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ओलंपिक मेडल जीतने के बाद घर आते ही की कढ़ी-चावल की डिमांड

Fri, 26 Aug 2016 11:39 PM IST
हेमंत रस्तोगी/ अमर उजाला, दिल्ली
हेमंत रस्तोगी/ अमर उजाला, दिल्ली Updated Fri, 26 Aug 2016 11:39 PM IST
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Sakshi Malik Exclusive Interview With Amar Ujala
साक्षी मलिक - फोटो : PTI
ओलंपिक मेडल आने के बाद घर लौटी साक्षी मलिक की मानों तो दुनिया बदल गई है। उन्हें विश्वास नहीं हो रहा है कि उनका देश भर में नाम हो गया है। फिलहाल साक्षी आराम के मूड में हैं। दो-तीन माह वह आराम करना चाहती हैं और उसके बाद मिशन टोकियो ओलंपिक में जुट जाएंगी। उन्होंने घर आते ही मां से अपनी फेवरेट कढ़ी-चावल की डिमांड की। मां ने उनकी यह इच्छा भी पूरी की। साक्षी को वह दिन भी ध्यान है जब कुश्ती संघ ने दूसरे ओलंपिक क्वालीफाइंग में गीता को भेजा था। उस दौरान सब कुछ भगवान और किस्मत पर छोडने वाली साक्षी ने अमर उजाला से अपने दिल की कई बातें बयां की।
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साक्षी ने कहा, “मैं पिछले 12 सालों से ऐसे ही लड़ती आ रही हूं। अब मेरा यह स्टाइल बन गया है। हालांकि मेरे कोचेज ने कई बार रणनीति में परिवर्तन भी किया है, लेकिन ज्यादातर मैं अपनी ताकत को बचा कर रखती हूं और अंत में सारा कुछ झोकने की कोशिश करती हूं। दिमाग में हमेशा यही रहता है कि किसी तरह देश के लिए कुछ कर जाऊं। रियो में भी यही बात दिमाग में थी तभी पांच अंकों से पिछडने के बाद वापसी कर पदक जीता।“
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घर आते ही सबसे पहले क्या किया?

Sakshi Malik Exclusive Interview With Amar Ujala
साक्षी मलिक - फोटो : getty
रियो में मैंने अपने फेवरेट कढ़ी चावल को काफी मिस किया। मैं इस डिश को बेहद पसंद करती हूं। मां से मैंने कढ़ी-चावल बनवाए और खाए। पहले ओलंपिक क्वालीफाइंग केबाद दूसरे में आपके स्थान पर गीता को भेज दिया गया था। आपके कोच ने इसका विरोध भी किया था। उस दौरान आपके दिल पर क्या बीती थी?

मेरे लिए वह कठिन समय था। हालांकि कुश्ती संघ की यही योजना थी कि तीन क्वालीफाइंग में से ट्रायल में जीतने वाले को दो और एक में दूसरे स्थान पर रहने वाले को मौका दिया जाएगा। मेरी यही मांग थी कि मैं ट्रायल में पहले स्थान पर रही हूं तो मुझे पहले दो क्वालीफाइंग में मौका दिया जाए। लेकिन संघ ने गीता दीदी को दूसरे में ही मौका दे दिया।

हालांकि मैं अब इन बातों को भूल चुकी हैं, लेकिन वह कठिन समय था। मैंने सब कुछ भगवान पर छोड़ दिया था। मैंने यही सोच लिया था कि अगर किस्मत में ओलंपिक खेलना होगा तो मुझे कोई रोक नहीं पाएगा। अगर गीता दीदी की किस्मत में ओलंपिक होगा तो वह जाएंगी, लेकिन तीसरे क्वालीफाइंग में मुझे फिर मौका मिला और मैंने इसे हाथ से नहीं जाने दिया।

कौन है साक्षी मलिक के रोल मॉडल और कितनी बदली है जिंदगी

Sakshi Malik Exclusive Interview With Amar Ujala
साक्षी मलिक - फोटो : PTI
जब से मैं समझदार हुई हूं ओलंपिक मेडलिस्ट सुशील कुमार और योगेश्वर दत्त की सफलता को देखा है। ये दोनों पहलवान ही मेरे रोल मॉडल हैं। मैंने हमेशा यही सपना देखा कि जिस तरह इन दोनों ने ओलंपिक में मेडल जीता मैं भी ऐसा कुछ करके दिखाऊं। फिर जिस तरह इन दोनों ने कई बार चोटों के बावजूद वापसी कर मेडल जीते। इस बात ने भी मुझे बेहद प्रभावित किया। ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में ये दोनों मेरे साथ थे। इन दोनों ने मेरा खूब उत्साहवर्धन किया। मेरे जहन में यह बातें अब तक ताजा हैं।

पढ़ाई और पहलवानी में तालमेल को लेकर साक्षी ने कहा, “शुरूआत में यह बेहद मुश्किल था। स्कूल से आने के बाद ट्यूशन करना और साथ में पहलवानी भी करना, लेकिन एक बार आदत पड़ गई तो सब कुछ आसान लगने लगा। बस दोनों को ही जिम्मेदारी समझा और अच्छे नतीजे मिले।“

साक्षी को अब भी यकीन नहीं कि उनका इतना नाम हो गया है। वो कहती हैं, “मुझे सारे देश में लोग जानने लग गए हैं। यह मेरे लिए खास है। पहले ऐसा नहीं था, लेकिन मैं इस प्यार को बनाकर रखना चाहती हूं। पहले दो-तीन महीने आराम करूंगी उसके बाद एक बार फिर टोकियो ओलंपिक में कुछ कर गुजरने के लिए तैयारियों में जुट जाऊंगी।”
 
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