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आखिर क्या है फिट इंडिया मूवमेंट और क्यों पड़ी युवाओं के देश में ऐसे मुहिम की जरूरत?

Fri, 13 Sep 2019 07:58 AM IST
अंशुल तलमले स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला Published by: अंशुल तलमले Updated Fri, 13 Sep 2019 07:58 AM IST
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What is Fit India Movement and why our country need this type of practice
फिट इंडिया - फोटो : सोशल मीडिया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने दूसरे कार्यकाल में एक महत्वकांक्षी योजना शुरू की। 'हॉकी के जादूगर' मेजर ध्यानचंद के जन्मदिवस के मौके पर 'फिट इंडिया मूवमेंट' के साथ देशभर में स्वास्थ्य के प्रति जागरुकता के कार्यक्रम शुरू हुए। योग और स्वच्छता मिशन के बाद यह मिशन कितना हिट होगा और क्या देशवासी फिट होंगे ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा, लेकिन उसके पहले यह जान लेते हैं कि फिट इंडिया जैसे मूवमेंट की जरूरत क्यों है?

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बेहद बड़ा है फिटनेस का बाजार

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6248 अरब रुपए के वैश्विक फिटनेस बाजार में भारत की हिस्सेदारी 214 अरब रुपए की है। आने वाले कुछ वर्षों में इसके 18 फीसदी की दर से बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। वहीं देश में फिटनेस एंड वेलनेस स्टार्टप ने इस साल 88 अलग-अलग सौदों के जरिए 3639 करोड़ रुपए का फंड इकट्ठा किया है। मोदी सरकार ने फिट इंडिया मूवमेंट भी 2023 तक घोषित किया है। ऐसे में फिटनेस को लेकर जागरुकता होना स्वाभाविक है।

वहीं केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से वर्ष 2018 का नेशनल हेल्थ प्रोफाइल जारी किया गया, जिसके मुताबिक देश में बीमारियों के आंकड़े दुनिया के लिहाज से ज्यादा हैं। वर्ष 1990 से 2016 के बीच देश में गैर संक्रामक बीमारियां बढ़ने की दर 30 से 55 फीसदी रही। विभिन्न राज्यों में आंकड़े अलग अलग हैं, लेकिन महामारियों की बात की जाए तो गैर संक्रामक बीमारियां 48 से 75 फीसदी तक संक्रमणजनित और संबंधित बीमारियों के फैलने की दर 14 से 43 फीसदी है।

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214 अरब रुपए के बाजार वाले देश का फिटनेस रिपोर्ट कार्ड 

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कुपोषण - फोटो : PTI

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक भारत में कुपोषण को लेकर आंकड़े अब भी गंभीर हैं, जबकि वर्षों से इस दिशा में काफी कार्यक्रम चलाए जा चुके हैं। भारत में कुपोषण के दो रूप मुख्य हैं एनीमिया और शुरुआती विकास न होना यानी स्टंटिंग। पांच साल से कम उम्र के वर्ग में 37.9 फीसदी बच्चे देश में स्टंटिंग के शिकार हैं जबकि 20.81 फीसदी बच्चों को 'वेस्टेड' श्रेणी में रखा गया है यानी अति गंभीर अविकास। दूसरी ओर, देश में 17.8 फीसदी वयस्क पुरुष और 21.6 फीसदी वयस्क महिलाएं ओवरवेट हैं। देश में बच्चे को जन्म देने वाली 51.4 फीसदी महिलाएं ए नीमिया की शिकार हैं।

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युवाओं का पसंदीदा शहर ज्यादा फिट 

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एक सर्वे में युवाओं का सबसे पसंदीदा शहर रह चुका बेंगलुरु हेल्थ के मामले में भी अव्वल है। देश में स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर अग्रणी कंपनियों में से एक जीओक्यूआई ने एक सर्वे के आधार पर बताया कि बेंगलुरु देश का सबसे फिट शहर है। 'इंडिया फिट रिपोर्ट 2019' में इस सर्वे के अनुसार बताया गया कि दिल्ली इस सूची में दूसरे पायदान पर है। हालांकि सबसे सक्रिय शहरों की सूची में मुंबई ही नंबर वन है। 

ऐसा ही एक सर्वे वर्ष 2017 में एक मीडिया संस्थान ने कराया, जिसमें कहा गया था कि 70 फीसदी नियमित रूप से व्यायाम नहीं करते और 62.5 फीसदी कहते हैं कि वो अपने खानपान पर नजर नहीं रखते। 80 फीसदी युवाओं ने कहा था कि वो योग को गंभीरता से नहीं लेते।

60 से 70 फीसदी युवाओं ने माना था कि वो खाते वक्त उसकी क्वालिटी और सेहत पर असर को नजरअंदाज करते हैं। अगर ये दोनों सर्वे मान लिए जाएं तो महज दो सालों के दौरान ही भारतीय तेजी से फिटनेस फ्रीक हुए हैं।

ये सर्वे कुछ और कहता है 

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10,000 कदम सामान्य तौर पर लोगों को चलना चाहिए दिनभर में, यूजीसी के अनुसार। दो महीने पहले ही एक मार्केट इंटेलिजेंस कंपनी मिंटेल ने 3000 भारतीय वयस्कों को लेकर फिटनेस सर्वे किया, जिसके मुताबिक 64 फीसदी ने कहा कि वो कसरत नहीं करते, जिन लोगों ने कहा कि वो कसरत करते हैं, उनमें से 67 फीसदी ने माना कि उनका मतलब वॉक करने से रहा। ज्यादातर लोगों ने इस सर्वे में कहा कि कसरत करना चाहते हैं लेकिन 31 फीसदी ने बताया कि कसरत के लिए कामकाजी जीवन में समय नहीं मिल पाता।

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