Olympic Boxing Qualifier: भारतीय मुक्केबाजी में महासंग्राम, क्या है मैरीकॉम और निखत का विवाद?
टोक्यो ओलंपिक 2020 क्वालीफिकेशन के लिए भारतीय मुक्केबाजी में जारी विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा। स्टार मुक्केबाज एमसी मैरीकॉम के खिलाफ युवा निखत जरीन ने आंदोलन छेड़ दिया है। ओलंपिक क्वालीफिकेशन में मौका न दिए जाने के बाद निखत ने अपनी आवाज खेलमंत्री और देश के शीर्ष खेल हुक्मरानों तक पहुंचा दी है। निखत ने भारतीय मुक्केबाजी संघ के उस फैसले को टक्कर देते हुए एक ट्वीट किया, जिसमें मैरीकॉम को बिना क्वालीफायर खेले ही टोक्यो ओलंपिक के लिए भारतीय बॉक्सिंग की टीम में शामिल कर लिया गया है।
आखिर क्या है पूरा मामला?
दरअसल, बॉक्सिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया ने छह बार की वर्ल्ड चैंपियन एमसी मैरीकॉम को बिना ट्रॉयल के ही 51 किलोग्राम भारवर्ग में भारत का प्रतिनिधि बना दिया। मैरीकॉम ने हाल ही में रूस में खत्म हुई विश्व महिला मुक्केबाजी चैम्पियनशिप में कांस्य पदक जीता है। बदले हुए भारवर्ग 51 किलोग्राम में मैरी को सेमीफाइनल में हार मिली थी, जिससे उन्हें कांस्य पदक से ही संतोष करना पड़ा था।
इस विश्व चैम्पियनशिप से पहले बीएफआई की नीति थी कि महिला एवं पुरुष दोनों वर्गो में पदक विजेता खिलाड़ियों को ही ओलंपिक क्वालीफायर में भेजा जाएगा और उन्हें ट्रायल्स नहीं देनी होगा। महिला वर्ग में हालांकि ओलंपिक क्वालीफायर में जाने का नियम सिर्फ स्वर्ण और रजत पदक विजेताओं पर लागू होता है।
बीएफआई ने विश्व चैम्पियनशिप के ट्रायल्स में भी निखत को मैरीकॉम के खिलाफ उतरने भी नहीं दिया था। उस समय चयन समिति के चेयरमैन राजेश भंडारी ने कहा था कि वह निखत को भविष्य के लिए बचा कर रख रहे हैं।
16 अक्टूबर को जब निखत को पता लगा कि ओलंपिक के लिए ट्रायल्स नहीं होंगे तो वह खुद को ठगा महसूस करने लगी। उन्होंने ट्रायल्स की मांग की और ओलंपिक क्वालिफायर के लिए मैरी के साथ मुकाबले की बात की, जिसे एसोसिएशन ने यह कहकर ठुकरा दिया कि संघ अपनी ओर से भी मैरीकॉम का चयन कर सकता है।
निखत की खेल मंत्री से शिकायत
23 साल की निखत ने अपने पत्र में लिखा कि, 'मैं सिर्फ एक निष्पक्ष मौका चाहती हूं। मैं जिस चीज के लिए ट्रेनिंग कर रही हूं अगर मुझे उसके ट्रायल में मौका ना दिया जाए तो यह सही नहीं है। खेल निष्पक्षता का नाम है मैं देश में अपना विश्वास नहीं खोना चाहती।
निखत ने कहा, 'हर कोई किसी भी दिन जीत सकता है। यह मुक्केबाजी है। मैं यह नहीं कह रही कि मुझे ही भेजो, लेकिन कम से कम मुझे मौका तो दें। मैं उनसे बात करने की कोशिश करूंगी। इससे पहले उन्होंने कहा था कि विश्व चैम्पियनशिप में सिर्फ स्वर्ण और रजत पदक विजेता खिलाड़ी ही ओलंपिक क्वालीफायर के लिए अपने आप चुने जाएंगे, लेकिन वह अब महिलाओं के लिए नियम बदल रहे हैं।'
उन्होंने कहा, 'हर चीज अध्यक्ष के हाथ में है। मैंने उनसे बात करने की कोशिश की लेकिन वह जवाब नहीं दे रहे हैं। मैंने काफी बार कोशिश की। मैं अपने खेल मंत्री और मंत्रालय में बात करूंगी। इसके बाद देखते हैं कि क्या होता है। अगर यह सब होता रहा तो मैं अपने खेल पर ध्यान नहीं दे पाऊंगी।'
बिंद्रा ने किया जरीन का समर्थन
भारत के एकमात्र ओलंपिक व्यक्तिगत स्वर्ण पदक विजेता निशानेबाज अभिनव बिंद्रा ने निकहत जरीन की मुक्केबाज एमसी मैरीकॉम के खिलाफ ट्रायल की मांग का समर्थन किया है। बिंद्रा ने ट्वीट किया, मैरीकॉम का मैं पूरा सम्मान करता हूं लेकिन खिलाड़ी को अपने करिअर में बार-बार सबूत देने पड़ते हैं। यह सबूत कि हम आज भी कल की तरह खेल सकते हैं। कल से बेहतर और आने वाले कल से बेहतर। खेल में बीता हुआ कल मायने नहीं रखता।