वर्ल्ड आर्चरी ने प्रतिबंध हटाने से किया इनकार, तिरंगे तले नहीं खेल पाएंगे भारतीय तीरंदाज
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खेल संघों की राजनीति के चलते एक बार फिर शर्मसार होना पड़ेगा। 19 अक्तूबर से बैंकाक में शुरू होने जा रही टोक्यो पैरालंपिक क्वालिफाइंग एशियाई पैरा तीरंदाजी में भारतीय तीरंदाजों को तिरंगे तले नहीं खेलने दिया जाएगा। भारतीय तीरंदाज देश के झंडे के बजाय वर्ल्ड आर्चरी के झंडे तले खेलेंगे। वर्ल्ड आर्चरी ने अदालत की ओर से बिठाई गई अस्थाई कमेटी की प्रार्थना को अस्वीकार कर दिया है।
कमेटी ने वर्ल्ड आर्चरी से गुहार लगाई थी कि भारतीय तीरंदाजी पर लगाए प्रतिबंध को हटाया जाए और पैरा एशियाई तीरंदाजी में भारतीय तीरंदाजों को देश के झंडे तले खेलने की अनुमति दी जाए।
पहले चुनाव की करें घोषणा तब हटेगा प्रतिबंध
अस्थाई कमेटी को वर्ल्ड आर्चरी ने जवाब दिया कि प्रतिबंध का फैसला कार्यकारिणी ने लिया है। इसे बदला नहीं जा सकता है। अगर अस्थाई कमेटी की ओर से भारतीय तीरंदाजी संघ (एएआई) के चुनाव की घोषणा की जाती है तो वर्ल्ड आर्चरी प्रतिबंध को हटा लेगी। हालांकि वर्ल्ड आर्चरी ने अस्थाई कमेटी को मान्यता दे दी है।
वर्ल्ड आर्चरी ने एएआई के चुनाव नहीं कराने पर जुलाई माह में उस पर प्रतिबंध लगा दिया था। साथ ही कहा था कि अगर जल्द चुनाव नहीं कराए गए तो पैरा एशियाई और ओलंपिक क्वालिफाइंग एशियाई चैंपियनशिप में भारतीय तीरंदाजों को उनके देश के झंडे तले नहीं खेलने दिया जाएगा। अस्थाई कमेटी को उम्मीद थी कि उनके अस्तित्व में आने के बाद यह प्रतिबंध हटा लिया जाएगा और तीरंदाजों को देश के झंडे तले खेलने की अनुमति दी जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
कोटा आईओए को दिया जाएगा
वर्ल्ड आर्चरी ने अस्थाई कमेटी को साफ किया है कि भारतीय तीरंदाज तिरंगे तले नहीं खेलेंगे, लेकिन उनकी ओर से पैरालंपिक या ओलंपिक के लिए क्वालिफाई किया जाता है तो यह कोटा नेशनल ओलंपिक कमेटी यानि आईओए को दिया जाएगा। कमेटी के सदस्यों का कहना है कि अदालत से जल्द चुनाव की गुहार लगाई जाएगी जिससे 21 नवंबर से होने वाली ओलंपिक क्वालिफाइंग एशियाई तीरंदाजी में तीरंदाज कम से कम देश के झंडे तले खेल सकें और शर्मिंदगी से बचा जा सके।
यह पहला मौका नहीं है जब खेल संघ पर अंतरराष्ट्रीय संघ की ओर से लगे प्रतिबंध के चलते भारतीय खिलाड़ियों को देश के झंडे तले खेलने से रोका जा रहा है। चार वर्ष पूर्व एक टूर्नामेंट में भारतीय बॉक्सरों को आईबा के झंडे तले खेलना पड़ा था।