नीरज और लवलीना ने रूस में हुए टूर्नामेंट में जड़ा गोल्डन पंच, भारत ने दो स्वर्ण सहित जीते छह पदक
लवलीना बोरगोहेन और नीरज ने रूस में चल रहे मागोमेड सलाम उमाखानोव स्मृति अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाजी टूर्नामेंट में स्वर्ण पदक जीता जबकि गौरव सोलंकी को रजत पदक से संतोष करना पड़ा। भारतीय मुक्केबाजों ने इस टूर्नामेंट में छह पदक जीते जिनमें दो स्वर्ण, एक रजत और तीन कांस्य पदक जीते।
एशियाई चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक विजेता पूजा रानी को मिडिलवेट (75 किलो) के सेमीफाइनल में रूस की अन्ना अनफिनोजिनोवा ने 3-2 से हराया। उन्हें कांस्य से ही संतोष करना पड़ा। गोविंद साहनी (49 किलो) और जानी (60 किलो) को भी कांस्य पदक मिले। गोविंद को रूस के कुर्बान बेरांबेकोव ने 4-1 से शिकस्त दी। जॉनी को रूस की नताल्या शादरिना ने इसी अंतर से हराया। लवलीना ने 69 किलो वर्ग में असुंता कैनफोरा को 3-2 से मात दी । इंडिया ओपन स्वर्ण पदक विजेता नीरज ने 57 किलोवर्ग में पूर्व विश्व चैंपियन अलेसिया मेसियानो को 3-0 से मात दी । गौरव सोलंकी को उजबेकिस्तान के अब्दुलखाय शाराखमातोव ने 5-0 से हराया ।
कुश्ती के परिवार से निकली बॉक्सिंग की स्टार
हरियाणा के चरखी दादरी की नीरज एक कुश्ती परिवार से है। उनके बड़े भाई हितेश पहलवान रह चुके हैं लेकिन उन्हें घुटने में चोट लग गई। उसके बाद वह पिता का खेती में हाथ बंटाने लगे। नीरज की मुक्केबाजी की शुरुआत सुखद संयोग थी जब गांव में सेना के एक कोच आए थे और उन्होंने लड़कियों को मुक्केबाजी के लिए प्रेरित किया। हितेश ने बहन को खिलाड़ी बनाने में बड़ी मदद की। वह नीरज को भिवानी लेकर आया और कैप्टन हवा सिंह अकादमी में प्रवेश दिलाया। किराये का मकान लिया। बहन के खान-पान से लेकर ट्रेनिंग तक की देखभाल की।