फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Sports ›   Other Sports ›   National Sports Day: Why Dhyan Chand has not given the Bharat Ratna

खेल दिवस : दद्दा ध्यानचंद को अब तक क्यों नहीं मिला भारत रत्न, बेटे का छलका दर्द

Thu, 29 Aug 2019 02:11 AM IST
संदीप भट्ट सत्येन्द्र पाल सिंह, अमर उजाला, दिल्ली
सत्येन्द्र पाल सिंह, अमर उजाला, दिल्ली Published by: संदीप भट्ट Updated Thu, 29 Aug 2019 02:11 AM IST
सार

  • भारत की 1975 विश्व कप जीत के हीरो अशोक ने एक दशक पहले यह मुहिम शुरू की थी।
  • तंगी काटी पर नहीं बने विदेशी टीम के कोच। 
  • 12 ओलंपिक मैचों में दागे 39 गोल। 

विज्ञापन
National Sports Day: Why Dhyan Chand has not given the Bharat Ratna

विस्तार

हॉकी के सर्वकालीन महानतम खिलाड़ी दद्दा ध्यानचंद को देश का सर्वोच्च नागरिकसम्मान भारत रत्न दिलाने के लिए उनके मंझले बेटे अशोक कुमार सिंह आज भी डटे हुए हैं। भारत की 1975 विश्व कप जीत के हीरो अशोक ने एक दशक पहले यह मुहिम शुरू की थी। पर 1928 से 1936 तक  लगातार तीन ओलंपिक में स्वर्ण पदक जिताने वाले हॉकी के जादूगर ध्यानचंद को यह पुरस्कार अभी तक नहीं मिल पाया है।
विज्ञापन


अशोक ने जबलपुर से अमर उजाला से कहा, कई पूर्व केंद्रीय खेल मंत्री ध्यानचंद के नाम की सिफारिश भारत रत्न के लिए कर चुके हैं, लेकिन अब तक उन्हें यह सर्वोच्च नागरिक सम्मान नहीं मिल पाया। मैं उनके बेटे के नाते नहीं बल्कि हॉकी खिलाड़ी के नाते यह मानता हूं कि वह इस सम्मान के वाकई हकदार हैं।
विज्ञापन


उन्होंने अपनी हॉकी की कलाकारी से देश का गौरव बढ़ाया और उस दौर में देश को ओलंपिक में लगातार तीन सुनहरे तमगे दिलाए जब सुविधाएं नाममात्र थी। देशभर से यही आवाज उठती है कि ध्यानचंद को अब तक भारत रत्न क्यों नहीं। मेरे पास इसका कोई जवाब नहीं। मुझे अभी भी उम्मीद है कि सरकार इस बाबत सोचेगी और उन्हें भारत रत्न से नवाजेगी। ज्ञात रहे दद्दा के जन्मदिवस 29 अगस्त को राष्ट्रीय खेल दिवस के रूप में मनाया जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


तंगी काटी पर नहीं बने विदेशी टीम के कोच : पिता और हॉकी खिलाड़ी के रूप में ध्यानचंद से सिर्फ देश के लिए खेलना सीखा। दद्दा हमेशा भारतीय हॉकी के लिए जिए। घर में भले ही हमने तंगी झेली पर उन्होंने विदेश में कोचिंग देने के बड़े से बड़े प्रस्ताव ठुकरा दिए। वह हमेशा यही कहते थे कि मैं किसी विदेशी टीम को प्रशिक्षण देकर देश के खिलाफ कभी खड़ा नहीं हो सकता।

मैनें भी उनकी राह पर चलते हुए विदेशी टीम को कोचिंग देने के प्रस्ताव ठुकरा दिए। मुझे मालूम था कि मैं विदेशी टीम को प्रशिक्षण दूं इसके लिए दद्दा कभी राजी नहीं होंगे। उनका यही मंत्र था अपना सर्वश्रेष्ठ खेल खेलो। देश पहले बाकी सब बाद में।

 

कौन थे मेजर ध्यानचंद

जन्म : 29 अगस्त, 1905, इलाहाबाद

निधन : 05 दिसंबर, 1979, दिल्ली 

12 ओलंपिक मैचों में दागे 39 गोल :  ध्यानचंद 1926  से 1949  तक करीब 23 साल तक भारत के लिए खेले। उन्होंने देश को आजादी से पहले एम्सर्टडम (1928),  लॉस एंजिलिस(1932) और बर्लिन (1936) में लगातार तीन ओलंपिक में पीले तमगे दिलाए। तीन ओलंपिक के 12 मैचों में ध्यानचंद ने 39  गोल दागे। उन्होंने भारत के लिए 195  मैच खेले और 570 गोल किए।  
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all Sports news in Hindi related to live update of Sports News, live scores and more cricket news etc. Stay updated with us for all breaking news from Sports and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed