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दुष्कर्म के आरोप लगे, नौकरी गंवाई पर लड़ाई लड़ 12 साल में हासिल किया चौथी बार ओलंपिक कोटा

Sat, 31 Aug 2019 12:39 AM IST
Rohit Ojha स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला Published by: Rohit Ojha Updated Sat, 31 Aug 2019 12:39 AM IST
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Sanjeev Rajput Secures India 8th Olympic Know his Struggle and Journey
संजीव राजपूत
जीवन के उतार-चढ़ाव क्या होते हैं। यह चार बार के एशियाई खेलों के मेडलिस्ट हरियाणा के शूटर संजीव राजपूत से अच्छी तरह कोई नहीं जान सकता है। भारतीय टीम के सबसे अनुभवी शूटर ने रजत पदक के साथ देश को रियो डि जेनेरियो विश्व कप में चौथी बार ओलंपिक का कोटा दिलाया। 2016 में रियो ओलंपिक के लिए कोटा हासिल करने के बावजूद एनआरएआई ने उनका रियो का टिकट ट्रैप शूटर काइनन चेन्नई को दे दिया। 
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कुछ माह बाद उन पर दुष्कर्म के आरोप लगे। उनकी नौकरी चली गई। संजीव आज भी इन आरोपों पर अदालती लड़ाई लड़ रहे हैं। इस लड़ाई के बीच ही 38 साल के इस शूटर ने राष्ट्रमंडल खेलों का स्वर्ण और एशियाई खेलों का रजत जीता। उनके राज्य ने उन्हें इन पदकों का कोई कैश अवार्ड नहीं दिया। बृहस्पतिवार को भी संजीव की किस्मत उनसे हंसी-ठिठोली कर रही थी।
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10 पर लगा निशाना दिखाया शून्य 

50 मीटर थ्री पोजीशन के फाइनल में 39वें निशाने पर उनका स्कोर शून्य दिखाया गया। इसका मतलब यह था कि वह पदक और कोटा की दौड़ से बाहर होने वाले हैं, लेकिन इस शूटर ने प्रोटेस्ट दाखिल किया। हैरानी जनक तरीके से संजीव सही थे निशाना 10 पर लगा था। बावजूद इसके संजीव स्वर्ण नहीं जीत पाए। 1.1 की बढ़त के बावजूद उन्होंने अपना अंतिम निशाना 8.8 का किया और 2 अंक से उनके हाथ से स्वर्ण फिसल गया।
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संजीव ने अमर उजाला से खुलासा किया कि निशाने पर हाईब्रिड लेजर पर लगाए जाने थे। इसमें गलती की गुंजाइश बहुत कम होती है। इस लिए शूटिंग में प्रोटेस्ट स्वीकार नहीं किए जाते हैं, लेकिन यहां चेकिंग में उनका निशाना 10 पर निकला। क्वालिफाइंग राउंड में भी उनकी बंदूक में खराबी आ गई थी। संजीव का दावा है कि उनका स्कोर 1181 होना चाहिए था, लेकिन दिया 1180 गया। 

अब तो शूटिंग से ही दे सकता हूं जवाब

दो बार के ओलंपियन और चौथा विश्व कप पदक जीतने वाले संजीव बेहद भावुक होकर कहते हैं कि उनके पास शूटिंग में अच्छा प्रदर्शन कर जवाब देने के अलावा कोई चारा नहीं है। पिछली बार का अन्याय नहीं दोहराया जाए इसके लिए वह भगवान से यही प्रार्थना करते हैं कि 10 मीटर एयरराइफल केपुरुषों और ट्रैप शूटरों को ओलंपिक कोटा मिल जाए जिससे 50 मीटर थ्री पोजीशन में टोक्यो ओलंपिक के लिए उनका रास्ता साफ हो जाए।

संजीव अपने प्रदर्शन के दम पर टारगेट ओलंपिक पोडियम (टॉप्स) में शामिल हैं। यहीं से उन्हें ट्रेनिंग का सहारा मिल रहा है, लेकिन कमाई के नाम पर वह कुछ नहीं कर रहे हैं। संजीव कहते हैं कि अब तो उन्होंने कोचिंग देना भी बंद कर दिया है। आरोपों के बाद उन्होंने कोचिंग से तौबा कर ली है।

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