फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Blog ›   When last time any middle order batsman guide India to victory and bagged man of the match award

याद कीजिए आखिरी बार कब मिडिल ऑर्डर ने दिलाई थी टीम इंडिया को जीत

Shivendra Kumar Singh शिवेंद्र कुमार सिंह
Updated Mon, 23 Dec 2019 05:07 PM IST
विज्ञापन
When last time any middle order batsman guide India to victory and bagged man of the match award
टीम इंडिया का मध्यक्रम - फोटो : सोशल मीडिया

भारतीय टीम ने वेस्टइंडीज को कटक वन-डे में चार विकेट से हराकर वनडे सीरीज पर कब्जा कर लिया। टी-20 सीरीज भी भारत के ही कब्जे में आई थी। इसलिए ये बात ताल ठोक कर कही जा सकती है कि वेस्टइंडीज के मुकाबले टीम इंडिया बीस पड़ती है, लेकिन जरा ठहरिए क्या ये दावा आप पूरी टीम इंडिया के लिए कर रहे हैं? क्योंकि अगर ये बात आप पूरी टीम के लिए कर रहे हैं तो आपके दावे कमजोर साबित हो सकते हैं। लिहाजा अगर आपको कहना ही है तो ये कहिए कि भारतीय टीम का टॉप ऑर्डर वेस्टइंडीज के मुकाबले बीस है। ये टॉप ऑर्डर की बनाई नींव है जिस पर टीम इंडिया जीत रही है।

विज्ञापन


अगर जीत दिलाने की जिम्मेदारी मिडिल ऑर्डर पर आ जाए तो हालत खराब हो जाती है। जैसा कटक वनडे में पूरी दुनिया ने देखा। 167 रन पर टीम इंडिया का दूसरा विकेट गिरा और फिर 228 रन तक पहुंचते-पहुंचते आधी टीम पवेलियन लौट चुकी थी।
विज्ञापन


श्रेयस अय्यर, ऋषभ पंत और केदार जाधव में से कोई भी बल्लेबाज दहाई के आंकड़े तक नहीं पहुंचा। वो भी तब जबकि टीम इंडिया के टॉप ऑर्डर ने 316 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए शानदार और मुफीद जीत दिलाई थी। इन परिस्थितियों में ये सवाल उठना लाजमी है कि आखिरी बार टीम इंडिया को मिडिल ऑर्डर के किसी बल्लेबाज ने कब जीत दिलाई थी? इस सवाल का जवाब ढूंढते हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

आखिरी बार मिडिल ऑर्डर में किसने दिलाई थी जीत

When last time any middle order batsman guide India to victory and bagged man of the match award
एमएस धोनी और केदार जाधव

साल 2019 में टीम इंडिया ने 28 मैच खेले। इसमें से 19 मैचों में उसे जीत मिली। 8 मैच में हार का सामना करना पड़ा जबकि एक मैच बेनतीजा रहा। इसमें घरेलू मैदान में खेले गए 8 मैचों में 4 जीत और 4 हार शामिल हैं। विदेशी पिचों पर खेले गए 12 में से 8 मैच भारत ने जीते। इसमें 13 मैच ऐसे हैं जिसमें टीम इंडिया ने पहले बल्लेबाजी की। इन 13 में से 10 मैचों में भारतीय टीम को जीत मिली। 2019 में 15 मैचों में टीम इंडिया ने लक्ष्य का पीछा किया। इसमें से 9 मैचों में उसे जीत मिली। जबकि पांच मैच में हार का सामना करना पड़ा। एक मैच का नतीजा नहीं निकला।

इन आंकड़ों के बाद अब आप याद कीजिए कि आखिरी बार वो कौन सा मैच था जिसमें टीम इंडिया के मिडिल ऑर्डर बल्लेबाज ने जीत दिलाई हो। आप दिमाग पर खूब जोर लगाकर भी शायद ही इस सवाल का जवाब खोज पाएंगे। क्योंकि मिडिल ऑर्डर के जिन दो खिलाड़ियों ने आखिरी बार जीत दिलाई थी उसमें से एक को तो टीम से ही बाहर कर दिया गया।

आपको याद दिला दें कि मार्च में भारतीय टीम ने ऑस्ट्रेलिया को हराया था। उस मैच में केदार जाधव ने 81 रन बनाकर टीम को जीत दिलाई थी। उस मैच में ऑस्ट्रेलिया ने भारत के सामने सिर्फ 237 रनों का लक्ष्य रखा था। इससे पहले फरवरी में भारत ने न्यूजीलैंड को हराया था जिसमें अंबाती रायडू ने 90 रन बनाए थे। इस बात को कहने का आधार ये है कि आखिरी बार मिडिल ऑर्डर में इन्हीं दो बल्लेबाजों को मैन ऑफ द मैच चुना गया है। बाकी मैचों में जीत दिलाने का श्रेय या तो टॉप ऑर्डर बल्लेबाजों को जाता है या फिर गेंदबाजों को।

यही है टीम इंडिया की सबसे बड़ी कमजोरी

When last time any middle order batsman guide India to victory and bagged man of the match award
रोहित, विराट और राहुल - फोटो : सोशल मीडिया

जीत के जोश में इस कमी पर चर्चा ही नहीं हो रही है। करीब करीब पिछले 10 महीने में एक भी मैच ऐसा नहीं है जिसमें मिडिल ऑर्डर के खिलाड़ी ने अपनी जिम्मेदारी सही तरीके से निभाई हो। 2019 विश्व कप में नाकामी के पीछे भी सबसे बड़ी वजह यही थी। जिसको लेकर हो-हल्ला भी हुआ था।

विराट कोहली और टीम मैनेजमेंट ने जिस स्ट्रेटजी के तहत अंबाती रायुडू को टीम से बाहर किया वो उलटी ही पड़ी। जिससे नाराज होकर उन्होंने संन्यास लेने का एलान भी कर दिया था। हालांकि बाद में रायुडू ने अपना फैसला बदला। बावजूद इसके सच यही है कि टीम इंडिया सिर्फ और सिर्फ अपने टॉप ऑर्डर बल्लेबाजों के दम पर जीत रही है। मिडिल ऑर्डर के बल्लेबाजों ने अगर किसी मैच में रन बनाए भी हैं तो उन रनों की रफ्तार ऐसी है जो जीत दिलाने के लिए नाकाफी है। वेस्टइंडीज के खिलाफ पहले वनडे में मिली हार इसी बात का सबूत है। वक्त रहते ये परेशानी अगर नहीं सुलझाई गई तो टॉप ऑर्डर पर बोझ बढ़ता ही रहेगा।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed