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सारलोलक्स ओपन में खेलने से रोके गए दोनों शटलरों को 10 नवंबर तक अपने खर्च पर एकांतवास में भेजा
Fri, 30 Oct 2020 06:27 AM IST
Jeet Kumar
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Jeet Kumar
Updated Fri, 30 Oct 2020 06:27 AM IST
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बैडमिंटन
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लक्ष्य सेन के पिता डीके सेन के कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद सारलोलक्स ओपन में जबरन खेलने से रोक दिए गए शटलर अजय जयराम और शुभंकर डे को उनके खुद के खर्च पर एकांतवास में भेज दिया गया है।
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सारलैंड (जर्मनी) के स्वास्थ्य विभाग ने लक्ष्य, अजय, शुभंकर और फीजियो अभिषेक को 10 नवंबर तक एकांतवास में रहने को कहा है, जबकि डीके सेन को छह नवंबर तक एकांतवास में रहना होगा। अजय और शुभंकर इस टूर्नामेंट में अपने खर्च पर खेलने गए थे। दोनों ने वल्र्ड बैडमिंटन फेडरेशन और साई से मदद की गुहार लगाई थी।
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साई ने मानवता के आधार पर दोनों शटलरों के रहने और खाने का खर्च उठाने का फैसला लिया है। साथ ही फ्रेंकफर्ट (जर्मनी) स्थित भारतीय दूतावास को भी उनकी मदद केलिए कहा है।
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होटल का खर्च नहीं उठा सकते बुलाया जाए भारत
शुभंकर ने सारलैंड से अमर उजाला से खुलासा किया कि पहले उनसे पूछा गया कि वह लक्ष्य के पिता के संपर्क में आए या नहीं। उनके हां में जवाब देने के बाद उन्हें टूर्नामेंट में खेलने से रोक दिया गया।
शुभंकर का कहना है कि उन्होंने 30 अक्तूबर तक होटल बुक कराया है। वह 10 नवंबर तक होटल में रुककर खर्च देने की स्थिति में नहीं हैं। उन्होंने बीडब्लूएफ और साई से मदद की गुहार लगाई। बीडब्लूएफ से तो कोई जवाब नहीं आया है, लेकिन साई ने मदद के लिए एक लाख 46 हजार रुपये जारी कर दिए।
शुभंकर का कहना है कि जब उनकी रिपोर्ट नेगेटिव है तो उनका जल्द से जल्द दूसरा टेस्ट कराकर उन्हें वापस भारत जाने दिया जाए। इससे पहले अजय जयराम ने भी इंस्टाग्राम पर मदद की गुहार लगाई।
दो दिन में शटलरों की नहीं ली गई सुध
दरअसल लक्ष्य उनकेपिता और फीजियो को टॉप्स की ओर से डेनमार्क, जर्मनी टूर्नामेंट खेलने भेजा गया था, जबकि शुभंकर, अजय समेत अन्य शटलर अपने खर्च पर गए थे। बीएआई ने इन सभी शटलरों से लिखित में ले लिया था कि वे सभी अपने जोखिम पर यह टूर्नामेंट खेलने जा रहा है। कुछ अनहोनी होने पर उनकी जिम्मेदारी नहीं होगी।
यही वजह है कि बीएआई ने अब तक इस मामले में चुप्पी साध रखी है। वहीं शटलरों और डीके सेन को होटल में एकांतवास में गए हुए दो दिन होने के बावजजूद किसी ने उनकी सुध नहीं ली।