। यही नहीं उन्होंने 2012 में शिलांग में हुए एक अंतरराष्ट्रीय ताईक्वांडो टूर्नामेंट में देश के लिए 42 किलो भार में कांस्य पदक भी जीता। लेकिन बिंदिया की लंबाई काफी कम है। उनके साथी खिलाड़ी कहने लगे कि लंबाई के चलते उनका इस खेल में दूर तक जाना संभव नहीं है। साथियों की बात पर ही उन्होंने ताईक्वांडो छोडने का मन बनाया।
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कुंजारानी से प्रभावित हो अपनाई वेटलिफ्टिंग
बिंदिया के अनुसार उन्होंने बचपन में पढ़ाई के दौरान वेटलिफ्टिर कुंजारानी देवी के बारे में पढ़ा था। वह भी कम लंबाई की थीं। तब उन्होंने वेटलिफंर्टग करने केबारे में सोचा। 2012 में एक दिन साइकिल से वह इंफाल के साई सेंटर पहुंच गईं। वहां उनकी मुलाकात कोच रंजन सिंह से हुई। उन्होंने कहा कि वह लिफ्टिंग करना चाहती हैं। रंजन ने उन्हें ट्रेनिंग शुरू करा दी। इसके बाद उन्होंने 2019 में दक्षिण एशियाई खेलों में स्वर्ण जीता। विश्व चैंपियनशिप सीनियर में उनका दूसरा अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट है। चीफ कोच विजय शर्मा के मुताबिक बिंदिया क्लीन एंड जर्क में काफी मजबूत हैं। वह आने वाले दिनों में काफी सुधार करेंगी और बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों में उनसे और अच्छा प्रदर्शन देखने को मिलेगा।
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बेहद गरीबी के बावजूद बिंदिया को आगे बढ़ाया
सही मायनों में ताशकंद (उजबेकिस्तान) में तीन दिन पूर्व 55 किलो में क्लीन एंड जर्क में विश्व चैंपियन बनने पर बिंदिया को अब तक विश्वास नहीं है। वह अमर उजाला से खुलासा करती हैं कि यह उनकी मां और कोच रंजन सिंह हैं जिनके चलते आज वह यहां तक पहुंच पाईं। बिंदिया का एक भाई और तीन बहनें हैं। पिता कुछ नहीं करते हैं। एक बहन की शादी हो चुकी है और एक अस्पताल में काम करती है। हालांकि बेहद गरीबी के बावजूद पूरे परिवार ने उन्हें वेटलिफ्टिंग में आगे बढ़ाने का काम किया।
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ताईक्वांडों में हैं ब्लैक बेल्ट देश के लिए जीता है पदक
सच्चाई यह है कि बिंदिया ताईक्वांडो में ब्लैक बेल्ट हासिल कर चुकी हैं। यही नहीं उन्होंने 2012 में शिलांग में हुए एक अंतरराष्ट्रीय ताईक्वांडो टूर्नामेंट में देश के लिए 42 किलो भार में कांस्य पदक भी जीता। लेकिन बिंदिया की लंबाई काफी कम है। उनके साथी खिलाड़ी कहने लगे कि लंबाई के चलते उनका इस खेल में दूर तक जाना संभव नहीं है। साथियों की बात पर ही उन्होंने ताईक्वांडो छोडने का मन बनाया।
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कुंजारानी से प्रभावित हो अपनाई वेटलिफ्टिंग
बिंदिया के अनुसार उन्होंने बचपन में पढ़ाई के दौरान वेटलिफ्टिर कुंजारानी देवी के बारे में पढ़ा था। वह भी कम लंबाई की थीं। तब उन्होंने वेटलिफंर्टग करने केबारे में सोचा। 2012 में एक दिन साइकिल से वह इंफाल के साई सेंटर पहुंच गईं। वहां उनकी मुलाकात कोच रंजन सिंह से हुई। उन्होंने कहा कि वह लिफ्टिंग करना चाहती हैं। रंजन ने उन्हें ट्रेनिंग शुरू करा दी। इसके बाद उन्होंने 2019 में दक्षिण एशियाई खेलों में स्वर्ण जीता। विश्व चैंपियनशिप सीनियर में उनका दूसरा अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट है। चीफ कोच विजय शर्मा के मुताबिक बिंदिया क्लीन एंड जर्क में काफी मजबूत हैं। वह आने वाले दिनों में काफी सुधार करेंगी और बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों में उनसे और अच्छा प्रदर्शन देखने को मिलेगा।