{"_id":"5a80604b4f1c1b8f268b955c","slug":"temp-kasrashvili-may-become-indian-wrestling-coach","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"ओलंपिक में दंडित जज होगा भारत का कोच, खेल मंत्रालय को भेजा गया नाम ","category":{"title":"Other Sports","title_hn":"अन्य खेल","slug":"other-sports"}}
ओलंपिक में दंडित जज होगा भारत का कोच, खेल मंत्रालय को भेजा गया नाम
अमर उजाला, हेमंत रस्तोगी, नई दिल्ली
Updated Sun, 11 Feb 2018 10:07 PM IST
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रियो ओलिंपिक
- फोटो : File
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भारतीय कुश्ती संघ की बीते डेढ़ सालों से जारी विदेशी कोच की खोज पूरी हो गई है, लेकिन यह तलाश ऐसे कोच पर जाकर रुकी है, जिसे रियो ओलंपिक में खराब जजिंग के लिए दंडित किया जा चुका है।
सोवियत संघ के लिए 1982 की वर्ल्ड चैंपियनशिप में ग्रीको रोमन के 48 किलो भार में स्वर्ण जीतने वाले जॉर्जियाई टीमो काजराशविली वही जज हैं, जिन्हें यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग (यूडब्लूडब्लू) ने रियो ओलंपिक के 65 किलो के क्वार्टर फाइनल में उजबेकिस्तानी पहलवान का पक्ष लेने पर सस्पेंड किया था। उनके साथ कोरियाई व रूसी जजों को भी आगे के मैचों में बाउट की ऑफिशिएटिंग से रोका गया था।
प्यूर्टो रिको के पहलवान फ्रैंकलिन गोमेज को यह मुकाबला चार की बजाय दो अंक देने के कारण उजबेकी नवरूजोव से हारना पड़ा था। इन तीनों जजों के सस्पेंशन को रियो ओलंपिक के दौरान काफी सुर्खियां मिली थी। यूडब्लूडब्लू को इसके बाद जजिंग और रेफरीशिप को सुधारने के लिए व्यापक कदम उठाने पड़े। ये वही नवरूजोव हैं, जिनके खिलाफ कांस्य पदक मुकाबले में खराब रेफरीशिप के लिए मंगोलियाई कोचों ने मैट पर ही अपने कपड़े उतार दिए थे।
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कुश्ती संघ के एक पदाधिकारी के अनुसार काजराशविली पांच हजार अमेरिकी डॉलर प्रति माह के वेतन पर भारतीय ग्रीको रोमन टीम को कोचिंग देने को तैयार हुए हैं। उनका नाम खेल मंत्रालय को भेजा जा रहा है। कॉमनवेल्थ गेम्स को ध्यान में रख मंत्रालय से उन्हें जल्द से जल्द वीजा जारी करने की प्रार्थना की जाएगी। काजराशविली जार्जिया और पोलैंड की ग्रीको रोमन टीमों के भी कोच रह चुके हैं। यूरोपियन चैंपियन रहने के साथ वह 1979 में जूनियर वर्ल्ड चैंपियन भी रहे हैं।
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सोवियत संघ के लिए 1982 की वर्ल्ड चैंपियनशिप में ग्रीको रोमन के 48 किलो भार में स्वर्ण जीतने वाले जॉर्जियाई टीमो काजराशविली वही जज हैं, जिन्हें यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग (यूडब्लूडब्लू) ने रियो ओलंपिक के 65 किलो के क्वार्टर फाइनल में उजबेकिस्तानी पहलवान का पक्ष लेने पर सस्पेंड किया था। उनके साथ कोरियाई व रूसी जजों को भी आगे के मैचों में बाउट की ऑफिशिएटिंग से रोका गया था।
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प्यूर्टो रिको के पहलवान फ्रैंकलिन गोमेज को यह मुकाबला चार की बजाय दो अंक देने के कारण उजबेकी नवरूजोव से हारना पड़ा था। इन तीनों जजों के सस्पेंशन को रियो ओलंपिक के दौरान काफी सुर्खियां मिली थी। यूडब्लूडब्लू को इसके बाद जजिंग और रेफरीशिप को सुधारने के लिए व्यापक कदम उठाने पड़े। ये वही नवरूजोव हैं, जिनके खिलाफ कांस्य पदक मुकाबले में खराब रेफरीशिप के लिए मंगोलियाई कोचों ने मैट पर ही अपने कपड़े उतार दिए थे।
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कुश्ती संघ के एक पदाधिकारी के अनुसार काजराशविली पांच हजार अमेरिकी डॉलर प्रति माह के वेतन पर भारतीय ग्रीको रोमन टीम को कोचिंग देने को तैयार हुए हैं। उनका नाम खेल मंत्रालय को भेजा जा रहा है। कॉमनवेल्थ गेम्स को ध्यान में रख मंत्रालय से उन्हें जल्द से जल्द वीजा जारी करने की प्रार्थना की जाएगी। काजराशविली जार्जिया और पोलैंड की ग्रीको रोमन टीमों के भी कोच रह चुके हैं। यूरोपियन चैंपियन रहने के साथ वह 1979 में जूनियर वर्ल्ड चैंपियन भी रहे हैं।
कोच करीमी फ्रीस्टाइल पहलवानों को सिखाएंगे ईरानी दांव
हुसैन करीमी
- फोटो : File
महान पहलवान कई बार के वर्ल्ड चैंपियन सर्गेई ब्लागलाजोव से पैसे पर समझौता नहीं होने पर कुश्ती संघ को फ्रीस्टाइल पहलवानों के लिए ईरानी कोच मिल गया है। रियो ओलंपिक में ईरानी कुश्ती टीम के साथ असिस्टेंट कोच रहे हुसैन करीमी नए कोच होंगे। वह ब्लादीमीर मेट्रेशविली की जगह लेंगे। कुश्ती संघ का कहना है कि दोनो कोच को एक साथ बुलाया जा रहा है, लेकिन महिला टीम के लिए जापान ने अपना कोच देने से मना कर दिया है।