फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Sports ›   Other Sports ›   Why Sakshi Chooses wresling as sports

रोहतक से रियो तकः क्यों शुरू की साक्षी ने पहलवानी

Fri, 02 Sep 2016 07:23 PM IST
टीम डिजिटल / अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल / अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 02 Sep 2016 07:23 PM IST
विज्ञापन
Why Sakshi Chooses wresling as sports
साक्षी मलिक - फोटो : getty
भारत के लिए रियो ओलंपिक में पहला ओलंपिक पदक जीतने वाली 23 वर्षीय साक्षी मलिक हरियाणा के रोहतक जिले की रहने वाली हैं। साक्षी के पहलवानी शुरु करने की कहानी बेहद रोचक है, आपको जानकर ताज्जुब होगा कि केवल पहलवानों की ड्रेस पसंद आने के कारण साक्षी ने पहलवानी को खेल के रुप में अपना लिया। साक्षी ने पहलवान बनने का सपना केवल इसलिए देखा क्योंकि उन्हें पहलवानों की ड्रेस अच्छी लगती थी। 
विज्ञापन


ड्रेस के लिए कुश्ती खेलने वाली साक्षी इतनी ऊंचाई तक पहुंचेगी, यह कभी उनके परिवार वालों ने भी नहीं सोचा था। कहीं भी बेटी को पहलवान बनाने में परिवार वाले थोड़ा हिचकते जरूर हैं, लेकिन साक्षी मलिक ने अपनी मां सुदेश के सामने खेलने की इच्छा जताई तो वे उसे लेकर रोहतक के छोटूराम स्टेडियम पहुंच गईं। 3 सितंबर 1992 को जन्मीं साक्षी ने मलिक मजह 12 साल की उम्र में कुश्ती शुरु कर दी थी। 
विज्ञापन


साक्षी मलिक जब बड़ी हो रही थीं तो लोग उनके परिवार को कहते थे कि बेटी को पहलवानी ना सिखाएं क्योंकि उससे उनके कान बड़े हो जाएंगे और फिर शादी नहीं होगी। पहलवानों में कान बड़े हो जाना आम बात है। 
विज्ञापन
विज्ञापन



जब साक्षी की मां उन्हें छोटूराम स्टेडियम लेकर पहुंचीं तो उन्हें वहां जिम्नास्टिक खेलने के लिए कहा गया, लेकिन साक्षी ने साफ इंकार कर दिया। फिर उनकी मां उन्हें दूसरे एथलीट व अन्य कई खेलों के खिलाड़ियों के पास ले गईं, सबसे आखिर में वह साक्षी को रेसलिंग हाल में लेकर पहुंची। वहां साक्षी को पहलवानों की ड्रेस अच्छी लगी तो उसने कुश्ती खेलने की इच्छा जताई। साक्षी की मां सुदेश बताती हैं कि उस समय साक्षी को पहलवानों की ड्रेस अच्छी लगी थी और उसने कहा था कि यह ड्रेस अच्छी है, इसलिए वह भी कुश्ती लड़ेगी। उस समय उनकी मां को लगा था कि बेटी की इच्छा है तो खेलने देते हैं, जब तक मन होगा खेलती रहेगी।



एक दिन साक्षी से उनकी मां ने कहा कि वह कोई भी काम करे उसे पूरी मेहनत से करे। चाहे पढ़ाई हो या कुश्ती। शायद उस दिन से साक्षी ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उसके बाद साक्षी ने बहुत छोटी उम्र में सब जूनियर एशियन चैंपियनशिप में गोल्ड जीता। उस समय परिवार को भी यह महसूस होने लगा कि उनकी बेटी ने सही खेल चुना है। इसके बाद राष्ट्रमंडल खेलों में रजत और अब रियो ओलंपिक में कांस्य पदक जीतकर साक्षी ने इतिहास रच दिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all Sports news in Hindi related to live update of Sports News, live scores and more cricket news etc. Stay updated with us for all breaking news from Sports and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed