टोक्यो ओलंपिक: किसी भी ब्रांड का प्रचार नहीं करेंगे भारतीय एथलीट, किट पर लिखा होगा सिर्फ 'भारत'
चीन की कंपनी ली निंग से नाता तोड़ने के बाद आईओए को अब नए प्रायोजक की तलाश है। भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) ने बुधवार को उम्मीद जताई कि वह इस महीने के आखिर तक अपने ओलंपिक दल के लिए नया किट प्रायोजन ढूंढने में सफल रहेगा।
विस्तार
खेल मंत्री किरेन रिजिजू ने बुधवार को कहा कि आगामी टोक्यो ओलंपिक में भारतीय एथलीट की किसी भी ब्रांड का प्रचार नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि भारतीय एथलीटों की किट पर सिर्फ 'भारत' लिखा होगा। बता दें कि टोक्यो ओलंपिक की शुरुआत 23 जुलाई से होगी। रिजिजू ने ट्वीट कर कहा, 'भारतीय एथलीट, कोच और सहयोगी स्टाफ टोक्यो ओलंपिक में कोई ब्रांडेड परिधान नहीं पहनेंगे। हमारे भारतीय एथलीटों की किट पर केवल 'भारत' लिखा होगा।'
Indian athletes, coaches and support staff, won't be wearing any branded apparel at Tokyo Olympics.
— Kiren Rijiju (@KirenRijiju) June 9, 2021
Only 'INDIA' will be written in the kits of our athletes. pic.twitter.com/L0mql1D96s
चीन की कंपनी ली निंग से नाता तोड़ने के बाद आईओए को अब नए प्रायोजक की तलाश है। भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) ने बुधवार को उम्मीद जताई कि वह इस महीने के आखिर तक अपने ओलंपिक दल के लिए नया किट प्रायोजन ढूंढने में सफल रहेगा। आईओए ने मंगलवार को ली निंग को अपने आधिकारिक किट प्रायोजक से हटाने के बाद कहा था कि भारतीय खिलाड़ी 23 जुलाई से आठ अगस्त के बीच होने वाले टोक्यो ओलंपिक खेलों में बिना ब्रांड वाली पोशाक पहनकर उतरेंगे।
वहीं, आईओए अध्यक्ष नरिंदर बत्रा ने कहा कि सीमित समय में नए प्रायोजक की तलाश जारी है। बत्रा ने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा, 'नए प्रायोजक की तलाश जारी है लेकिन हमारे पास बहुत कम समय है। हम किसी पर भी दबाव नहीं बनाना चाहते हैं और उन्हें दबाव में नहीं लाना चाहते हैं। यह आपसी सहमति से होना चाहिए।' उन्होंने कहा, 'इस महीने के आखिर तक हम फैसला कर लेंगे कि हमारे खिलाड़ी बिना ब्रांड वाली पोशाक पहनकर जाएंगे या नहीं। पोशाक तैयार हैं और उन्हें जल्द से जल्द हमारे खिलाड़ियों को सौंपना होगा। '
बता दें कि आईओए ने पिछले सप्ताह खेल मंत्री किरेन रिजिजू की मौजूदगी में ली निंग की डिजाइन की गई ओलंपिक किट का अनावरण किया था, जिसकी काफी आलोचना हुई थी क्योंकि पिछले साल लद्दाख में सैन्य संघर्ष के बाद चीनी कंपनियों का विरोध किया जा रहा है।