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सरिता के इनकार से आयोजक नाराज, AIBA ने शुरू की जांच
अमर उजाला, दिल्ली
Updated Thu, 02 Oct 2014 12:53 PM IST
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मुक्केबाज सरिता देवी के पदक लौटाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। आईबा ने घटनाक्रम के खिलाफ न सिर्फ जांच शुरू की है, बल्कि टूर्नामेंट के टेक्निकल डेलीगेट डेविड फ्रांसिस ने मामले की रिपोर्ट ओलंपिक काउंसिल ऑफ एशिया को सौंपते हुए सरिता के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा है।
इसके लिए फ्रांसिस ने ओलंपिक मूवमेंट और खेल भावना का हवाला दिया है। लेकिन फ्रांसिस यह भूल गए कि किस तरह खेल भावना तार-तार कर सरिता को सरेआम हराया गया।
अमेचयोर इंटरनेशनल बॉक्सिंग एसोसिएशन (AIBA) ने अपना फैसला एशियाई खेलों के बाद सुनाने को कहा है। पदक लेने से इनकार करने पर सरिता को इसी सजा भी मिल सकती है। अगर वह अनुशासन तोड़ने की दोषी पाई गई तो उन्हें सजा या जुर्माना मिल सकता है।
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इसके लिए फ्रांसिस ने ओलंपिक मूवमेंट और खेल भावना का हवाला दिया है। लेकिन फ्रांसिस यह भूल गए कि किस तरह खेल भावना तार-तार कर सरिता को सरेआम हराया गया।
अमेचयोर इंटरनेशनल बॉक्सिंग एसोसिएशन (AIBA) ने अपना फैसला एशियाई खेलों के बाद सुनाने को कहा है। पदक लेने से इनकार करने पर सरिता को इसी सजा भी मिल सकती है। अगर वह अनुशासन तोड़ने की दोषी पाई गई तो उन्हें सजा या जुर्माना मिल सकता है।
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आयोजकों ने विवाद में राजनीति को घसीटा
टूर्नामेंट के टेक्निकल डेलीगेट डेविड फ्रांसिस ने कहा है कि यह घटनाक्रम पहले से तैयार था। इसमें पूरी भारतीय टीम शामिल थी। सरिता देवी के प्रोटेस्ट को भी गलत बताया गया है।
आईबा ने बयान में कहा है कि भारतीय टीम अच्छी तरह जानती थी कि जजों के निर्णय को चुनौती नहीं दी जा सकती है। बावजूद इसके प्रोटेस्ट किया गया। यही नहीं इस मामले में आईओए और बॉक्सिंग इंडिया को लेकर राजनीति शुरू हो गई है।
आईबा ने कहा है कि भारतीय टीम उनकी ओर से गठित बॉक्सिंग इंडिया ने नहीं आईओए की एडहॉक कमेटी ने चयनित की। घटनाक्रम घटित होने का कारण भी यही है।
आईबा ने बयान में कहा है कि भारतीय टीम अच्छी तरह जानती थी कि जजों के निर्णय को चुनौती नहीं दी जा सकती है। बावजूद इसके प्रोटेस्ट किया गया। यही नहीं इस मामले में आईओए और बॉक्सिंग इंडिया को लेकर राजनीति शुरू हो गई है।
आईबा ने कहा है कि भारतीय टीम उनकी ओर से गठित बॉक्सिंग इंडिया ने नहीं आईओए की एडहॉक कमेटी ने चयनित की। घटनाक्रम घटित होने का कारण भी यही है।
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पहले भी विवादों में रहा है मेजबान कोरिया
कोरिया का इतिहास बॉक्सिंग में साफ सुथरा नहीं रहा है। 1986 के सियोल एशियाड में सभी 12 वर्गों के गोल्ड मेजबान दक्षिण कोरिया के खाते में आए थे।
उस वक्त भारत के चार बॉक्सर जयपाल सिंह, साहू बिराजदार, दलजीत सिंह और सिरी जयराम फाइनल में पहुंचे थे और सभी हारे। 1988 के सियोल ओलंपिक में वर्तमान कोरियाई कोच पार्क जी सुन को अमेरिकी राय जोंस के खिलाफ जिताया गया।
कुछ साल बाद आईओसी ने मामले की जांच में सभी जजों को आजीवन प्रतिबंधित किया था।
उस वक्त भारत के चार बॉक्सर जयपाल सिंह, साहू बिराजदार, दलजीत सिंह और सिरी जयराम फाइनल में पहुंचे थे और सभी हारे। 1988 के सियोल ओलंपिक में वर्तमान कोरियाई कोच पार्क जी सुन को अमेरिकी राय जोंस के खिलाफ जिताया गया।
कुछ साल बाद आईओसी ने मामले की जांच में सभी जजों को आजीवन प्रतिबंधित किया था।