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Devendra Jhajharia: पैरालंपिक खिलाड़ी देवेंद्र ने सुनाई संघर्ष की दास्तां, बोले- मेरी मां के गहने बिक गए थे..

Sun, 04 Aug 2024 07:41 PM IST
Mayank Tripathi स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Mayank Tripathi Updated Sun, 04 Aug 2024 07:41 PM IST
सार

अमर उजाला के खास कार्यक्रम में बात करते हुए देवेंद्र ने अपने संघर्ष की दास्तां साझा की। उन्होंने बताया कि 2004 में एथेंस ओलंपिक के लिए चयन के दौरान तत्कालीन सरकार ने कोई आर्थिक सहायता नहीं की थी।

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Paralympic player Devendra jhajharia narrated the story of his struggle, said- my mothers jewelry was sold
देवेंद्र झाझरिया - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भारतीय पैरालंपिक खिलाड़ी देवेंद्र झाझरिया रविवार को अमर उजाला के खास कार्यक्रम संवाद में पहुंचे। इस दौरान उन्होंने अपने संघर्ष की कहानी साझा की। झाझरिया पैरालंपिक में दो स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले भारतीय हैं। देवेंद्र पद्मभूषण पुरस्कार पाने वाले देश के पहले पैरा एथलीट हैं। झाझरिया ने तीन ओलंपिक में देश को मेडल दिलाया है। उनके इस शानदार प्रदर्शन की बदौलत ही उन्हें पद्मभूषण से सम्मानित किया गया है। झाझरिया राजस्थान के पहले खिलाड़ी हैं, जिन्हें यह अवार्ड दिया गया है। उन्होंने पिछले साल टोक्यो पैरालिंपिक में सिल्वर मेडल जीता था। इससे पहले एथेंस 2004 और रियो 2016 के पैरा ओलंपिक खेलों में देवेंद्र देश के लिए स्वर्ण पदक जीत चुके हैं।
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देवेंद्र ने सुनाई संघर्ष की कहानी
अमर उजाला के खास कार्यक्रम में बात करते हुए देवेंद्र ने अपने संघर्ष की दास्तां साझा की। उन्होंने बताया कि 2004 में एथेंस ओलंपिक के लिए चयन के दौरान तत्कालीन सरकार ने कोई आर्थिक सहायता नहीं की थी। उनके पिता ने खिलाड़ी की मां के गहने बेचकर उन्हें ओलंपिक में भेजा था। 
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झाझरिया ने कहा, "ज्यादा लड़ाई मैंने सिस्टम से लड़ी है। 2004 में एथेंस पैरालंपिक खेलों के लिए चयन हुआ तो सरकार ने एक पैसा नहीं दिया। मेरे पिताजी किसान थे, लेकिन उनका हौसला काफी बड़ा था। मेरे हाथ में सेलेक्शन लेटर था और उसमें लिखा था कि आप एक लाख रुपये जमा करवाओगे तभी एडमिशन ले पाओगे। जब मैं गोल्ड मेडल जीतकर वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाकर घर पर आया तो उसके बाद पता चला कि मेरे पिताजी ने मां के गहने बेचकर एक लाख रुपये जमाकर मुझे ओलंपिक में भेजा था। तो कहीं न कहीं वो दर्द आज भी अंदर है। एक खिलाड़ी को उसकी मां के गहने बिक जाते हैं और वह इस देश के लिए वर्ल्ड रिकॉर्ड के साथ गोल्ड जीतकर लाता है और उसकी मदद नहीं हो पाती है तो इससे ज्यादा मुश्किल और क्या हो सकता है।"
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पीएम से किया था यह वादा
इस दौरान देवेंद्र ने पीएम मोदी से किए गए वादे का भी जिक्र किया। उन्होंने पुराना किस्सा साझा करते हुए बताया कि पीएम ने उनसे बेटी को स्टैच्यु ऑफ यूनिटी दिखाकर लाने का आदेश दिया था। झाझरिया ने कहा, "पीएम ने बेटी से कहा कि क्या कभी स्टैच्यू ऑफ यूनिटी गए हो, पापा कभी लेकर गए? तो मेरी बेटी ने कहा कि नहीं पापा खेलते रहते हैं तो कभी नहीं ले जा पाए। उनके पास टाइम नहीं रहता। तो मुझे पीएम ने कहा- देवेंद्र जी इन्हें स्टैच्यू ऑफ यूनिटी घुमा के लाना है इन सभी को। तो मैंने कहा ठीक है। फिर जब मैं पैरलंपिक में मेडल जीतकर लौटा तो पीएम से मिला तो उन्होंने मुझसे पूछा बेटी जिया के क्या हाल हैं। मेरा काम कर दिया आपने? मैंने कहा हां बेटी को घुमा दिया है।


देवेंद्र की उपलब्धियां
भारत सरकार द्वारा खेल उपलब्धियों के लिए देवेंद्र को खेल जगत का सर्वोच्च मेजर ध्यान चंद खेल रत्न पुरस्कार दिया गया। इससे पूर्व उन्हें पद्मश्री पुरस्कार, स्पेशल स्पोर्ट्स अवार्ड (2004), अर्जुन अवार्ड (2005), राजस्थान खेल रत्न, महाराणा प्रताप पुरस्कार (2005), मेवाड़ फाउंडेशन के प्रतिष्ठित अरावली सम्मान (2009) सहित अनेक इनाम-इकराम मिल चुके हैं। वे खेलों से जुड़ी विभिन्न समितियों के सदस्य रह चुके हैं। 
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